भारत और इजरायल के बीच दशकों से चल रही रणनीतिक साझेदारी अब एक नए आर्थिक मोड़ पर पहुंच चुकी है. तेल अवीव में आज ऐसा ऐतिहासिक क्षण देखा गया, जिसने दोनों राष्ट्रों के व्यापारिक भविष्य को नई दिशा देने की नींव रख दी. लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को आखिरकार औपचारिक रूप मिल गया है. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और इजरायल के उद्योग मंत्री नीर बरकत ने इस समझौते की शर्तों पर हस्ताक्षर कर इसे नई मंज़िल तक पहुंचा दिया.
यह कदम न केवल दो देशों के द्विपक्षीय व्यापार को गति देने वाला है, बल्कि यह तकनीकी, कृषि, रक्षा और नवाचार क्षेत्रों में नए अवसरों के द्वार भी खोल सकता है.
तेल अवीव में कूटनीतिक और कारोबारी सरगर्मी
पीयूष गोयल फिलहाल 60 सदस्यीय भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ इजरायल के तीन दिवसीय दौरे पर हैं. इस विज़िट का प्रमुख उद्देश्य FTA वार्ताओं का आकलन और अंतिम रूप देना था. बुधवार को तेल अवीव से आई खबरों ने दोनों देशों के उद्योग जगत में उत्साह की लहर दौड़ा दी.मंत्रियों के बीच हुई बैठक में न सिर्फ समझौते की शर्तें तय की गईं, बल्कि सहयोग के उन नए क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई जो भविष्य में दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को जोड़ने का काम करेंगे—जिनमें इनोवेशन इकोसिस्टम, निवेश प्रवाह, और तकनीकी साझेदारी शामिल हैं. पीयूष गोयल और नीर बरकत दोनों ने भरोसा जताया कि यह FTA आने वाले वर्षों में भारत-इजरायल व्यापार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगा.
14 साल बाद मिली सफलता
भारत और इजरायल के बीच मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत वर्ष 2010 में शुरू हुई थी. अब तक कुल आठ राउंड की गहन बातचीत हो चुकी थी. हालांकि कई बार चर्चाएं धीमी पड़ीं, फिर भी अक्टूबर 2021 से प्रक्रिया फिर सक्रिय हुई और अंततः 2025 में इसका परिणाम सामने आ गया.यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक आंकड़े कमजोर पड़े थे. वित्त वर्ष 2024–25 में भारत का इजरायल को निर्यात 4.52 अरब डॉलर से घटकर 2.14 अरब डॉलर रह गया था. इसी तरह आयात में भी गिरावट दर्ज की गई थी.FTA का अंतिम रूप लेना इस व्यापारिक गिरावट की भरपाई करने और साझेदारी को फिर से सक्रिय व मजबूत करने का एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
कौन-कौन से क्षेत्रों में आएंगे बदलाव?
भारत एशिया में इजरायल का दूसरा सबसे बड़ा व्यापार साझेदार है. अभी तक दोनों देशों का अधिकांश व्यापार हीरे, पेट्रोलियम उत्पादों और रसायनों तक सीमित था. लेकिन बीते वर्षों में हाई-टेक, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा तकनीक, संचार और मेडिकल उपकरणों जैसे क्षेत्रों में तेजी से इजाफा हुआ है.
भारत से इजरायल को मुख्य निर्यात
मोती और कीमती पत्थर, मोटर वाहन (डीजल), मशीनरी, टेक्सटाइल और परिधान, कृषि उत्पाद. FTA लागू होने के बाद इन भारतीय उत्पादों को इजरायली बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी मौके मिलेंगे. इससे भारतीय किसानों, टेक्सटाइल उद्योग, एक्सपोर्ट सेक्टर और MSMEs तक को सीधा फायदा पहुंचेगा. इजरायल की ओर से आने वाली हाई-टेक तकनीकें और कृषि नवाचार भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं—चाहे वह जल प्रबंधन हो, सिंचाई तकनीक हो या साइबर सुरक्षा.
कैसे बदलेगा भारत-इजरायल व्यापार का भविष्य?
इस समझौते के बाद कस्टम ड्यूटी में कमी आएगी, बाजार पहुंच आसान होगी, तकनीकी सहयोग बढ़ेगा, स्टार्टअप और इनोवेशन क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाएं बनेंगी.भारत के लिए यह FTA न केवल एक व्यापारिक उपलब्धि है बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का भी मजबूत आधार है. दोनों देशों के बीच नई आर्थिक ऊर्जा एक ऐसे दौर की शुरुआत कर सकती है जहां व्यापार, विज्ञान और तकनीक हाथ मिलाकर नए आयाम तय करेंगे.
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