बीजिंग: चीन ने एक अभूतपूर्व प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है, जो दुनिया का पहला तैरता हुआ आर्टिफिशियल आइलैंड बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. यह आइलैंड न केवल समुद्र में कहीं भी स्थानांतरित किया जा सकता है, बल्कि यह परमाणु हमलों को भी झेलने के लिए डिजाइन किया गया है. इस आइलैंड का आकार चीन के नए फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर जितना होगा और यह प्लेटफॉर्म चार महीने तक बिना किसी सप्लाई के काम करने की क्षमता रखता है.
आइलैंड का आकार और क्षमताएं
यह आर्टिफिशियल आइलैंड लगभग 138 मीटर लंबा और 85 मीटर चौड़ा होगा. इसका डिज़ाइन इसे समुद्र में किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए सक्षम बनाता है. पानी की सतह से इसका मुख्य डेक 45 मीटर ऊँचा होगा, और यह ट्विन-हुल डिजाइन के साथ समुद्र में लहरों का सामना कर सकता है. यह आइलैंड 15 नॉट्स (लगभग 28 किमी/घंटा) की गति से चलने की क्षमता रखता है और यह कैटेगरी 17 के टाइफून को भी सहन कर सकता है.
परमाणु धमाकों से सुरक्षा
इस आइलैंड को समुद्र में स्थिर रहने के लिए खास तरह से डिजाइन किया गया है, जिसमें पावर, कम्युनिकेशन और नेविगेशन जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं होंगी. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस आइलैंड को परमाणु हमलों से भी सुरक्षा प्रदान करनी होगी, क्योंकि यह कई अहम कार्यों के लिए इस्तेमाल होगा. इसके लिए, परंपरागत मोटे स्टील प्लेटों के बजाय, वैज्ञानिकों ने एक नया हल्का "सैंडविच बल्खेड" डिज़ाइन किया है. इस डिज़ाइन में छोटी मेटल ट्यूब्स की जाली होती है, जो किसी भी धमाके के प्रभाव को नियंत्रित और धीमा कर देती है.
न्यूक्लियर धमाके से बचाव में नई तकनीक
यह नया मेटामटेरियल (सैंडविच बल्खेड) भारी स्टील से कहीं ज्यादा मजबूत पाया गया है. इस पैनल की 60 मिमी मोटाई ने टेस्ट में 177 किलोपास्कल के धमाके को झेल लिया, जो कई इमारतों को ध्वस्त करने के लिए पर्याप्त होता है. इससे धमाके का झटका 58% तक कम हो गया और संरचना पर तनाव 14% तक घटा.
सैन्य और नागरिक दोनों कार्यों के लिए उपयुक्त
हालांकि इस प्लेटफॉर्म को वैज्ञानिक शोध के लिए डिज़ाइन किया गया है, लेकिन इसका सैन्य उपयोग भी संभव है. इसका निर्माण चीन के सैन्य न्यूक्लियर सुरक्षा मानकों के आधार पर हुआ है, जिससे यह प्रमाणित होता है कि यह प्लेटफॉर्म सिविल और सैन्य दोनों कार्यों के लिए तैयार किया जा रहा है. इसके बाद, इसे विवादित समुद्री क्षेत्रों जैसे दक्षिण चीन सागर में तैनात किया जा सकता है, जहां यह एक निगरानी स्टेशन, कमांड सेंटर और लॉजिस्टिक हब के रूप में कार्य कर सकता है.
2028 में लॉन्च होने की तैयारी
यह अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म चीन की 14वीं पंचवर्षीय योजना का हिस्सा है और इसे 2028 में लॉन्च करने की योजना बनाई गई है. इसे "Deep-Sea All-Weather Resident Floating Research Facility" नाम से जाना जाएगा. इस परियोजना को शंघाई जिओटोंग यूनिवर्सिटी (SJTU) और चाइना स्टेट शिपबिल्डिंग कॉरपोरेशन ने मिलकर डिज़ाइन किया है.
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