सोने से चमक गई भारत की तिजोरी, रिकॉर्ड स्तर पर विदेशी मुद्रा भंडार, जानें फॉरेक्स रिजर्व के फायदे

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए साल के अंत में एक बेहद सकारात्मक संकेत सामने आया है.

India foreign exchange reserves continuously increasing
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Bharat 24

India Forex Reserves: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए साल के अंत में एक बेहद सकारात्मक संकेत सामने आया है. देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) लगातार चौथे सप्ताह बढ़ोतरी दर्ज करते हुए एक बार फिर मजबूत स्थिति में पहुंच गया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 26 दिसंबर 2025 को समाप्त सप्ताह में भारत का फॉरेक्स रिजर्व 3.29 अरब डॉलर बढ़कर 696.61 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.

यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है. इसके बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार मजबूत होना देश की आर्थिक स्थिरता और बेहतर मैक्रो-इकोनॉमिक मैनेजमेंट को दर्शाता है.

बीते हफ्तों में भी दिखी मजबूती

इससे पहले 19 दिसंबर 2025 को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में 4.36 अरब डॉलर की बढ़त दर्ज की गई थी, जिसके बाद कुल रिजर्व 693.31 अरब डॉलर पर पहुंच गया था.

गौरतलब है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर 2024 के अंत में 704.89 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर (ऑल टाइम हाई) पर पहुंच गया था. मौजूदा आंकड़े उस रिकॉर्ड के बेहद करीब हैं, जो यह संकेत देते हैं कि भारत दोबारा उस ऊंचाई को छू सकता है.

फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में इजाफा

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा माने जाने वाले फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

  • FCA में 18.4 करोड़ डॉलर की वृद्धि
  • कुल FCA बढ़कर 559.61 अरब डॉलर

डॉलर में दर्शाई जाने वाली FCA में सिर्फ अमेरिकी मुद्रा ही नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी अन्य मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल होता है. यही वजह है कि वैश्विक करेंसी मार्केट में बदलाव का सीधा प्रभाव FCA पर देखने को मिलता है.

सोने से और मजबूत हुई तिजोरी

इस सप्ताह भारत के गोल्ड रिजर्व में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. आंकड़ों के अनुसार:

  • गोल्ड रिजर्व में 2.95 अरब डॉलर का इजाफा
  • कुल गोल्ड रिजर्व बढ़कर 113.32 अरब डॉलर हो गया

सोना विदेशी मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा माना जाता है, क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर सुरक्षित संपत्ति (Safe Haven Asset) के रूप में देखा जाता है. संकट के समय गोल्ड रिजर्व किसी भी देश को आर्थिक स्थिरता प्रदान करता है.

IMF से जुड़े भंडार में भी बढ़ोतरी

रिपोर्टिंग सप्ताह में भारत के IMF से जुड़े भंडार में भी सुधार देखने को मिला:

  • स्पेशल ड्राइंग राइट (SDR) में 6 करोड़ डॉलर की बढ़त
  • SDR बढ़कर 18.80 अरब डॉलर हो गया
  • IMF में भारत का आरक्षित भंडार 9.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.87 अरब डॉलर पर पहुंच गया

ये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ भारत की वित्तीय स्थिति भी मजबूत बनी हुई है.

क्यों जरूरी है विदेशी मुद्रा भंडार?

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सेहत का अहम संकेतक माना जाता है. यह न केवल देश की वित्तीय ताकत दिखाता है, बल्कि संकट के समय एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है.

विदेशी मुद्रा भंडार के प्रमुख फायदे:

आयात भुगतान में सहारा
तेल, गैस और जरूरी वस्तुओं के आयात के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध रहती है.

रुपये की स्थिरता बनाए रखने में मदद
फॉरेक्स रिजर्व के जरिए रुपये में अत्यधिक गिरावट को रोका जा सकता है.

आर्थिक संकट से सुरक्षा
वैश्विक मंदी या वित्तीय अस्थिरता के दौरान यह बफर का काम करता है.

विदेशी कर्ज चुकाने की क्षमता
समय पर विदेशी कर्ज और ब्याज भुगतान में मदद मिलती है.

विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता है
मजबूत रिजर्व विदेशी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत होता है.

आपातकालीन परिस्थितियों में सहारा
अचानक पैदा हुई आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है.

लगातार चार हफ्तों तक विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी यह साफ दिखाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत दिशा में आगे बढ़ रही है. आने वाले समय में अगर यही रुझान बना रहता है, तो भारत एक बार फिर अपने 704 अरब डॉलर के ऑल टाइम हाई को पार कर सकता है.

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