India-EU Deal के क्या हैं मायने? पढ़ें The JC Show का संपूर्ण विश्लेषण

THE JC SHOW: जब नेतृत्व इतिहास रचता है तो समझौते भी इतिहास रचते हैं. भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुई इस मदर ऑफ ऑल डील्स के बीच सिर्फ कागजों की स्याही नहीं है बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वो कूटनीतिक सोच है जिसने भारत को एक भरोसेमंद साझेदार से ग्लोबल गेम चेंजर बना दिया है.

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THE JC SHOW: जब नेतृत्व इतिहास रचता है तो समझौते भी इतिहास रचते हैं. भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुई इस मदर ऑफ ऑल डील्स के बीच सिर्फ कागजों की स्याही नहीं है बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वो कूटनीतिक सोच है जिसने भारत को एक भरोसेमंद साझेदार से ग्लोबल गेम चेंजर बना दिया है. यह डील दिल्ली और ब्राजील्स के बीच नहीं यह डील 140 करोड़ भारतीयों के आत्मविश्वास की है. आज सवाल यह नहीं है कि समझौता कितना बड़ा है. सवाल यह है कि यही वो डील है जो ऐतिहासिक पल के साथ भारत को पश्चिम के साथ बराबरी की मेज पर अपनी स्थाई कुर्सी तय कर चुका है और क्या यह डील भारत को आर्थिक ताकत के साथ-साथ एक रणनीतिक महाशक्ति के तौर पर भी दुनिया के केंद्र में स्थापित करेगी. आज इसी को समझने की कोशिश करेंगे भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुई इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और इस फ्री ट्रेड डील के साथ. 

सवाल: आज के शो की हेडलाइन WE DID IT Modi’s Republic Day Gift, इसके मायने क्या है?

जवाब: इसके मायने हैं कि द डील इज डन ट्रंप और नो ट्रंप. मोदी है तो मुमकिन है. इस डील का परिणाम यह है कि संसार की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं एक साथ जुड़ गई हैं. एक नया अध्याय लिख रही हैं और भारत ने 27 देशों के लिए अपने दरवाजे वाइसवरसा खोल दिए हैं. ट्रंप की धमकियों के माहौल में यह डील एक ताजी हवा का झोंका है. इस डील के होने से यूरोप और भारत के बीच अर्थात ईयू राष्ट्रों और भारत के बीच कितना खुशी का माहौल है. आप इस चित्र से देखिए. वी डड इट. नरेंद्र मोदी और दो यूरोपियन लीडर्स हैं. कह रहे हैं वी डड इट. तो कितनी बड़ी सफलता है और कितना कहना चाहिए कि एप्रिसिएशन इस बात के लिए है पूरे संसार में कि नरेंद्र मोदी के एक्टिव पार्टिसिपेशन से यह इतनी बड़ी डील हुई है जिसके दूरगामी परिणाम होंगे. और रही बात रिपब्लिक डे गिफ्ट की तो स्वाभाविक है आज सारे राष्ट्र में खुशी का माहौल है. चीजें सस्ती होने से, कारें सस्ती होने से और बहुत सी दूसरे प्रोडक्ट टेक्सटाइल सस्ते होने से तो देश में एक उत्सव का सा माहौल है. इस समय इस डील के कारण से ये पहली बार ऐसा हो रहा है कि एक कमर्शियल डील के कारण से आम आदमी प्रभावित है. आम आदमी के मन में उत्साह आया है. 

सवाल: जो डील 18 सालों से सिर्फ बातचीत के रूप में थी. जैसे नरेंद्र मोदी ने फाइनल रूप दिया जैसे मोहर लगाई तो एक झटके में जो ये डील हुई उसको आप कैसे देखते हैं?

जवाब: इट नरेंद्र मोदी मिरेकल क्योंकि नरेंद्र मोदी डिसाइसिव हैं. वो फ्लेक्सिबल हैं. मनमोहन सिंह के टाइम में 2007 में डील की बात चली थी. 15 बैठकें हुई. परिणाम नहीं निकला. मोदी ने अपने हाथ में बीड़ा लिया इस डील को फाइनल करने का. परिणाम आपके सामने हैं. उन्होंने जो उनके मुख्य ट्रबल शूटर्स हैं. इस डील के जो फॉर्मेट है उसमें आपके विदेश मंत्री हैं, वित्त मंत्री हैं, पीयूष गोयल हैं. इनको समझाने की कोशिश की होगी. ऐसा मेरा मानना है कि बी प्रैक्टिकल, बी फ्लेक्सिबल. दुनिया में ओपन करना है हमें. 27 देशों में भारत का द्वार खुलने से भारत की अर्थव्यवस्था का विस्तार होगा. इनफैक्ट वी आर इन्वेस्टिंग इन ईच अदर्स फ्यूचर. यह सब बातें उन सबके समझ में आई और प्रधानमंत्री के मैंडेट को उन्होंने पूरा किया. अब सवाल यह उठता है कि यह डील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समय में ही क्यों एग्जीक्यूट हुई? क्यों कंप्लीट हुई? तो भाई देखो यह है नरेंद्र मोदी तकदीर लिखा के लाए हैं. जितने मुश्किल काम है, जितने असंभव काम है वो उनके हाथ से होते हैं. फिर चाहे राम मंदिर हो, चाहे धारा 370 हो तो उसी श्रंखला में यह डील एक और कड़ी है. यह माना जाना चाहिए. 

सवाल: प्रधानमंत्री मोदी ने इस डील को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा है. आखिर इसका मतलब क्या है?

जवाब: इसका मतलब स्पष्ट है. यह संसार की आज तक की सबसे बड़ी ट्रेड डील है. इसे कहना चाहिए संसार की सबसे बड़ी और आप देखिए संसार की सबसे बड़ी डील किस तरह से है कि एक्चुअल कहा जाए तो ये नरेंद्र मोदी मास्टर स्टॉक. नाउ ह ब्रिजिंग ग्लोबल मार्केट्स नरेंद्र मोदी जो है और बड़ी इस मायने में है कि आप देखिए 27 देश इधर 140 करोड़ लोग कुल मिला के 200 करोड़ लोगों की आबादी 2 अरब लोगों की आबादी का एक स्पेक्ट्रम है एक एरिया है वहां पे जो है और संसार की जो कुल जीडीपी है उसका 25% ये डील कवर करती है. ऐसा माना जा रहा है कि आज जो ट्रेड है ईयू और भारत के बीच में वो 120 130 बिलियन डॉलर है. उसे अगले 5 वर्षों में बढ़ाकर 200 बिलियन टारगेट करने का प्रस्ताव है. तो महत्वाकांक्षी डील है और ऐसी आशा की जानी चाहिए कि भारत की अर्थव्यवस्था के द्वार इन 27 देशों में जो खुलेंगे तो देश की अर्थव्यवस्था का और पुनर थान पुन निर्माण होगा. ऐसा माना जाना चाहिए. 

सवाल: भारत में आम लोगों के लिए इस एफटीए डील का क्या मैसेज है? 

जवाब: आप लोगों का मैसेज यही है एक तरह से कि भारत और यूरोप के बीच व्यापार कर मुक्त हो गया है. 99% जो ट्रेड है, कमोडिटीज है वो टैक्स फ्री हो गई हैं. दूसरा मैसेज सबसे बड़ा यह है सारी जो लग्जरी कार्स हैं 16 लाख से ऊपर वाली वो सारी जो है सस्ती हो गई है. चाहे Mercedes है, BMW है, Audi है. कोई कार अगर 4 करोड़ की थी तो आज 3 करोड़ की पड़ेगी. सीधा एक करोड़ का जंप है. 50 लाख से लेके 1 करोड़ तक का जो रिलीफ है वह इस डील से मिला है. तो बड़ा उत्साह है लोगों के मन में. हालांकि मध्यम वर्गीय लोग हैं उनके मन में उत्साह है जिन्होंने कोई Mercedes का सपना नहीं लिया था. आज सोचते हैं कि यार अगर थोड़ा सा इंतजाम और कर ले तो Mercedes ले सकते हैं. तो पूरे देश में क्रेज आ गया इस डील से Mercedes लेने का, BMW लेने का और लोग और दूसरे काम छोड़ के इस काम में लग गए हैं. एक तरह से उत्साह है इकॉनमी के प्रति जिसे कहना चाहिए. तो कारों का हुआ. उसके बाद में फिर वाइन का है 100 50% से लेकर के अब 30 35% पे आ गया है. बियर 50% सस्ती हो गई है. चॉकलेट्स हैं. फिर उसके अलावा आपके टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स हैं. टेक्सटाइल का जो एक्सपोर्ट है 263 बिलियन डॉलर है. अबाउट मोर और लेस टैक्स फ्री हो जाएगा. इसके बाद में जेम्स एंड ज्वेलरी 69 बिलियन डॉलर है. मोर और लेस टैक्स फ्री हो जाएगा. उसके साथ में फिर क्या है कि आपके रेडीमेड गारमेंट्स हैं फिर फार्मा है. तो कुल मिला क्या है कि सब चीजें सस्ती होने का एक माहौल जो महंगाई की मार लोग कहते थे इस एक डील से उस महंगाई की मार को कंट्रोल किया गया है. और अधिकांश चीजें जो है ना अब सख्ती हो जाएंगी. अधिकांश चीजें टोटली बिल्कुल जिसे कहना चाहिए बहुत ही कम दामों में मतलब एक जो मेजर करियलमेंट है प्राइस के अंदर मेजर रिलीफ जो है वो आपको देखने को इससे मिलेगा और बेसिकली देखा जाए तो ये कह सकते हैं कि दिस डील विल पुश ट्रांसफर टेक्नोलॉजीज और एक्सपोर्ट्स और भारत जो है एक्सपोर्ट का एक बेस बन सकता है बड़ा कारों का एक्सपोर्ट हो व्हीकल्स का एक बेस बन सकता है यहां पे तो कुल मिला के क्या है कि ये डील भारत की अर्थव्यवस्था में नए प्राण फूंकेगी और खास करके ट्रांसपोर्ट सेक्टर और जो सेक्टर मैंने बताए हैं इन सेक्टर में आपका एक्सपोर्ट जो है वह बहुत ज्यादा बढ़ेगा पहले की तुलना में ऐसा माना जाता है. 

सवाल: संसार के दूसरे देशों के लिए और विशेष तौर पर ट्रंप के लिए क्या मैसेज है?

जवाब: संसार के लिए तो मैसेज एक ही है. ह्यूमनिटी स्ट्रेंथ भारत की भाषा में बटोगे तो कटोगे. ठीक है? और ट्रंप के लिए मैसेज है वी डोंट केयर वी डोंट बोदर व्हाटएवर यू डू यह दो मैसेज है.

सवाल: कई बार सुना है लोगों से कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्रंप की बेतुकी बातें आरोपों का जवाब नहीं देते हैं आप क्या सोचते हैं? 

जवाब: नरेंद्र मोदी एक्शन से रिप्लाई करते हैं शब्दों से रिप्लाई नहीं करते उन्होंने बहुत बड़ा रिप्लाई कर दिया इस डील को साइन करके वी डोंट बोदर इन अ वे जो है ठीक है रिप्लाई कर दिया उन्होंने फिर क्या नरेंद्र मोदी वेस्ट जो है उनके साथ काम करते हैं. वो कठिनाइयों के बीच में काम करते हैं. चुनौतियों के बीच में काम करते हैं. अब ये चुनौती थी तो डील को उन्होंने किया. आप देखिए जो है तो ट्रंप को जितना अच्छे से नरेंद्र मोदी ने पढ़ा है संसार में शायद किसी ने नहीं पढ़ा है. अपेरेंटली कभी-कभी ऐसा लगता है कि ट्रंप हमें इमुलेट कर रहे हैं. ट्रंप मानते नहीं है. ट्रंप हमें इग्नोर कर रहे हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. नरेंद्र मोदी मास्टरमाइंड डिप्लोमेट हैं. अल्टीमेटली आप देखना वो जो सब टेरिफ है घटेंगे. बढ़िया डील होगी और उस दिन आप कहेंगे नरेंद्र मोदी ने ट्रंप को जवाब नहीं देके अच्छा ही किया. 

सवाल: सर भारत और ईयू राष्ट्र के बीच में जो 13 समझौते हुए हैं इसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगे? 

जवाब: देखो समझौते तो अद्भुत हैं. बेसिक आईडिया यह है जिसे कहना चाहिए टू रीइफोर्स स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप बिटवीन यूरोप एंड इंडिया जैसे है और समझौतों की बात अगर करते हैं बेसिकली मोटे-मोटे समझौते अगर हम देखें तो आपका ट्रेड एग्रीमेंट तो है ही एक चमत्कारी समझौता है अपने आप में वाइटल समझौता है फिर आप देख लीजिए डिफेंस एंड सिक्योरिटी कुछ रेजोरशंस थे यूक्रेन और गाजा को लेके लेकिन सॉर्ट आउट किए लोगों ने बैठ के जो है मेरिटाइम सिक्योरिटी की बात है इनोवेशन की बात है, स्पेस कोपरेशन की बात है, टेक्नोलॉजी की बात है. तो कुल मिला के क्या है कि बहुत अच्छे समझौते हुए हैं. और सबसे बड़ी बात क्या है कि समझौते उन्हें लागू करने के इरादे से हुए हैं. सबके चेहरे पे सबकी भाषा में जो है ना उसे जो एक एक जो मैसेज है वो ये है कि वी आर सीरियस. वी आर कमिटेड टू ऑल दी 13 एग्रीमेंट्स जो है. तो ये सब अच्छे एग्रीमेंट होंगे. 

सवाल: भारत और ईयू का व्यापार संतुलन कैसा है?

जवाब: संतुलन भारत के पक्ष में है. पॉजिटिव है, प्लस है. ट्रेड डेफिसिट नहीं है. उसके अंदर जो है मैंने पढ़ा कोई 75.8 अरब डॉलर का है एक्सपोर्ट और इंपोर्ट वहां से 60.7 समथिंग का. तो $5 अरब डॉलर का एक पॉजिटिव जो है ना चीज जो पॉजिटिव मतलब प्लस जो है वो बैलेंस है एक तरह से भारत और उनके बीच में और ऐसा अनुमान मैंने पहले भी कहा है कि 5 वर्ष में ऐसी आशा है कि 200 बिलियन डॉलर का व्यापार इनमें हो जाएगा एट द मोमेंट जो है ट्रेड बैलेंस इज़ नॉट अ सब्जेक्ट ऑफ़ एनीबडी वी आर इन बेनिफिट वी आर बेनिफिशरी. 

सवाल: पीएम मोदी ने ये जो ईयू राष्ट्र के साथ में मोबिलिटी पैक्ट किया है इसके क्या-क्या लाभ होंगे? 

जवाब: इट विल ओपन मेजर डोर्स फॉर प्रोफेशनल्स आप देखिए जैसे जो है तो एक तो इसमें क्या है कि अनटेप्ड मूवमेंट होगा छात्रों का है कि जितने चाहे आप जा सकते हैं छात्र वीजा का इशू नहीं है ट्रंप का इशू नहीं है इज ए न्यू ओपनिंग जो है फिर क्या अगर आप वहां जाएंगे ग्रेजुएशन करेंगे तो दो साल के लिए आपको सम सॉर्ट ऑफ एंप्लॉयमेंट वहां पे जो है पोस्ट जॉब कुछ काम वहां पे आपको मिलेगा तो इस तरह से क्या है कि ग्लोबल मोमेंट है ये इस समय राहत की बात है क्योंकि ट्रंप के वीजा के कारण से और ट्रंप का जो सिस्टम है उससे लोग इतने परेशान कि एक आशा की किरण है यह डील कि चलो अमेरिका नहीं जाएंगे तो यूरोप में चलते हैं कहीं ना कहीं. तो इस तरह से जो है यह जो मोबिलिटी डील है इस वेरी एंथूजियास्टिक. 

सवाल: जब भारत में यूरोपियन देश निर्मित कारें या फिर अदर प्रोडक्ट्स सस्ते दर में मिलने लगेंगे तो क्या इंडियन कार मेकर्स को इससे नुकसान नहीं होगा?

जवाब: इसमें दो बातें हैं. पहली बात तो ये कि सर्वाइवल ऑफ़ द फिटेस्ट पीपल मस्ट कमट टू सर्वाइव वन. सेकंड इसमें कि सेफ्टी प्रोविजन यह है इसके अंदर सेफ गार्ड इस डील में यह है ओनली नेटिव यूरोपियन कार मेकर्स विल गेट दिस रिलीफ नॉन रेजिडेंट जिसे कहना चाहिए नॉन यूरोपियन कार मेकर्स विल नॉट बी अलाउड टू हैव दिस रिलीफ एंड टॉपिक एंड्स. 

सवाल: सर अगर यूरोपियन कंट्रीज के अलावा चीन, अमेरिका, जापान की जो कार्स हैं अगर वो इंडियन मार्केट में फ्लड हो जाती हैं तो उसका क्या इंपैक्ट होगा? 

जवाब: उसके दो कारण हैं. पहला तो मैंने कहा ना आपसे जो सुरक्षा कवच दे दिया है कि नॉन केवल नेटिव कंट्रीज अलाउ है. नॉन ईवी कंट्रीज है वो अलाउ नहीं है वहां पे. दूसरा क्या है कि अब भारत एक बड़ा अपने आप में एक हब बनने जा रहा है. ये कमट करेगा चाइना से और इसके साथ में तो कोई ज्यादा चिंता की बात नहीं है. और फिर क्या है मार्केट जितना बड़ा होता है ग्राहक उतना बड़ा आता है. कभी-क आप देखते हैं बाजार में कि एक कपड़े की दुकान होती है. दूसरी दुकान खुलती है तो कहता है देखो मेरा नुकसान होगा. अल्टीमेट मालूम पड़ा पूरा बाजार ही कपड़े का हो जाता है और सारा बाजार चलता है. दैट वे जो है तो कोई इसमें इस तरह की चुनौती नहीं है. एट द एंड ऑफ़ द डे दे विल बी द गेनर और दे विल बी इन प्रॉफिट. 

सवाल: कुछ लोगों का ऐसा भी कहना है कि इस ऐतिहासिक डील के बीच में कई चुनौतियां कई चैलेंजेस भी हैं. आप क्या कहेंगे?

जवाब: चुनौतियां ऑफ कोर्स हैं. बहुत बुरी डील है. एक तो इसको इंप्लीमेंटेशन करने में कई प्रोसीजर पार करने होंगे. पहले तो लीगल बैटल्स हैं उनको करना होगा. फिर क्या है कि यूरोपियन काउंसिल उसमें डील को क्लियर करना होगा. फिर 27 राष्ट्रों की जो पार्लियामेंट है उसे रेटिफाई कराना होगा. तो इन सब में समय लगता है. प्रयास ये कर रहा है भारत कि एक साल के अंदर ये डील इंप्लीमेंट 2027 से चालू हो जाए. लेकिन चुनौती सबसे बड़ी यह है. फिर कार्बन टैक्स की चुनौती है और एक चुनौती पोलशन की भी है देखा जाए तो. लेकिन कुल मिला के यह है कि मुख्य चुनौतियां जो थी उनको भारत पार कर चुका है और अब यह प्रयास है नरेंद्र मोदी का कि जल्द से जल्द सारी फॉर्मेलिटी पूरी करके इस डील को ऑपरेशनलाइज किया जाए. 

सवाल: ये जो ट्रेड डील थी उससे पहले ही भारत के 87% जो एक्सपोर्टर्स थे उनकी टैक्स छूट को खत्म कर दिया गया. तो जो भारतीय एक्सपोर्टर्स हैं उस पर इसका क्या इफेक्ट होगा?

जवाब: वो एक चिंता का विषय है. पीएसपी का एक प्लान था उसको 2 वर्ष के लिए स्थगित कर दिया उन्होंने. उसका मतलब यह है कि जो टैक्स छूट मिलती थी वो 87% लोगों को नहीं मिलेगी. अर्थात क्या है कि महंगे हो जाएंगी कीमतें. टेरिफ महंगा हो जाएगा, हायर हो जाएगा जो है. फिर दूसरा ये कार्बन का इशू है. तो इट रियल पॉइंट ऑफ़ कंसर्न फॉर द इंडियन एक्सपोर्टर्स. लेट अस सी जितनी जल्दी डील एग्जीक्यूट होगी, उतनी जल्दी इनकी समस्याओं का निराकरण होगा. तो लेट्स होप. 

सवाल: इस ऐतिहासिक डील के बारे में आखिर प्रधानमंत्री ने क्या कहा?

जवाब: प्रधानमंत्री ने कहा कि इट्स अ ग्लोबल गेम चेंजर डील. एंड द एजेंडा विल इशू क्लियर डायरेक्शंस टू एक्सलरेट द प्रोसेस ऑफ इनोवेशन वेल्थ एंड शेयर प्रोस्पेरिटी टेक्नोलॉजी एंड ऑल अदर थिंग्स उनके मन में ऐसा है कि बहुत बड़ा काम यह हुआ है जो सच भी है इसलिए उन्होंने बेसिकली कहा है कि ग्लोबल गेम चेंजर होगी ये डीएल जो है तो वी ऑल एग्री टू दिस. 

सवाल: सर अगर इसी तरह अमित शाह की बात करें निर्मला सीतारमण की बात करें डॉक्टर एज शंकर की बात करें उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बात करें तो उन्होंने इस डील के बारे में क्या कहा?

जवाब: अमित शाह ने कहा इट्स अ डिफाइनिंग मोमेंट फॉर इंडियन ट्रेड. कितनी बड़ी बात उन्होंने कही. दूसरा उन्होंने कहा कि इट रिफ्लेक्ट्स द डिप्लोमेटिक विज़न ऑफ़ द प्राइम मिनिस्टर टू गेन द अल्टीमेट गोल ऑफ़ आत्मनिर्भर भारत वाया बैलेंस एंड म्यूचुअली बेनिफिशियल अप्रोच. ये उन्होंने कहा सीतारमन का तो है ही. वो कहती है इट अ हिस्टोरिक डील दैट वे उन्होंने पीयूष गोयल की भी तारीफ की है. योगी आदित्यनाथ आई थिंक ही वाज़ ऑलमोस्ट द ओनली चीफ मिनिस्टर जिन्होंने एक्टिवली पार्टिसिपेट किया इस डिस्कशन में जो है और लोगों ने पसंद किया इस बात को कि एक रीजनल चीफ मिनिस्टर जो है वो नेशनल इस तरह के इश्यूज में अपना कंसर्न शो करता है क्योंकि यूपी सबसे बड़ा अब इस समय तो है ना कि ब्रांड आप एयरपोर्ट की बात कर लीजिए मार्केट की बात कर लीजिए और खुद अमित शाह ने पिछले दिनों कहा था कि योगी ने यूपी को बदल दिया है जो है तो खुद कहा चीफ मिनिस्टर यूपी ने 4 6 लाख करोड़ जो है मतलब 4.6 लाख करोड़ जो है वो बेनिफिट जो है इस अमाउंट का बेनिफिट जो है जो लोग लेबर इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं यूपी के अंदर उनको इससे मिलने वाला है और उन्होंने कहा कि ये एक ऐतिहासिक कदम है तो ह स्टेटमेंट वाज़ वेलकम बाय द इंडस्ट्री और इन सब लोगों ने इसी तरह से अपनी बात कही है. बट देयर इज़ अ ओवरऑल मोमेंटम अबाउट द सक्सेस ऑफ़ द डील. 

सवाल: यूरोपियन यूनियन और भारत की जो डील हुई इसके पूरी प्रक्रिया में आप उद्योग मंत्री का क्या रोल देखते हैं? पीयूष गोयल का किस तरीके से रोल रहा?

जवाब: ही इज़ अ साइलेंट परफॉर्मर. पिछले छ महीने से इसी काम में लगे हुए हैं. प्राइम मिनिस्टर ने इसी काम में लगा रखा था जो है और कभी-कभी तो ऐसा लगता था कि ही इस जिसे कहना चाहिए प्रॉक्सी फाइनेंस मिनिस्टर जो काम था जिस तरह का लेकिन क्या वहां टीम काम करती है? कोई पॉलिटिक्स नहीं है नरेंद्र मोदी के रोल में और नरेंद्र मोदी के रूल में ऐसी कोई पॉलिटिक्स नहीं होने के कारण से क्या है कि सब काम जिसको दिया जाता है उस काम को उसी ढंग से करता है. तो पीयूष गोयल की बड़ी सक्सेस है और पीयूष गोयल को वैसे भी क्या है कि एफटीएस का मास्टर कहा जाता है. उन्होंने अपने कार्यकाल में जो है आठ ऐसी एफटी डील करी है जो किसी भी मंत्री के पहले के कार्यकाल में नहीं हुई है. तो ही इज़ आल्सो एंथूजियास्टिक बट ही इज़ लो प्रोफाइल एट द मोमेंट. वो ज्यादा सामने नहीं आ रहे हैं. उसमें जो है ज्यादा पिक्चर में आपको विदेश मंत्री दिखाई देते हैं. बट एक्चुअल डील का जो फाइनेंशियल पार्ट है उसका जो है वो सारा वित्त मंत्री और बेसिकली पीयूष गोयल ने किया और खुद वित्त मंत्री ने पीयूष गोयल के काम की तारीफ की है. तो जैसे कहना चाहिए मतलब ही इस वन ऑफ़ द मास्टरमाइंड पीपल बिहाइंड दिस डील. 

सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कूटनीतिक कौशल का इस्तेमाल करते हुए भारत पहुंचे. ईयू के चेयरमैन उर्सुला वार्डन और साथ ही ईयू काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा उनका जिस तरीके से स्वागत किया उनको मान सम्मान दिया उसे आप कैसे देखते हैं? 

जवाब: मोदी इज ए मास्टर ऑफ डिप्लोमेसी. मोदी इस ए मास्टर ऑफ पब्लिक रिलेशंस. वो लोग आए भारत. बहुत क्रिटिकल थे यूरोपियन मिशन में. एक प्रेसिडेंट था, एक काउंसिल का चेयरमैन था जो है. तो वो जो गए यहां से गदगद होके गए नरेंद्र मोदी के व्यवहार से, उनके सम्मान से, उनके रिसेप्शन से. तो आप देखिए पहले तो गणतंत्र दिवस पे वो लोग मुख्य अतिथि थे. तो नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक पल है कि ईवी के लीडर्स है आज हमारे इस फंक्शन के मुख्य अतिथि हैं और उन्होंने कहा कि यह भी इतिहास का ही एक और महत्वपूर्ण पल है कि संसार की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं जुड़ रही हैं और आपसी संबंधों में एक नया अध्याय लिख रही हैं और फिर इसके बाद राष्ट्रपति भवन में उनके सम्मान में रात्रि भोज हुआ तो गदगद थे वो तो कुल मिला के क्या है और नरेंद्र मोदी जी मैंने पहले भी आपसे कहा ना ब्यूरोक्रेसी का रोल समझते हैं. ब्यूरोक्रेसी से काम लेते हैं. ब्यूरोक्रेसी ट्रंप की होती है. काम नरेंद्र मोदी लेते हैं. और ब्यूरोक्रेसी ब्रिसर्स की होगी काम नरेंद्र मोदी ले रहे हैं. इन ए वे तो गदगद हो के गए हैं तो अच्छा है. भारत के लिए अच्छा है. सर यूथ यानी नौजवान के लिए क्या-क्या फायदे हैं इस पूरे डील से?
प्रधानमंत्री ने कहा है इट विल ओपन न्यू अपॉर्चुनिटीज फॉर द यूथ. और अपॉर्चुनिटीज क्या है? सबसे बड़ी बात तो मैंने वीजा वाली बात आपको बताई है. सारा यूथ ट्रंप से परेशान है. तो एक सेकंड विंडो खुल गई है. इजी वीजा जितने जाइए जितने चाहे उतने लोग वहां पे जाइए. दूसरा मैंने आपको रोजगार की बात कही है कि उसके बाद आप ग्रेजुएशन के बाद में दो साल बाद आपको रोजगार भी वहां पे जाके मिलता है. तो युवा पीढ़ी में उत्साह है इस तरह का कुल मिला के. तो बहुत सारे लोग हो सकता है कि अमेरिका से निराश हो गए हैं वहां के रूल से, वहां के वीजा सिस्टम से, डिपॉेशन सिस्टम से तो वो लगता है इस तरफ मुड़ेंगे, यूरोप की तरफ मुड़ेंगे. तो उसके लिए काफी अपॉर्चुनिटीज हैं. 

सवाल: क्या यह सच है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो मेक इन इंडिया अभियान है इस प्रयास से इसे और ज्यादा ताकत मिलेगी?

जवाब: ऑफकोर्स इंडिया इस गोइंग टू ए मेजर मैन्युफैक्चरिंग हब इन प्लेस ऑफ़ चाइना इन दिस कॉन्टिनेंट. आप देखिए तो निश्चित तौर पे मेक इन इंडिया होगा. फिर दूसरा क्या है? 99% प्रोडक्ट्स जो है एक तरह से वो टैक्स फ्री हो गए. ड्यूटी फ्री हो गए वो जाने के लिए. तो बड़ी मात्रा में उत्पादन होगा. उत्पादन कहां होगा? इंडिया में होगा. एड इन इंडिया का तो इंपैक्ट आना स्वाभाविक है. पोस्ट मिलना स्वाभाविक है. और ये मैं पहली बार महसूस कर रहा हूं इस डील के बाद में इन टोटिटी जब मैं रिव्यु करता हूं इकोनमिक सिचुएशन को कि भारत अब बहुत अग्रणी देशों में है. भारत अब लीडर है. नरेंद्र मोदी की जो लीडरशिप है वो खाली पॉलिटिकल नहीं है. ग्लोब लेवल पे वो फाइनेंसियल लीडरशिप इकोनमिक लीडरशिप भी नरेंद्र मोदी की है. इसलिए आज भारत को जो है ना उस निगाह से देखा जाता है. यूरोपियन देश भी आए हैं अगर यहां पे उनकी अपनी मजबूरियां अलग बात है. लेकिन बड़ा सम्मान का भाव और बड़ा आदर का भाव ले आए हैं और सबके मन में कहीं ना कहीं भाव रहा है कि मोदी तो मुमकिन है. अर्थात ब्यूरोक्रेसी में डील अटकेगी नहीं. फाइलों पे डील अटकेगी नहीं. मनमोहन सिंह की तरह 15 बैठ के नहीं होंगी बिना किसी परिणाम के. डिसाइसिव डिसीजन होंगे. सो दिस इज ऑल. 

सवाल: अमेरिका का मानना है कि इस डील में भारत को ज्यादा फायदा हुआ है. इसके मायने क्या है? 

जवाब: वैसे तो विनविन सिचुएशन है. प्रधानमंत्री ने कहा है कि विनविन सिचुएशन है. लेकिन अमेरिका ने कहा है कि इंडिया इज अ गेनर. दिल्ली इज अ गेनर. तो मान के चलना चाहिए कि जो कूटनीति है प्रधानमंत्री की और जो उसका जो कैलकुलेशन हुआ है डील का वो भारत के पक्ष में हुआ है. जिसको शायद यूरोप ने हो सकता है एहसास नहीं किया हो. अमेरिका इज़ अ स्मार्ट ऑपरेटर. उन्होंने एहसास कर लिया है. बयान भी दे दिया है कि दिल्ली इज़ अ गेनर. सो फाइन. तो लेट्स कांग्रेचुलेट एंड सेलिब्रेट दिस मोमेंट ऑफ सक्सेस जिसमें कि डील हमारे पक्ष में हो. 
सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वो रेड लाइन खींची कि किसान एग्रीकल्चर उनके हितों की रक्षा करते हुए इस पूरी डील में भारत के एग्रीकल्चर सेक्टर को अलग रखा. इसे आप कैसे देखते हैं?

जवाब: उन्होंने अपना वादा निभाया. देश के किसानों से वादा किया था कि आपके हितों का नुकसान नहीं होने दूंगा. ट्रंप को दो टू कह दिया था. आपकी डील के अंदर यह डेयरी और एग्रीकल्चर प्रोडक्ट नहीं होंगे. अंत तक उसी पे अड़े रहे और अमेरिका के साथ में डील होगी तो मान के चलिए कि दो सेक्टर उस डील में नहीं होंगे. उसी का एक एक्सपेरिमेंट कहिए ट्रायल कही उन्होंने नरेंद्र मोदी ने यूरोपियन इस डील में करके दिखाया है. ही है स्टूड बाय ह कमिटमेंट. तो पूरे देश के किसानों में और डेयरी सेक्टर में विशेषत किसानों में जो है मोदी की जो लीडरशिप है उसके प्रति किसानों का भरोसा बढ़ा है इस घटना से. 

सवाल: दिसंबर 2025 में भारत ने जो 7.8% आईआईपी ग्रोथ दर्ज की. फिर उसके बाद 2627 से पहले जब बजट को लेकर इकोनॉमिक सर्वे पेश हुआ. यूरोप के देश में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर क्या मैसेज गया इन नंबर्स के साथ?

जवाब: इट मस्ट बी वेरी एक्साइटेड. उन्होंने सोचा भारत इतनी तरक्की कर रहा है. जो अच्छे-अच्छे राष्ट्रों में 7% की जीडीपी नहीं आ रही. इस साल का जो अनुमान है 6.8 से 7.2 है. एवरेज मानोगे तो सात मानो. 7% की ग्रोथ रेट अगर जीडीपी भारत में है अद्भुत एस कंपेयर टू एनी अदर नेशन एट द मोमेंट जिसे आप कहते हैं और सीतारमन ने कहा है कि वी आर मूविंग टू ए ब्राइट टुमारो जो है जहां क्या आज संसार के अधिकांश देशों में इंक्रीजिंगली डार्कनेस है अंधेरा है और प्रधानमंत्री ने कहा है कि ये डील जो है आज तक के सारे इतिहास में जो है इतनी अच्छी डील नहीं हुई संसार की सबसे बड़ी डील है और उन्होंने कहा है कि वी आर द गेम गेम चेंजर और दूसरा कहा है कि ये जो डील है ये भारत के आने वाला कल है. ब्राइट फ्यूचर भारत का जो है वो डील ये है. 

सवाल: आखिर ये डील लागू कब होगी?

जवाब: देखो लागू होने में तो निश्चित तौर पे नहीं कहा था. ब्रॉडली इट शुड बी इंप्लीमेंटेड इन 2027 इटसेल्फ इन ए वे. कारण क्या है? नरेंद्र मोदी की सरकार जो है जो सिस्टम है पीएमओ का जो मॉनिटरिंग करता है बहुत डायनेमिक सिस्टम है और नरेंद्र मोदी खुद का जो कंट्रोल है जो मॉनिटरिंग है वो बड़ा जबरदस्त है केवल इसी आशा के साथ कि उनका मॉनिटरिंग और उनका जो वर्किंग है पीएमओ का मॉनिटरिंग का सिस्टम जो है रिमोट कंट्रोल का वो इतना इफेक्टिव है कि वो पल-पल इस डील को मॉनिटर करेंगे और एनश्योर करेंगे विद ह पर्सनालिटी जो ओरा है प्राइम मिनिस्टर उसको यूरोप में यूज़ करके दूसरे कंट्री साथ में एनश्योर करेंगे पूरे तौर पे उसको खासकर नीचे जो नंबर टू लीडरशिप है पीयूष गोयल सीतारमण विदेश मंत्री ये जो है ये सब लोग एनश्योर करेंगे कि डील 2027 में लागू हो जाए ताकि 2029 का चुनाव हो तो डील काफी हद तक आगे बढ़ चुकी हो दैट वे तो मोटे तौर पे नहीं कह सकते कि भ क्या होगा लेकिन एक स्पेसिफिकली ये कहा जा सकता है कि 2027 में डील काफी आगे बढ़ चुकी होगी. 

सवाल: इस डील से क्या चीन और बांग्लादेश को भी कोई चुनौती है?

जवाब: बिल्कुल है. जो टेक्सटाइल का मार्केट है उसमें 50% जो है बिजनेस एक्सपोर्ट जो है वो चीन और बांग्लादेश का है. अब भारत खड़ा हो गया बराबर में आके आप देखिए और इसी तरह से वहां जो है वियतनाम के साथ था. तो भारत टक्कर देगा बिकॉज़ ऑफ़ दी रिड्यूस जीरो टेरिफ जो है और ऐसा माना जाना चाहिए कि चीन और बांग्लादेश और वियतनाम का जो 50% का टेक्सटाइल का धंधा है वो इन ए ईयर और टू वो भारत में शिफ्ट हो जाएगा. ऐसा लगता है. 

सवाल: क्या युद्ध में पाकिस्तान की मदद करने वाले टर्की को भी इस डील में शामिल किया गया है?

जवाब: नहीं शामिल नहीं किया गया. वैसे क्या है कि टेक्निकली टर्की इस नॉट ए मेंबर ऑफ यूरोपियन कमीशन जो है. उसका कारण क्या है? उसकी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि वो एशियन कंट्री भी लगता है और ईयू कंट्री भी लगता है. लेकिन पॉलिटिकली जो है उसको एशियन कंट्री माना जाता है. तो उसने 1987 से आवेदन कर रखा है लेने का. लेकिन शायद इंडिया का रिजर्वेशन है क्योंकि पाकिस्तान के साथ उसका रोल भारत के लिए अच्छा नहीं था. हथियारों की सप्लाई कर रहे थे, ड्रोन सप्लाई कर रहे थे. तो एंटी नेशनल एक्टिविटी कहते हैं इसको. अब धीरे-धीरे समन सामान्य हो रहे हैं. लेकिन फिलहाल जो है भारत के इस विरोध के कारण से जो है वो अभी शामिल नहीं है और आगे निकट भविष्य में शामिल होने की भी संभावना दिखाई नहीं देती है. सर क्या 

सवाल: इंडिया इयू डील के बाद अमेरिका जबरदस्त तनाव में और इसी वजह से लंबे समय से अटकी इंडो यूएसए ट्रेड डील अब जल्द ही हो जाएगी?

जवाब: अब्सोलुटली करेक्ट. ट्रंप इज अंडर इमेंस प्रेशर. नॉट ओनली टू साइन दिस डील एट द अरर्लियस्ट. बट आल्सो टू गो बैक ऑन अनाउंसमेंट ऑफ 25% एक्स्ट्रा टेरिफ्स ऑन अकाउंट ऑफ परचेस रशियन ऑयल जो लगता है मुझे एक ऐसा झटका नरेंद्र मोदी ने इस डील का दिया है तो उसका परिणाम क्या वहां गोली यहां चली लगी जाके वहां डाबोस में वहां ट्रंप ने इस डील को देखा तो ये कहा वित्त मंत्री से बयान दिलवाया कि हम बहुत जल्दी 25% जो एक्स्ट्रा की बात कर रहे हैं उसको हम विड्र कर लेंगे एक इंडिकेशन है वैसे ट्रंप इस अ यूटर्न ट्रंप वैसे भी होना था. तो खैर उन्होंने कहलवाया. दूसरा फिर यह एक बयान दिया उन्होंने वहां पे कि मैं नरेंद्र मोदी का बहुत सम्मान करता हूं. वो एक शानदार व्यक्ति हैं. मेरे अच्छे मित्र हैं. हम जल्द उनके साथ एक अच्छी डील करने वाले हैं. ठीक है? तो प्रेशर दिख रहा है ना सामने अपेरेंटली. हालांकि ट्रंप को कोई ट्रस्ट नहीं करता इंडिया में. ऐसा वह छह बार कह चुके हैं. इस तरह से कोई मतलब नहीं है. लेकिन अपेरेंटली हुआ है कि डील से झटका लगा है उनको और इमीडिएटली उन्होंने बैक ट्रैक किया है उस एक्स्ट्रा 25% से और ये डील अब मुझे लगता है हरदीप पुरी ने भी कहा है. पीयूष गोयल भी कह रहे हैं. सीतारमण भी कह रही है. अब ये डील होने वाली है. एनी डे और एनी मोमेंट जिसे हम कहते हैं. फिर देन यू नेवर नो ट्रंप गिमसिकल ट्रंप एट द लास्ट मोमेंट वो क्या कर ले नहीं कह सकते. बट अकॉर्डिंग टू ऑल इंडिकेशंस वी आर गोइंग टू साइन दिस डील इन अ मंथ और सो ऐसा लगता है. 

सवाल: ऐसा लगता है कि इस ट्रेड डील पर ट्रंप की टेरिफ धमकियां और दबाव की छाया है?

जवाब: ऑफकोर्स है. आप देखिए बिल्कुल है. लोग परेशान थे सारे. और शैडो और छाया केवल इतनी हुई है. इट हैज़ एक्सलरेटेड द प्रोसेस ऑफ़ फाइनलाइजिंग द डील ऑन द पार्ट ऑफ़ यूरोपियन कंट्रीज. नॉट ऑन इंडिया. इंडिया तो किसी दबाव में आता नहीं है. इंडिया को प्रेशर होता नहीं है. उन राष्ट्रों पर प्रेशर था. सब परेशान थे किसी ना किसी कारण से और उन्होंने कहा कि ट्रंप टेरिफ से आगे निकल रहे हैं. हमारी स्वायता पे हमला कर रहे हैं. हमारी संप्रभुता पे हमला कर रहे हैं. तो चाहते थे जल्दी डील हो. इसलिए बहुत सारे मामलों में भारत के साथ जो मुद्दे थे उनको उन्होंने खत्म किया और आगे बढ़ के इस डील को किया. तो निश्चित तौर पे कहा जा सकता है कि देयर हैज़ बीन ए ट्रंप शैडो ऑन दिस डील एंड प्रेशर ऑन यूरोपियन कंट्रीज नॉट ऑन इंडिया. पर अल्टीमेटली क्या है? द डील हैज़ बीन साइन. कहते हैं ना अंत अच्छा हो तो सब अच्छा जो है तो दिस इज फाइन डील हैज़ बीन साइन इवन अंडर प्रेशर ऑन यूरोपियन कंट्री वी डोंट माइंड. 

सवाल: सर ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को गाज़ा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का जो निमंत्रण भेजा है उसे आप कैसे देखते हैं? 

जवाब: वन मोर फनी जेस्चर ऐसे क्या ये हैसियत है प्रधानमंत्री की हमारे जो ग्लोबल लीडर हैं वर्ल्ड लीडर हैं जिनसे रशिया मांगता है मध्यस्था यूक्रेन मध्यस्था मांगता है और आप खुद भी कहते थे. मेरे शानदार मित्र हैं. पहले वाले आपके प्रेसिडेंट ये कहते थे कि उनको मैं सलाम करता हूं और उनसे समय लेना है. मुझे जो है ही इज़ अ जोक जिसे कहना चाहिए. नरेंद्र मोदी बुरा नहीं मानते इन बातों का. वो क्या है कि जिसे कहना चाहिए फुलिशली यू एनओ को रिप्लेस करने की कोशिश कर रहे हैं. एक पीस बोर्ड बना के. क्या-क्या करोगे?
कितने झूठे वादे करोगे? कितने नए-नए एक्सपेरिमेंट करोगे. कितने ऊकचुक बातें करोगे? दिस इज वन मोर ऊकचुक अनाउंसमेंट ऑफ़ ट्रंप. इंडिया अंडरस्टैंड्स इसलिए मेरे विचार से भारत ने शायद अभी कुछ कोई ठोस जवाब नहीं दिया होगा और यही आया होगा कि इट्स अंडर कंसीडरेशन लाइक सो मेनी अदर थिंग्स. 

सवाल: ट्रंप कई बार अलग-अलग कंट्रीज को टेरिफ की धमकी दे चुके हैं और अभी कनाडा को जो 100 फीसदी टेरिफ की धमकी दी है. आपको क्या लगता है कारगर होगी वो?

जवाब: बिल्कुल कारगर नहीं होगी. बिकॉज़ ही बेसिकली यू टर्न ट्रंप जो है धमकी दे दी. उनको हिमुलेट कर दिया एक बार. ठीक है. उनके जो वहां के राष्ट्रपति हैं, प्रधानमंत्री हैं, उनको कह तुम मेरे गवर्नर हो. पुलिस जो है ये फिर कह दिया मैं 100% टैक्स लगा दूंगा. अरे भाई 75% तो उसके एक्सपोर्ट्स है ना आपको ही आते हैं. यूएस में आते हैं. कहां अफोर्ड कर पाओगे?
और कहां वो अफोर्ड कर पाएगा? तो वो भी अब एंजॉय कर रहे हैं. पहले वो सीरियसली लेते थे, परेशान होते थे कनाडा वाले. अब वो कहते हैं ठीक है हो जाएगा ये. नाउ यू वेट फॉर द डे व्हेन ट्रंप बैक ट्रैक्स ऑन दिस अनाउंसमेंट ऑफ कनाडा नथिंग इस गोइंग टू हैपन.

सवाल: जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ये कहते हैं कि दुनिया में ट्रेड टेक्नोलॉजी और रेयर अर्थ मिनरल्स को एक हथियार माना जा रहा है तब वो इशारा किसकी तरफ कर रहे होते हैं? 

जवाब: ऑफ कोर्स ट्रंप की तरफ है. आप देखिए अमेरिका और अपने परिवार के हितों के लिए जिसे कहना चाहिए अमेरिका के हितों का तो नाम है. खुद अपने परिवार के हितों का नाम है. तो चाहे पाकिस्तान हो देखिए चाहे वो वेनेजुला हो चाहे वो यूक्रेन की बात करें चाहे किसी और कंट्री के अभी ईरान की बात करें ग्रीनलैंड की बात करें सबके उनके दिमाग में एक दिखती है ऑयल ऑयल ऑयल. ठीक है? एक कार्टून छपा था पूरा. ट्रंप है ना ऊपर से काले रंग के ऑयल में पोता हुआ है. लिखा हुआ है ट्रंप एक तरह से एक और अभी कार्टून देखा मैंने बड़ा जो है उन्होंने कहा के ट्रॉमा कॉल्ड ट्रंप अभी इंटरनेशनल मैगजीन में था इस तरह का जो है तो है उनका वो सबको धमकी देते हैं करते हैं अपने परिवार के व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए वो नेशनल इंटरनेशनल इंटरेस्ट से समझौता कर रहे हैं. पाकिस्तान का देखिए ना उनको मालूम है कि पाकिस्तान इनवॉल्व था एक्टिवली टेरर अटैक में इंडिया में पहलगांव और ये सारा जो हुआ और उन्होंने कहा कि हम इस लड़ाई में भारत के साथ हैं और मुनीर को बुला के लंच करा रहे हैं. बताइए उसके फैमिली बिज़नेस को वहां पे इंटरेस्ट उसके वॉच कर रहे हैं. ऐसे ही तो ये फैक्ट है. नरेंद्र मोदी ने इशारे इशारे में कह दिया है. इशारा स्पष्ट है ट्रंप की ओर है. और सारा संसार जानता है कि तेल और मिनरल की दौड़ में माफ कीजिए ट्रंप अंधे हो गए हैं. 

सवाल: घुड़सवारी सुंदर महिला ट्रंप और उनके मंत्री क्या है यह कंट्रोवर्सी?

जवाब: कंट्रोवर्सी तो ऐसा है भाई दुनिया में जितने किस्म के अपराध हैं रिकॉर्ड से पता चलता है वो सारे ट्रंप ने किए हैं और फिर भी राष्ट्रपति हैं. अपराध प्रमाणित हो गए अमेरिका में. जुर्माना हो गया. जेल जाने के आसार हो गए. फिर राष्ट्रपति बन गए. तो उनका इतने सारे कंट्रोवर्सी इतने सारे जिसे कहना चाहिए क्रिमिनल रिकॉर्ड भी हैं सारे इस तरह के उसके साथ जो है ना उनका फिर से राष्ट्रपति बनना यह लोकतंत्र का सबसे बड़ा मजाक है या लोकतंत्र की सबसे जिसे क्या कहना चाहिए विडंबना है लोकतंत्र की इतने आरोप प्रमाणित वहां पे सारे हुए मालूम है आपको फिर वो बन गए तो लूज टोक है उनकी और कितने दुस्सा पूर्ण लूज टोक है कि वो जो एक मंत्री हैं उनके उनके पत्नी है पत्नी सुंदर है एक दिन पोलो मैच खेल रही थी. ट्रंप ने वीडियो देखा, पसंद आई तो उनके हस्बैंड को मंत्री बना दिया और फिर बयान और दे दिया वाशिंगटन में अपने घर में खड़े होके कि उनकी पत्नी सुंदर थी. मुझे अच्छी लगी इसलिए उनको मंत्री बना दिया है. हाइट और उसके पति ने आके उसे गोली से नहीं उड़ाया. इतनी मतलब ऐसे भारत में होता तो गोली से उड़ाया था. बाकी इस तरह की बात होती तो. तो लोकतांत्रिक मूल्यों का क्या हवास हो रहा है अमेरिका में ट्रंप के शासन में तो एक किस्सा है जो चल रहा है सारे संसार में गोसिप हो रही है उसका उपहास हो रहा है जो है एनी हाउ.

सवाल: कभी अमेरिका के फ्रेंड्स और फैमिली फ्रेंड्स की तरह जो रहे हैं यूरोपियन राष्ट्र आज सीधे अमेरिका को चुनौती दे रहे हैं स्क्रीनलैंड के मुद्दे पर आपको क्या लगता है इतना साहस कहां से आया? 

जवाब: सर्वाइवल थ्रेट टू सर्वाइवल वहां की जो लुईन जो अध्यक्ष है प्रेसिडेंट है. उसने कहा है जब डेमोक्रेटिक वैल्यूस खतरे में हो तो जुड़ जाइए, सामना करिए, मुकाबला करिए. और पहली बार ऐसा हुआ है कि यूरोप के इतने राष्ट्र 27 राष्ट्र एक स्वर में सारे मतभेद बुला के ट्रंप के खिलाफ जिसे कहना चाहिए वो खड़े हो गए हैं. आप देख रहे हैं तो साहस तो क्या है कि परिस्थितियों से आता है और अस्तित्व के संकट से आता है. इसलिए साहस आया है और अब सब लोग ट्रंप के खिलाफ जो है ओपनली खड़े हो गए हैं. 

सवाल: ट्रंप अपने आर्थिक और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की वजह से पूरे संसार को इस समय परमाणु युद्ध की तरफ धकेल रहा है. 

जवाब: अब्सोलुटली करेक्ट. मैंने तो पहले भी कहा था इस सदी में अगर संसार परमाणु युद्ध के सबसे निकट है तो आज है कटसी ट्रंप उनके इस इरिसिबल स्टेटमेंट से इरिसोंसिबिलि ईरान को बर्बाद कर देंगे हम. उस पे कब्जा कर लेंगे हम इस पे ये कर देंगे. ऐसी बातों से कहीं किसी ने सामने से जवाबी गोली चला दी तो रुकेगी नहीं. फिर एक संभावना बनती है कि आगे जाके किसी ऐसा स्टेज आए अमेरिकन आर्मी ट्रंप को डिफाई करते ऐसे घटनाओं से दिख रहा सामने मौत है वर्ल्ड वार है तो समझाएं उनको बैठ के लोग जो है बाकी वो थ्रेट जो है ना मैंने पहले भी कहा था ट्रंप के इस आत्महार के कारण से जो एटॉमिक जो अटैक की थ्रेट है वो आज भी कंटिन्यू कर रही है. 

सवाल: वेनेजुएला ग्रीनलैंड और अब ईरान ट्रंप लगातार ईरान पर हमला करने की धमकी दे रहे हैं. अन्यथा इसका क्या परिणाम होगा?

जवाब: परिणाम कुछ नहीं होगा. यूटर्न ट्रंप वापस लौट आएंगे. ठीक है? वेनेजुला में तो एक अलग किस्सा है. अब ग्रीनलैंड पे है जो ग्रीनलैंड पे कहा कि मैं इस पे कब्जा करूंगा. मेरी सेना जाएगी. फिर पीछे हटेगी. सेना नहीं जाएगी. मैं नॉन मिलिट्री ऑपरेशन से इसको करूंगा. फिर कहा कि बर्फ का एक टुकड़ा है. मैं वैसे ही बैठ जाऊंगा जाके उस पे कब्जा कर लूंगा. कोई मतलब वो आर्मी नहीं जाएगी मेरी वहां पे फनी. फिर कहेंगे मैं टेरिफ लगा दूंगा. फिर कुछ नहीं किया तो कुछ नहीं होना है. समय के साथ-साथ अनदर 30 डेज यू वॉच एंड मार्क माय वर्ड्स. एवरीथिंग विल बी विड्रॉन एंड नथिंग इस गोइंग टू हैपन.

सवाल: पिछले कुछ महीनों से डोनाल्ड ट्रंप पर जो नोबेल शांति पुरस्कार का भूत सवार है. उस पर लेटेस्ट अपडेट क्या है?

जवाब: लेटेस्ट अपडेट ये है उन्होंने नॉर्वे के प्रेसिडेंट प्रधानमंत्री को एक पत्र लिख दिया है कि आपके देश जो है ना वो नोबेल पुरस्कार देता है शांति पुरस्कार. आपने मुझे कंसीडर नहीं किया. इसलिए शांति के प्रति मेरा सद्भाव टूट गया है. मैं शांति बनाए रखने के लिए जिम्मेदार नहीं हूं. और इसलिए अब मैं जो है ना ग्रीनलैंड पर कब्जा करूंगा. बताओ जो है मतलब ट्रंप के स्टेटमेंट्स है ना सुबह 8:00 बजे पूरे संसार में चाय पे एक स्टेटमेंट पढ़ने के होंगे कि आज ट्रंप ने क्या कहा? पूरे संसार में अफ्रीका से लेकर भारत तक जो है वेनेजुला की जो महिला है वहां की विपक्ष की लीडर है उनको तरस आया होगा ट्रंप पे या ऐसे उसने मजे लिए होंगे बात की तो अपना नोबेल पुरस्कार जो था उसके पास उसने उसको ऑफर कर दिया दान दे दिया जिसे कहते हैं दक्षिणा दे दी या कुछ दीक्षा दे दी कुछ भी ऐसे शब्दों काम में कर सकते हो आप उसने उनको दे दिया जाके तो ट्रंप बड़े गदगद हुए उनको लगा कि मैं तो वाकई हकदार हूं इसका उस महिला को उन्होंने बुलाया परसों ढाई घंटे वहां उसको अच्छे से ट्रीट किया वाइट हाउस में और अभी तक अनाउंसमेंट नहीं हुआ है कि उन्होंने उस हिंट किए को स्वीकार किया है कि नहीं ये भी पता नहीं चला है ये तो वो उनके मन की फ्रस्ट्रेशन है इस तरह से कि मैं तो ईश्वर से दुआ करता हूं कि भगवान उनको एक नोबेल पुरस्कार दिला दो ताकि थोड़ा शांति हो संसार में दिस इज ऑल. 

सवाल: सर क्या आपको भी लगता है कि ट्रंप के सिमेच्योर और विंडिक एकशंस की वजह से अमेरिका की एज अ कंट्री प्रतिष्ठा पूरी दुनिया भर में गिरी है. 

जवाब: अबब्सोलटली इनफ इट्स द बिगिनिंग ऑफ द एंड ऑफ अमेरिकन सुपरमेसी एंड क्रेडिबिलिटी इन द वर्ल्ड देखा जाए तो लोग हंसते हैं अमेरिका पे हम तो क्या हंसेंगे 5000 किलोमीटर दूर बैठे हुए यूरोप के लोग हंसते हैं सारे जो उनके नेचुरल एलईय थे जो मेड फॉर ईच अदर थे जो फैमिली मेंबर थे वो हंसते हैं और सबसे ज्यादा हंसते होंगे वहां पे वो जो पुराने राष्ट्रपति रहे हैं अमेरिका के वो हंसते होंगे उपराष्ट्रपति हंस ते होंगे जितने मैच्योर लोग हैं वह सब देख के बस एक मतलब उस दृष्टि से दया के भाव से देखते होंगे आदमी क्या कर रहा है अमेरिका में तो इस तरह का माहौल होगा जो है आज अमेरिका से आया हुआ एक व्यक्ति मिला मुझे जयपुर में मैंने कहा क्या चल रहा है उनका देश बहुत परेशान है इसके जाने का इंतजार कर रहे हैं तो मैंने कहा जनता क्यों नहीं आ रही सड़कों पे उसने कहा जनता इसलिए नहीं आ रही कि उसने राष्ट्रवाद फैला दिया है वहां पे उसका जो है कि मैं ग्रीनलैंड पे कब्जा कर लूंगा ये कर लूंगा और मैं इतना पैसा आ जाएगा मेरा टेरेट से तो सपने लोगों को दिखा दिए अभी सपने टूटे नहीं है. जब सपने टूटेंगे तो अमेरिका में लाखों लोग सड़कों पे आएंगे. मैंने पहले भी कहा था एक तरह से जो है पर वो ऐसा है कि फिर भी देश छोड़ के नहीं जाएगा. आप मेरी बात को ध्यान रखना और पता नहीं क्या है. अनफेज जिसे कहते हैं सारी स्थितियों से जो है तो बस ऐसे ही चलता रहेगा. 

सवाल: सर अब इस टेरिफ के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स में एक और धमकी आई है ट्रंप की तरफ से कि दक्षिण कोरिया को अब 25% टेरिफ लगा दिया जाएगा. अब आप इसको कैसे देखते हैं? 

जवाब: वही अगेन एग्रेसिव ट्रंप सब्सक्वेंटली यूटर्न ट्रंप अब इस केस में थोड़ा सा मेरिट है थोड़ी सी वो क्या हुआ कि पहले 25% टेररिफ था ट्रंप ने धमकाया वो शरण में आए ट्रंप के तो ट्रंप का क्या है कि ये क्योंकि फाइनेंसियल चलता है सारा मामला तो उन्होंने कहा मेरे 450 बिलियन डॉलर आप इन्वेस्ट कर दो अमेरिका में आके ठीक है एक तरह से फाइनेंसियल इंसेंटिव उनका हम कर देंगे अपने देश में वापस गए. वहां के लोगों ने कहा हमारे तो पैसे नहीं सैलरी देने के. आप क्या कमिट कराए वहां पर जो है तो वहां की संसद ने पास नहीं किया उसको अभी तक. वो पेंडिंग है. ट्रंप को गुस्सा आया. इन्होंने कहा आपने वादा खिलाफी करी है. वादा तोड़ा है. तो उन्होंने कहा मैं टेरिफ लगाता हूं आप पे 15 से 25%. फिर थोड़े दिन में सद्बुद्धि आई. यू टर्न आया वापस. सेकंड थॉट आया. फिर कहा कि कोई बात नहीं हम बैठ के ना आपस में इसको सुलझा लेंगे. ऑल फनी नथिंग टू सी.  

सवाल: ट्रंप ने वाइट हाउस में पुतिन की एक तस्वीर लगाई है. आखिर ट्रंप के मन में क्या है?

जवाब: मैंने कहा ना वो तो अनप्रिल व्यक्ति हैं. अपनी किस्म के व्यक्ति हैं. लेकिन चलो उन्होंने एक कोपरेटिव एक मोमेंट होता है पॉलिटिकल जब उसको समझा थोड़ा और अपने जो है ना उसकी तस्वीर लगा दी पुतिन की. आप देखिए तो सारा अमेरिका हैरान है इस बात और अपने खास जगह बनाई है वाइट हाउस मैंने पढ़ा एक खास जगह बना के वहां पे कहीं से सोफा हटा के कुर्सी हटा के वहां तस्वीर उसकी बड़े साइज की इस तरह की लगाई है उससे लोग ये कहते हैं ट्रंप और इनकी तो दोस्ती है और ट्रंप को जिताने में पुतिन का हाथ था ये बात कई बार आई है संसार में तो कोई ना कोई ऐसी घोषित दोस्ती है दोनों के बीच में बहरहाल ये है कि ट्रंप बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने उदारता दिखाई शालीनता दिखाई और एक बड़े राष्ट्र के व्यक्ति को मित्रता मानते हुए जिससे कहते हैं मैं इसको नष्ट कर दूंगा यूक्रेन वॉर ने उसको अपने घर में प्रतिस्थापित किया तो ही डिर्व्स अ वोट ऑफ़ थैंक्स ऑन ह्यूमिटेरियन ग्राउंड्स. 

सवाल: जिस तरह से डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुला के राष्ट्रपति उनकी पत्नी को बेडरूम से घसीट कर गिरफ्तार किया और फिर अमेरिका लेकर गए. आप इस पूरी घटना को किस तरह से देखते हैं?

जवाब: वेरी शॉकिंग आई हैव सर्ड वरिंग ऑन द इंटरनेशनल प्लेटफार्म जो है वो विश्व युद्ध का एक कारण बन सकता था. लेकिन थोड़ा सा बर्दाश्त कर लिया चाइना और रूस ने तो घटना हो गई. सबसे बड़ी बात ये है कि सारा संसार आज ट्रंप की दादागिरी के सामने बेबस और लाचार खड़ा हुआ है. यह है चिंता का विषय. बेडरूम से घसीटते हुए ले गए. आप इज्जत से ले जा सकते थे उनको. राष्ट्रपति हो वो. ठीक है. पत्नी को ले गया अपनी कोर्ट में. तो खुद ही मैं वकील और खुद ही जज और खुद ही पुलिस प्रोसक्यूशन आरोप लगाने वाला. दैट इज और सारा संसार देख रहा है. तो इस घटना का एक विचित्र पहलू यह है चिंता पहलू कि संसार कहां है? लोकतांत्रिक शक्तियां संसार की कहां है? क्यों नहीं यूरोप के 20 देशों में पांचप लोगों के प्रदर्शन हुए?
क्यों नहीं एशियन अफ्रीकन कंट्रीज में 10-10 लोगों के प्रदर्शन हुए? कि क्या है ये? ठीक है. तो ट्रंप की दादागिरी चल रही है. मोस्ट अनफॉर्चूनेट और अब कहते हैं मैं वहां का कार्यवाहक राष्ट्रपति भी खुद ही हूं इन अ वे और समय के साथ-साथ सब ठीक होगा. लेकिन उन्होंने दुस्साहस किया है. अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में यह गंभीर अपराध है. लेकिन समरथ कोनी दोष गोसाई कहते हैं अपन जो इसलिए ट्रंप के खिलाफ कोई आवाज नहीं है. लेट्स सी हाउ लॉन्ग इट गोज़ ऑन. 

सवाल: अभी कुछ दिन पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री चीन पहुंचे थे और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनकी एक लंबी मुलाकात हुई. क्या इस मुलाकात में भी ट्रंप के लिए कोई मैसेज है?

जवाब: मैसेज क्लियर है कि आपके साथ के लोग, आपके घर के लोग, आपकी इन हरकतों से नाराज होके आपके इरिसिबल एटीट्यूड से नाराज हो के अब अपने हितों की रक्षा के लिए कहीं और जा रहे हैं. तो चाइना गए वो चाइना ने रेड कारपेट दिया उनको खुश हुए कि यार ये क्या हुआ? मतलब एक मेन एलॉय ब्रिटेन जो है अमेरिका का वो छिटक के मेरे पास आ गया. तो उन्होंने सारी बातें मान ली. उसकी जो जो सहायता की थी एक श्रेष्ठ मंडल भी साथ गया था. डेढ़ घंटे तक जो वहां का प्रेसिडेंट है राष्ट्रपति सिंह वो उनसे मिला. फिर उनका लंच में दिया. तीन दिन की यात्रा रही. तो इनको पता लगा पता लगता है यह चाइना गए हैं यह तो अभी कुछ ना कुछ सोच रहे हैं इसको भी धमकी दे दूं मैं टेरिफ लगाऊंगा आप पर जो है बट ही इस नाउ स्केर्ड एट द मोमेंट बिकॉज़ द यूनिटी ऑफ़ यूरोपियन नेशंस ब्रिटेन पे आप लगा दोगे फिर यूरोपियन नेशन फिर इकट्ठे हो सकते हैं पलट के बाहर कर सकते हैं तो ट्रंप इस कोशिश ही इज़ वाचिंग द सीन लेकिन इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट है वहां की पॉलिटिक्स में ओवरऑल वर्ल्ड की पॉलिटिक्स में इंपॉर्टेंट पॉइंट है ये कि एक एलई ट्रंप का नेचुरल एलई चाइना की तरफ बढ़ रहा है बिकॉज़ ऑफ़ योर इरिसोंसिबल टेररियो थ्रेट्स. 

सवाल: ईरान में हमने सत्ता संघर्ष देखा वो चल रहा है. ऐसे में आपको लगता है कि ट्रंप ने वहां के प्रदर्शनकारियों को धोखा दिया है?

जवाब: कहते हैं कुछ लोग पहले तो कहा जैसे कहावत है हिंदुस्तान में कहते हैं एक को तो कहा तू लग दूसरे का तू जग ऐसा अपन कहते हैं ना कि ऐसा व्यवहार होता है इस तरह का. तो पहले तो उनको कह दिया इस तरह से कि आप प्रदर्शन करो. हम साथ हैं. सहायता पहुंचने वाली है आपके पास में. मेरा जहाज यहां से रवाना हो गया. ये हथियार यहां से रवाना हो गए हैं. जो है कुछ नहीं पहुंचा, कोई नहीं पहुंचा. वो मारे गए ट्रंप के भरोसे. 12,000 लोगों का हत्या या कत्ल हो गया वहां पे. तो आशंका यही व्यक्ति जा रही है कि जो सरकार है सरकार के लोगों ने मार दिया होगा फायरिंग में से. ऐसा आशंका है ना सरकार के खिलाफ विद्रोह कर रहे थे वो जो है तो अब क्या है कि नामोनिशान नहीं दिख रहा इसमें प्रदर्शन का. उसमें क्या है कि तख्ता पलटने के पूरे आसार थे ईरान के और वो एक अच्छी बात अगर तख्ता पलट होता तो क्योंकि आप जानते हैं 50 साल से एक व्यक्ति बैठा हुआ है. मानवीय मूल्यों का कट्टर विरोधी है. महिला लिबर्टी का कट्टर विरोधी है. राज तो पलटना चाहिए वहां लेकिन राज पलटने का जो तरीका है ट्रंप का वो सही नहीं निकला. या तो डिसाई आप एक्शन ले लेते उसके ऊपर जैसा करना है. बहाना तो उन्होंने ढूंढ लिया कि मैं न्यूक्लियर डील साइन कराना चाहता हूं और न्यूक्लियर डील अगर साइन नहीं करेंगे दे विल बी मोर वर्स अटैक. लेकिन इसी बीच का जो ट्रांजिट पीरियड था प्रदर्शनकारियों का उसके साथ में ट्रंप खड़ा नहीं हुआ. वो मारे गए ट्रंप के भरोसे. तो ज्यादातर लोगों का वहां मानना है कि ट्रंप ने हमको धोखा दे दिया. हालांकि उनकी डिमांड और ट्रंप का सपोर्ट उस तरह से वो जायज है कि सत्ता परिवर्तन वहां होना चाहिए. लेकिन जिस तरह से ट्रंप ने हैंडल किया प्रदर्शनकारियों को बीच में छोड़ दिया. उससे ले लोगों में नाराजगी है. 

सवाल: ट्रंप ने पाकिस्तान को एक खतरनाक राष्ट्र बताते हुए अपने नागरिकों को वहां नहीं जाने के लिए एक एडवाइज़री जारी की है. ऐसे में शहबाज और मुनीर के साथ उनकी दोस्ती का क्या होगा?

जवाब: दोस्ती का ऐसा आई वाश एडवाइज़री मेरा ऐसा मानना है. आप देखिए विदेश मंत्रालय में बाबू होते हैं, सेक्रेटरी होते हैं. वो कागज चलता रहता है, चलता रहता है. आगे ठप्पा लग के इशू हो जाता है. कई दिन पता ही नहीं चलता कि ऐसा हुआ. ऊपर रूटीन है तो ट्रेवल एडवाइज़री का जाना आना एक रूटीन एक्ट है. उसको सीरियसली नहीं लिया गया होगा. मैं नहीं मानता कि ट्रंप के सिग्नेचर हूं. अप्रूवल हुआ हो या कहा गया हो और कहा होगा तो उन्होंने कहा अच्छा ठीक है देखते हैं ईजी ईजी मूड मिल जाए बाकी कोई खास बात नहीं है इसकी जो है उनका कहना वही है एडवाइज़री में कि आतंकवाद बहुत है वहां बिना बताए हमला हो जाता है और भाई आतंकवाद का हमला बता के थोड़ी होता है वो तो बिना बताए होगा ना ऐसी भाषा कुछ गई है उसे एडवाइज़री के अंदर जो है तो कुल मिला के क्या है मुनीर है वहां के जो प्रधानमंत्री हैं हां वो चिल है अपने मस्त है कोई बात नहीं आया उसको फाड़ के फेंक दिया होगा एडवाइज़री कोई खास बात नहीं है. 

सवाल: सर ट्रंप की जो पत्नी है मैलानिया ट्रंप हां उनके के ऊपर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनी है. क्या वो बॉक्स ऑफिस पे हिट हुई है?

जवाब: उसका बहुत बुरा हाल हुआ है. इतना बुरा हाल तो किसी पिक्चर का नहीं हुआ. मैंने तो इंडिया में तो नहीं देखा. विदेश में भी नहीं सुना. Amazon ने उसके राइट्स खरीदे कि सारे संसार में चलाएंगे इसको. न्यूयॉर्क से लेकर के इसको पटना तक और जयपुर तक चलाएंगे जो है तो ब्रिटिश लंदन में पहला शो हुआ एक्सपेरिमेंट शो. तो एक टिकट बिका 3:00 बजे वाले शो में. फिर हुआ कि चलो 3:00 बजे लोग नहीं आए. चलो 6:00 बजे देखते हैं. फिर दो टिकट बिके. छह वाले शो में उसके बाद में फिर झगड़ा हो गया उन सब लोगों में के तूने राइट्स ठीक से नहीं बेचे उसने कहा होगा तुमने ठीक से एक्टिंग नहीं करी किसी ने कुछ कहा होगा इन ए वे जो है तो कुल मिला के है वो सुपर फ्लॉप मूवी या डॉक्यूमेंट्री वर्ल्ड की है उसका क्रेडिट जो है ना ट्रंप और उसकी पत्नी को जाता है ये वाला जो है मैं नहीं समझता किसी और देश में एक दर्शक या एक टिकट बिकी हो कहीं पे.

सवाल: मैंने सुना है कि यूरोपियन काउंसिल के जो प्रेसिडेंट है कोस्टा वो मूलता गोवा के रहने वाले हैं क्या आपने भी ऐसा सुना है?

जवाब: बिल्कुल है ये तो इतिहास की बात है, फैक्ट्स की बात है. वो पुर्तगाल के प्रधानमंत्री रहे हैं. मैंने पढ़ा ये और उन्हें गांधी ऑफ लिसबन कहा जाता था. वहां पे जो है बड़े अनुभवी व्यक्ति हैं. और उनके फादर जो है गोवा में थे तो नेचुरली संपर्क है. तो वहां पे उनका है बिलोंगिंग वहां पे. अब भी जब आते हैं तो उनका मन ये करता है कि एक बार तो मैं गोवा जाऊं वहां पे. तो गोवा से उनका जुड़ाव रहा है. और दूसरा इंपॉर्टेंट आस्पेक्ट क्या है देखिए आप वो यह है कि भारतीय मूल के लोग संसार में कहां-कहां कमांड में बैठे हुए हैं. भारतीय मूल के लोग कहां-कहां डोमिनेट कर रहे हैं? चाहे ट्रंप के दफ्तर में डोमिनेट कर रहे हैं. वहां डोमिनेट कर रहे हैं. यूरोपियन यूनियन में बैठे डोमिनेट कर रहे हैं. इट्स अ मोमेंट ऑफ़ प्राइड फॉर ऑल ऑफ अस. 

सवाल: इंडिया टुडेज़ मूड ऑफ़ द नेशन ने अभी-अभी एक लेटेस्ट सर्वे किया और उस लेटेस्ट सर्वे में एनडीए को 352 सीटें और इंडिविजुअली बीजेपी को 287 सीटें मिलती हुई दिखाई गई हैं. तो आप क्या कहेंगे इस पर?

जवाब: देखो आज का माहौल तो यही है. इंडिया टुडे का सर्वे ब्रडली क्रेडिबल सर्वे होता है. तो आज तो कोई चुनाव है नहीं. आज तो सरकार की बल्लेबले पूरे तौर पे और यह तो बात बहुत पहले से तय है ना कि 29 के अंदर तो सरकार यही है. नरेंद्र मोदी की जो लीडरशिप है उनकी जो पॉपुलरिटी है जो क्राउड पुलिंग कैपेसिटी है फिर अमित शाह की जो स्ट्रेटजी है अभी तक राहुल गांधी के पास विपक्ष के पास इसका कोई सशन नहीं है. और कांग्रेस की जो स्थिति आप देख रहे हैं कि मतलब क्रमशः और खराब होती जा रही है. लीडरशिप के मामले में डिफेंसेस के मामले में एक अच्छा काम उनके यहां हो गया कि जरूर वापस आ गए एटलीस्ट फॉर द टाइम बीइंग वो ठीक है. बात जो है तो भाई नरेंद्र मोदी का मुक़ाबला करने के लिए उनकी लोकप्रियता का उनके भाषणों का मुक़ाबला करने के लिए प्रोग्रेस की बात तो आप छोड़िए. प्रोग्रेस तो आप सत्ता में आएंगे तभी कुछ करेंगे ना. कांग्रेस इस नॉट इन पावर लेकिन जो कैपेसिटी है भाषण देने की, मुद्दे उठाने की, जनता को प्रभावित करने की, क्राउड को पुल करने की वो मोदी को कुदरत की देन है, अद्भुत देन है. और जब वो प्रधानमंत्री हैं और हैं प्रधानमंत्री वो. ठीक है ना? तो कोई चांस ऐसा बनता नहीं है. तो फिगर में थोड़ा फर्क आ सकता है. आप कहते हैं विपक्ष 80 है तो 80 का 92 हो जाएगा. ऐसे मान लीजिए कोई ऐसा बड़ा मुद्दा मुझे दिखाई नहीं दे रहा अगले दो चार साल में और फिर इलेक्शन लड़ने की जो आर्ट है उसका जो मास्टरमाइंड किया अमित शाह ने अंडर द लीडरशिप नरेंद्र मोदी मान लीजिए उसका कोई मैच नहीं है इनके पास में कोई विकल्प नहीं है और कितनी चीजें चल रही है रिवीजन ऑफ वोटर्स चल रहा है एसआर चल रहा है और पता नहीं क्या-क्या चीजें चल रही है रिगपिंग चल रहा है कॉन्स्टिट्यूएंसी का सारा कुछ हो रहा है तो ऐसा लगता नहीं है तो ये सर्वे जो है बाय एंड लार्ज आज की तारीख में तो मुझे ऐसा लगता है ठीक है आई ब्रोली एंडोर्स दिस सर्वे एट दिस मोमेंट और आगे जाके थोड़ा बहुत कम भी हो जाएगा. आप कह रहे हो 200 87 आपने बताई ना बीजेपी की तो चलो भाई 287 नहीं आ गए 284 आ गई और जो हालात है इस समय वो 303 भी आ सकती हैं. कह नहीं सकते आप दैट वे जो है तो ब्रॉडली वी कैन एंडोर्स दिस हैप्पेट. 

सवाल: सर एक और अभी-अभी लेटेस्ट डेवलपमेंट हुआ और अब देशों के फॉरेन मिनिस्टर्स भारत आए हुए हैं. तो किस तरीके के आउटकम की उम्मीद की जा सकती है? 

जवाब: यह एक दूसरा महत्वपूर्ण कदम है. वन मोर डिप्लोमेटिक सक्सेस ऑफ मोदी गवर्नमेंट एंड सम क्रेडिट गोस टू दिस फॉरेन मिनिस्टर. यह है जयशंकर. तो उनको इसलिए है कि आप देखिए कि 22 कंट्रीज है कोलार कंट्रीज. 20 लोगों ने सहमति दे दी कि हम आएंगे दिल्ली में. नरेंद्र मोदी के दरबार में दिल्ली में हम बैठेंगे. यहां पे जो है तो आपसी हितों की बात होगी. पांच सेक्टर आइडेंटिफाई कर लिए. एग्रीकल्चर एंड ऑल दिस एजुकेशन जो है टेक्नोलॉजी सारा जो है तो ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि नरेंद्र मोदी विल सर्टनली ट्राई टू एक्सप्लोर द पॉसिबिलिटी ऑफ हैविंग ट्रेड डील विद ऑल दी कंट्रीज आल्सो कि मदर ऑफ ओल्ड डील्स करने के बाद के बाद में जो उत्साह है जो हौसला है मोदी सरकार का वो आसमान पे है सक्सेस स्टोरी जो है तो कोई बड़ी बात नहीं है कि प्रोसेस शुरू हो बातचीत का और साल दो साल में आप देखेंगे कि नरेंद्र मोदी साइंस वन मोर एफटीए विद 22 अरब नेशंस वन मोर मिरेकल हम लेट्स सी.

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