भारत ने अपनी पश्चिमी समुद्री सीमाओं को अभेद्य बनाने के लिए एक बहुस्तरीय एयर डिफेंस नेटवर्क तैयार किया है, जो पाकिस्तान और अन्य संभावित खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है. मई 2025 में पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के बाद भारत ने अपनी सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए अरब सागर के किनारे की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य संभावित वायु और ड्रोन हमलों को पहले ही चरण में निष्क्रिय करना और देश की रणनीतिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
S-400, बराक-8 और आकाश का संयोजन
भारतीय वायुसेना (IAF) और नौसेना (Navy) मिलकर एक इंटीग्रेटेड सर्फेस-टू-एयर मिसाइल (SAM) नेटवर्क तैयार कर रही हैं. इस नेटवर्क में शामिल प्रमुख प्रणालियां हैं:
S-400 ट्रायंफ: रूस से प्राप्त यह प्रणाली 400 किलोमीटर तक की दूरी से आने वाले लक्ष्यों को भेद सकती है. यह भारत के वायु रक्षा कवच की रीढ़ बन चुका है.
बराक-8 (Barak-8): यह इजरायल और भारत के संयुक्त प्रयास से विकसित एक मध्यम दूरी की मिसाइल प्रणाली है, जिसकी रेंज लगभग 70 से 100 किमी है. यह समुद्र और जमीन दोनों जगह से लॉन्च की जा सकती है.
आकाश मिसाइल: यह स्वदेशी रूप से विकसित सतह से हवा में मार करने वाली प्रणाली है, जिसकी रेंज करीब 45 किमी है. यह कम ऊंचाई पर उड़ रहे लक्ष्यों को भी मार गिराने में सक्षम है.
इन तीनों प्रणालियों को इस तरह समन्वित किया जा रहा है कि वे एक दूसरे की कमियों को ढकते हुए व्यापक और सतत सुरक्षा कवच तैयार करें.
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता
मई 2025 में पाकिस्तान द्वारा भारत के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिश की गई थी. लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय वायुसेना और रक्षा प्रणालियों ने इन सभी हमलों को नाकाम कर दिया. 500 से अधिक दुश्मन ड्रोन और कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जिससे भारत की वायु रक्षा प्रणाली की वैश्विक स्तर पर प्रशंसा हुई.
नई रडार तकनीकों और IACCS का उपयोग
कोझिकोड (केरल) में भारतीय वायुसेना एक नया रडार स्टेशन स्थापित कर रही है, जो IACCS (Integrated Air Command and Control System) से जुड़ा होगा. यह सिस्टम 360-डिग्री निगरानी क्षमता और प्रारंभिक चेतावनी देने में सक्षम है, जिससे तटवर्ती और समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा को और मज़बूती मिलेगी.
भारतीय नौसेना की समुद्री तैनाती
भारतीय नौसेना ने भी अपनी उपस्थिति को अरब सागर में और अधिक मज़बूत किया है. आईएनएस विक्रांत जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर और बराक-8 एलआरएसएएम से लैस अत्याधुनिक युद्धपोत अब नियमित रूप से गश्त कर रहे हैं. इसके साथ ही आईएनएस अंद्रोत, जो एक शैलो वॉटर एंटी-सबमरीन युद्धपोत है, को भी ऑपरेशनल किया गया है.
हाल ही में हुई भारत-ब्रिटेन की Exercise Konkan-2025 ने भारत की समुद्री युद्ध क्षमताओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और अधिक मज़बूती दी है.
एंटी-ड्रोन तकनीक: अनमैन्ड एरियल सिस्टम
पाकिस्तान द्वारा चलाए गए ड्रोन स्वार्म अटैक को नाकाम करने में डीआरडीओ द्वारा विकसित इंटीग्रेटेड काउंटर-यूएएस (Unmanned Aerial System) ग्रिड की बड़ी भूमिका रही. इस प्रणाली में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग, काइनेटिक इंटरसेप्शन और लेज़र तकनीकों का एकीकृत उपयोग होता है, जो छोटे से छोटे ड्रोन को भी सटीकता से खत्म कर सकता है.
मिशन सुदर्शन चक्र: राष्ट्रीय सुरक्षा की नई दिशा
भारत का दीर्घकालिक सुरक्षा मिशन, जिसका नाम 'सुदर्शन चक्र' रखा गया है, वर्ष 2030 तक एक पूर्णत: स्वदेशी और नेटवर्क-संचालित सुरक्षा ढांचा तैयार करने की योजना है. इसमें 6,000 से 7,000 उन्नत रडार, निगरानी सैटेलाइट्स, और डायरेक्टेड एनर्जी वेपन सिस्टम को एकीकृत किया जाएगा.
इसका उद्देश्य पूरे देश की वायु और समुद्री सीमाओं की 24x7 निगरानी करना है. इसमें DRDO, ISRO और अन्य रक्षा एजेंसियों का सहयोग लिया जा रहा है. वर्ष 2030 तक भारत 52 नए सर्विलांस सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना बना चुका है.
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