पाकिस्तानी घुसपैठियों की फील्डिंग सेट! छिपने की भी नहीं देगा जगह, जानें भारत के 'SUMITRA' की खासियत

भारत ने अपनी सीमाओं और अहम रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है.

India DRDO Multilayer Intelligent Tracking System SUMITRA
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

भारत ने अपनी सीमाओं और अहम रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है. पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों से आने वाले संभावित खतरों और घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम करने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक अत्याधुनिक परिधि निगरानी प्रणाली विकसित की है. इस सिस्टम का नाम है Surveillance Using Multilayer Intelligent Tracking, Response and Analysis (SUMITRA).

यह सिस्टम खास तौर पर उन इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है, जहां निगरानी चुनौतीपूर्ण होती है—जैसे सीमावर्ती क्षेत्र, पहाड़ी इलाके और दूरदराज के सैन्य प्रतिष्ठान. सुमित्रा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह निगरानी में लगे ड्रोन को तेजी से चार्ज करने की सुविधा देता है, जिससे वे लंबे समय तक सक्रिय रह सकते हैं.

ड्रोन की बैटरी समस्या का समाधान

अब तक सीमा पर तैनात ड्रोन की सबसे बड़ी कमजोरी उनकी सीमित बैटरी लाइफ मानी जाती थी. बैटरी खत्म होते ही ड्रोन को वापस लौटना पड़ता था, जिससे निगरानी में बाधा आती थी. DRDO द्वारा विकसित यह नया सिस्टम इस समस्या को काफी हद तक खत्म करता है.

सुमित्रा में एक वायरलेस फास्ट चार्जिंग स्काईडॉक शामिल है, जो निगरानी या ऑपरेशन में लगे ड्रोन को बेहद कम समय में चार्ज कर देता है. इससे ड्रोन बार-बार मिशन पर जा सकते हैं और सीमा पर लगातार नजर रखी जा सकती है.

घुसपैठ की पहचान और त्वरित कार्रवाई

SUMITRA एक मल्टीलेयर इंटेलिजेंट सर्विलांस सिस्टम है, जिसे किसी भी रक्षा प्रतिष्ठान की सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इसमें हाई पेलोड मल्टी-कॉप्टर UAV को भी शामिल किया गया है, जो सीमा पार से आने वाले घुसपैठियों या आतंकियों का पता लगाने में सक्षम है.

जैसे ही सिस्टम किसी संदिग्ध गतिविधि को पहचानता है, उसकी जानकारी तुरंत नियंत्रण केंद्र तक पहुंचती है. वहां से क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को अलर्ट किया जाता है, ताकि मौके पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.

झाड़ी या बंकर भी नहीं बनेंगे ढाल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुमित्रा में कई तरह के उन्नत सेंसर लगाए गए हैं. ये सेंसर जमीन पर होने वाली हलचल को पहचानकर डेटा कंट्रोल सेंटर तक भेजते हैं. इसके बाद ड्रोन को उस क्षेत्र में भेजा जाता है.

अगर कोई घुसपैठिया झाड़ियों, पेड़ों या बंकर के पीछे छिपने की कोशिश करता है, तब भी ड्रोन उसके ऊपर मंडराकर उसकी लोकेशन ट्रैक करता रहता है. इससे सुरक्षा बलों को सटीक जानकारी मिलती है और वे हालात के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं.

AI आधारित सिस्टम, पहचान में नहीं होगी गलती

SUMITRA आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित है. AI तकनीक की मदद से यह सिस्टम अपने ही गश्ती सुरक्षा कर्मियों और बाहरी घुसपैठियों के बीच आसानी से अंतर कर सकता है. इससे फॉल्स अलर्ट की संभावना कम हो जाती है और ऑपरेशन ज्यादा प्रभावी बनता है.

स्वदेशी तकनीक से विकसित होने के कारण यह प्रणाली विदेशी तकनीक पर निर्भरता को भी कम करती है. साथ ही, इससे भारत के संवेदनशील रक्षा प्रतिष्ठानों की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है.

हवाई खतरों से भी सतर्क

सुमित्रा में केवल जमीन पर होने वाली गतिविधियों की ही निगरानी नहीं होती, बल्कि इसमें हवाई खतरा पहचान प्रणाली भी मौजूद है. यह फीचर ड्रोन या अन्य हवाई माध्यम से आने वाले संभावित खतरों की पहचान करने में मदद करता है.

तकनीकी क्षमताएं क्या हैं?

वर्तमान में सुमित्रा सिस्टम को चित्रदुर्ग स्थित वैमानिकी परीक्षण रेंज में स्थापित किया गया है. इसमें शामिल हाई पेलोड मल्टी-कॉप्टर UAV की तकनीकी खूबियां इसे और प्रभावी बनाती हैं:

  • रेंज: लगभग 5 किलोमीटर
  • अधिकतम ऊंचाई: 300 मीटर
  • उड़ान अवधि: करीब 30 मिनट
  • भार वहन क्षमता: भारी पेलोड ले जाकर निर्धारित स्थान पर छोड़ने में सक्षम

मिशन पूरा होने के बाद ड्रोन अपने बेस पर वापस लौट सकता है

यह सिस्टम खासतौर पर पहाड़ी इलाकों में संचालन के लिए डिजाइन किया गया है, जहां पारंपरिक निगरानी साधन सीमित साबित होते हैं.

DRDO और सागर डिफेंस इंजीनियरिंग के संयुक्त प्रयास से विकसित यह सिस्टम भारत की सीमा सुरक्षा रणनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है. ड्रोन की लगातार उपलब्धता, तेज चार्जिंग, AI-आधारित पहचान और मल्टी-लेयर निगरानी जैसे फीचर इसे एक गेम-चेंजर टेक्नोलॉजी बनाते हैं.

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