Russian Crude Oil: भारत ने जुलाई 2026 में रूस से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल खरीदा. यह लगातार दूसरा महीना है, जब भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है. खास बात यह है कि रूस के ऊर्जा कारोबार पर पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध और सख्त कर दिए हैं, इसके बावजूद भारत ने सस्ते रूसी तेल की खरीद जारी रखी.
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर यानी CREA के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में भारत ने करीब 5.5 अरब यूरो का रूसी कच्चा तेल खरीदा. जून के मुकाबले इसमें 2.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. हालांकि, यह बढ़ोतरी तेल की मात्रा में हुई है, इसकी कीमत में नहीं.
रूस से भारत की कुल ऊर्जा खरीद में तेल की बड़ी हिस्सेदारी
जुलाई में रूस से भारत की कुल जीवाश्म ईंधन खरीद में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 87 प्रतिशत रही. जून में यह हिस्सा 83 प्रतिशत था. जून में भारत ने रूस से करीब 4.5 अरब यूरो का कच्चा तेल खरीदा था.
वहीं, रूस से भारत का कुल जीवाश्म ईंधन आयात करीब 5.5 अरब यूरो रहा था. जुलाई में रूस से भारत की कुल हाइड्रोकार्बन खरीद 6.4 अरब यूरो तक पहुंच गई. इसमें कच्चे तेल के अलावा कोयला और तेल से जुड़े दूसरे उत्पाद भी शामिल थे.
2022 के बाद रूस से तेल खरीद क्यों बढ़ी?
रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई. युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और यूरोप समेत कई पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए. इसके साथ ही यूरोप के कई खरीदारों ने रूसी तेल खरीदना कम कर दिया.
इसके बाद रूस ने एशियाई देशों को कम कीमत पर कच्चा तेल बेचना शुरू किया. भारत ने भी इस मौके का फायदा उठाया और रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदना शुरू कर दिया.
अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में रूस भारत को रोजाना एक लाख बैरल से भी कम तेल देता था. उस समय भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 2.5 प्रतिशत थी.
2022 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 7.40 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया. इसके बाद 2023 में भारत ने रूस से करीब 18 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा. इसके साथ रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया.
भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी कितनी?
2023 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 39 प्रतिशत थी. इसके बाद भी रूसी तेल की खरीद बढ़ती रही. जुलाई 2026 में भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से करीब 28 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा.
यह भारत के कुल 50 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा कच्चे तेल आयात का करीब 55.5 प्रतिशत था. इसके मुकाबले 2024 में भारत ने औसतन करीब 18 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चा तेल खरीदा था. यानी कुछ ही वर्षों में रूस पर भारत की तेल निर्भरता काफी बढ़ गई है.
रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार है भारत
CREA के अनुसार, रूस से कच्चा तेल खरीदने के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है. जुलाई 2026 के दौरान रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी करीब 37 प्रतिशत रही. चीन 50 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है. इस तरह रूस के तेल कारोबार में भारत और चीन की भूमिका काफी अहम हो गई है.
CREA के मुताबिक, जुलाई में भारत रूस के जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार था. भारत ने इस दौरान करीब 6.4 अरब यूरो का रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदा. इसमें 5.5 अरब यूरो का कच्चा तेल, 51.2 करोड़ यूरो का कोयला और 34.1 करोड़ यूरो के तेल उत्पाद शामिल थे.
रूसी तेल की कीमत में आई गिरावट
भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद बढ़ने के बावजूद रूस की कुल जीवाश्म ईंधन से होने वाली कमाई में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई. जुलाई में रूसी कच्चे तेल से होने वाली निर्यात आय करीब 39.2 करोड़ यूरो प्रतिदिन रही, जो पिछले महीने के आसपास ही थी.
पाइपलाइन के जरिए कच्चे तेल से रूस की कमाई में एक महीने में 21 प्रतिशत की गिरावट आई. हालांकि, समुद्र के रास्ते भेजे जाने वाले कच्चे तेल से होने वाली कमाई में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिससे इस नुकसान की कुछ भरपाई हो गई.
G7 की तय कीमत से ऊपर रहा रूसी तेल
CREA के मुताबिक, रूस के यूराल्स कच्चे तेल की औसत कीमत जुलाई में करीब 3 प्रतिशत घटकर 60.22 डॉलर प्रति बैरल रह गई. इसके बावजूद यह कीमत G7 और यूरोपीय संघ की ओर से फरवरी 2026 में तय की गई 44.10 डॉलर प्रति बैरल की मूल्य सीमा से काफी ज्यादा थी.
यानी पश्चिमी देशों की ओर से रूसी तेल पर दबाव और कीमत की सीमा तय किए जाने के बावजूद भारत की रूसी तेल खरीद में कमी नहीं आई. सस्ते रूसी कच्चे तेल ने भारतीय रिफाइनरियों के लिए इसे अब भी एक महत्वपूर्ण विकल्प बनाए रखा है.
ये भी पढ़ें- ड्रोन, मिसाइल से फाइटर जेट तक... एडवांस्ड हथियारों से लैस होगी भारतीय सेना, हाइब्रिड वॉर की तैयारी तेज