दुनियाभर में इबोला वायरस को लेकर बढ़ती चिंता के बीच भारत ने भी सतर्कता का स्तर बढ़ा दिया है. एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (APHO) ने देश के सभी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर स्वास्थ्य जांच के नियमों को और सख्त कर दिया है. अब विदेश से आने वाले हर यात्री की गहन मेडिकल स्क्रीनिंग की जा रही है, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण को समय रहते रोका जा सके. सरकार का फोकस इस बात पर है कि देश में वायरस का प्रवेश किसी भी हाल में न हो.
अब हर अंतरराष्ट्रीय यात्री की होगी जांच
पहले यह निगरानी केवल उन यात्रियों तक सीमित थी जो अफ्रीका या इबोला प्रभावित देशों से भारत पहुंचते थे, लेकिन अब नए नियमों के तहत दुनिया के किसी भी देश से आने वाले सभी यात्रियों को जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा. एयरपोर्ट्स पर सुरक्षा एजेंसियों और मेडिकल टीमों की तैनाती बढ़ा दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा के जरिए संक्रमण फैलने का खतरा अधिक होता है, इसलिए कोई भी लापरवाही नहीं बरती जा रही.
थर्मल स्क्रीनिंग और हेल्थ डिक्लेरेशन जरूरी
नए प्रोटोकॉल के अनुसार, एयरपोर्ट पर उतरते ही सभी यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है, जिससे शरीर के तापमान की तुरंत जांच हो सके. इसके अलावा हर यात्री को एक सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म भरना अनिवार्य किया गया है. इस फॉर्म में यात्रियों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, संपर्क विवरण और पिछले 21 दिनों की यात्रा से जुड़ी पूरी जानकारी देनी होगी. साथ ही बुखार, कमजोरी, उल्टी या बदन दर्द जैसे किसी भी स्वास्थ्य लक्षण के बारे में भी बताना जरूरी होगा.
संदिग्ध मरीजों को तुरंत किया जाएगा आइसोलेट
एपीएचओ अधिकारियों के मुताबिक, यदि किसी यात्री में स्क्रीनिंग के दौरान बुखार या इबोला से जुड़े अन्य लक्षण पाए जाते हैं, तो उसे तुरंत एयरपोर्ट पर ही अलग कर दिया जाएगा. ऐसे यात्रियों को विशेष मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत दिल्ली के आरएमएल अस्पताल स्थित आइसोलेशन सेंटर भेजा जाएगा. वहां विस्तृत जांच, सैंपल टेस्टिंग और निगरानी की जाएगी. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इन सख्त कदमों का उद्देश्य देश के भीतर संक्रमण फैलने की किसी भी आशंका को पूरी तरह रोकना है.
ये भी पढ़ें: कर्नाटक के सीएम पद से सिद्धारमैया का इस्तीफा, बोले - आलाकमान ने जो कहा, मैंने वही किया...