Vaibhav Suryavanshi Vs BAN: एक मैच के आधार पर किसी खिलाड़ी को आंकना अक्सर गलत साबित होता है, खासकर तब जब बात वैभव सूर्यवंशी जैसी प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी की हो. 14 साल की बेहद कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ने वाले वैभव ने अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 के पहले मैच में थोड़ी निराशा के बाद अगले मैच में धमाकेदार प्रदर्शन कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया. उनके इस प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि छोटे खिलाड़ियों में बड़ी क्षमता होती है, जिसे सही मौके पर खुलकर दिखाया जा सकता है.
शनिवार, 17 जनवरी को बुलावायो में बांग्लादेश के खिलाफ मैच में टीम इंडिया पहले बैटिंग करने उतरी. तीसरे ओवर में ही टीम के दो विकेट गिर गए थे, और ऐसा लगा कि मैच मुश्किल में जा सकता है. लेकिन वैभव सूर्यवंशी ने दूसरी तरफ से मोर्चा संभालते हुए तूफानी बैटिंग शुरू कर दी. उनके सामने तीसरा विकेट गिर चुका था, लेकिन उन्होंने अपने खेल को रोका नहीं.
13वें ओवर में वैभव ने इतिहास रच दिया. ओवर की आखिरी गेंद पर एक रन लेकर उन्होंने अपना पहला अंडर-19 वर्ल्ड कप अर्धशतक पूरा किया. यह न केवल उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि थी, बल्कि इस टूर्नामेंट का सबसे तेज अर्धशतक भी बन गया.
सबसे कम उम्र में अर्धशतक
वैभव ने सिर्फ 30 गेंदों में 5 चौके और 3 छक्कों की मदद से 50 रन का आंकड़ा पार किया. इस प्रदर्शन के साथ ही उन्होंने अंडर-19 वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे कम उम्र में अर्धशतक बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया. वैभव ने 14 साल और 296 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की, और इससे पहले यह रिकॉर्ड अफगानिस्तान के शाहिदुल्लाह कमाल (15 साल, 19 दिन) के पास था.
टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया
वैभव ने जब अपना अर्धशतक पूरा किया, उस समय टीम इंडिया का स्कोर मात्र 68 रन था, जिसमें से 50 रन अकेले वैभव ने बनाए थे. इसके बाद उन्होंने अभिज्ञान कुंडू के साथ मिलकर 62 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी निभाई और टीम को 100 रन के पार पहुंचाया.
हालांकि, वैभव अपना शतक पूरा नहीं कर पाए और 72 रन बनाकर आउट हुए. उन्हें 27वें ओवर में बांग्लादेश के तेज गेंदबाज इकबाल होसैन इमॉन ने पवेलियन भेजा. इस पारी में वैभव ने 67 गेंदों का सामना किया और 6 चौके व 3 छक्के लगाए. उनके बाद टीम इंडिया के लिए विकेटकीपर बल्लेबाज अभिज्ञान कुंडू ने भी अर्धशतक जमाया, जिससे टीम का स्कोर और मजबूत हुआ.
वैभव की पारी ने खोले नए आयाम
वैभव सूर्यवंशी की इस पारी ने यह दिखा दिया कि उम्र केवल एक संख्या है, और सही समय पर दिखाए गए कौशल से युवा खिलाड़ी भी बड़े रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं. अंडर-19 वर्ल्ड कप में उनका यह प्रदर्शन न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि टीम इंडिया के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है. वैभव ने साबित किया कि किसी खिलाड़ी की क्षमता को केवल एक मैच से परखा नहीं जा सकता, और भविष्य में उनकी पारी और रिकॉर्ड और बड़े स्तर पर देखने को मिल सकते हैं.
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