इस्लामाबाद: पाकिस्तान का रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जैकोबाबाद एयरबेस हाल ही में एक बार फिर चर्चा में है. यह एयरबेस पाकिस्तान वायुसेना (PAF) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है और अमेरिकी F-16 फाइटर जेट के रखरखाव और तैनाती का प्रमुख केंद्र भी है. मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेनाओं द्वारा इस बेस पर किए गए हमलों का असर अब तक पूरी तरह से कम नहीं हुआ है. हाल ही में जारी हुई सैटेलाइट तस्वीरें यह संकेत देती हैं कि बेस में अभी भी कई हिस्से क्षतिग्रस्त हैं और मरम्मत की प्रक्रिया पूरी तरह से नहीं हो पाई है.
सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिख रहा है
रक्षा विश्लेषक डेमियन साइमन ने हाल ही में जैकोबाबाद एयरबेस की ताजा सैटेलाइट तस्वीरें साझा कीं. उनका कहना है कि ये तस्वीरें मुख्य रूप से हैंगर संरचनाओं के टूटे हुए हिस्सों को दिखाती हैं, जिन पर मई में भारत द्वारा हमले किए गए थे.
Imagery over the past few months reveals the hangar targeted by India at Jacobabad Airbase, Pakistan during the May 2025 conflict, has had its roof taken apart in stages likely as internal damage checks continue before the structure is repaired pic.twitter.com/DNmgKnmEEv
— Damien Symon (@detresfa_) November 15, 2025
साइमन के अनुसार, इन तस्वीरों में हैंगर की छत के कई हिस्सों को हटाया गया है, जो मरम्मत और आंतरिक जांच की प्रक्रिया का संकेत देता है. उन्होंने कहा कि छत और बाहरी संरचना के टूटने का पैटर्न पारंपरिक क्षति आकलन (damage assessment) प्रोटोकॉल से मेल खाता है. इन तस्वीरों का तकनीकी विश्लेषण यह दर्शाता है कि बेस के लिए यह हैंगर एक उच्च प्राथमिकता वाली संपत्ति है और पाकिस्तान इसे जल्द से जल्द बहाल करने का प्रयास कर रहा है.
जैकोबाबाद एयरबेस की रणनीतिक महत्वता
जैकोबाबाद एयरबेस पाकिस्तान की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य सुविधाओं में से एक माना जाता है. यह बेस JF-17 ब्लॉक II लड़ाकू विमान का प्रमुख केंद्र है, जो पाकिस्तानी वायुसेना के सबसे आधुनिक लड़ाकू प्लेटफॉर्म में शामिल हैं. इसके अलावा, इस एयरबेस पर अमेरिकी F-16 फाइटिंग फाल्कन जेट के कई संस्करण तैनात हैं.
यह बेस पहले ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम के दौरान नाटो के लिए भी एक महत्वपूर्ण संचालन केंद्र के रूप में काम कर चुका है. जैकोबाबाद एयरबेस पर सर्च एंड रेस्क्यू स्क्वाड्रन के लिए Leonardo AW139 हेलीकॉप्टर भी तैनात हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बेस पर विदेशी ठेकेदारों की भी उपस्थिति है, जो F-16 विमानों के रखरखाव और तकनीकी सहायता का कार्य करते हैं.
नुकसान और मरम्मत की प्रक्रिया
सैटेलाइट तस्वीरों में दिख रहा है कि क्षतिग्रस्त हैंगर के हिस्सों को लगातार हटाया जा रहा है, जो मरम्मत की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है. इसका मतलब है कि पाकिस्तान अपने सबसे संवेदनशील सैन्य केंद्रों में से एक एयरबेस को बहाल करने में लगा हुआ है.
विश्लेषकों का कहना है कि मरम्मत और पुनःस्थापना में समय लगना सामान्य प्रक्रिया है, क्योंकि F-16 और JF-17 जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म की सुरक्षा और कार्यक्षमता सुनिश्चित करना बेहद जटिल होता है. एयरबेस के हिस्सों में तोड़फोड़ और आंतरिक निरीक्षण का पैटर्न यह भी दिखाता है कि पाकिस्तान इस रणनीतिक संपत्ति को फिर से पूरी क्षमता से ऑपरेशन के लिए तैयार करना चाहता है.
F-16 का रणनीतिक महत्व
जैकोबाबाद एयरबेस पर अमेरिकी F-16 फाइटर जेट का तैनात होना इसे पाकिस्तान की वायु सेना का कुंजी केंद्र बनाता है. F-16 के अलावा, JF-17 ब्लॉक II और अन्य हेलीकॉप्टर यहां से संचालित होते हैं. ऐसे एयरबेस की सुरक्षा और रखरखाव में किसी भी प्रकार की कमी पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को प्रभावित कर सकती है.
सैटेलाइट तस्वीरों और विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि ऑपरेशन सिंदूर के प्रभाव से जैकोबाबाद एयरबेस अभी भी पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू नहीं हो पाया है. पाकिस्तान इसे बहाल करने में जुटा है, लेकिन इसमें उसे समय और संसाधनों की काफी जरूरत है.
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