मोतिहारी (बिहार): पूर्वी चंपारण जिले की मोतिहारी विधानसभा सीट इस बार बेहद दिलचस्प चुनावी मुकाबले का गवाह बनने जा रही है. वजह है यहां से पति-पत्नी दोनों का एक ही सीट से चुनाव लड़ना. देवा गुप्ता, जो राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के टिकट पर मैदान में हैं और उनकी पत्नी प्रीति गुप्ता, जो मोतिहारी नगर निगम की मेयर हैं, उन्होंने बतौर स्वतंत्र उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल किया है.
हालांकि दोनों के आमने-सामने खड़े होने के पीछे सिर्फ राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि एक गहरी रणनीति छिपी है, जो अब धीरे-धीरे सामने आ रही है.
क्या है पूरा मामला?
मोतिहारी में जब नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुई तो लोगों की नजरें उस वक्त ठहर गईं, जब एक ही परिवार से दो प्रत्याशियों ने एक ही सीट से पर्चा दाखिल किया. देवा गुप्ता, जो खुद को स्थानीय जनता का सेवक और आरजेडी का मजबूत चेहरा बता रहे हैं, ने पार्टी सिंबल पर नामांकन किया. दूसरी ओर, उनकी पत्नी प्रीति गुप्ता, जो मौजूदा मेयर भी हैं, ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा.
राजनीति के गलियारों में यह सवाल उठने लगे कि क्या यह जोड़ा आपसी टकराव में उतर चुका है या फिर इसके पीछे कोई गहरी सियासी चाल है?
देवा गुप्ता के खिलाफ गंभीर आरोप
बात यहीं खत्म नहीं होती. देवा गुप्ता का नाम पिछले कुछ वर्षों से कई आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है:
इस वक्त उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है, और वांछित अपराधी के तौर पर उनकी तलाश की जा रही है.
फिल्मी अंदाज में देवा गुप्ता का नामांकन
यह घटनाक्रम पुलिस के डर और गिरफ्तारी की आशंका को और मजबूत करता है.
प्रीति का नामांकन: मजबूरी या मास्टरस्ट्रोक?
प्रीति गुप्ता ने जब बतौर स्वतंत्र उम्मीदवार नामांकन किया, तो सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि क्या यह पति के खिलाफ बगावत है?
लेकिन जब उन्होंने मीडिया से बातचीत की तो जवाब ने पूरे घटनाक्रम का रुख ही बदल दिया. उन्होंने कहा, "मैंने अपने पति के विरोध में नहीं, बल्कि उनके समर्थन में नामांकन किया है. विरोधियों की साजिशों को देखते हुए हमने यह फैसला लिया है."
इस बयान ने साफ कर दिया कि प्रीति गुप्ता को एक ‘बैकअप प्लान’ के तहत चुनावी मैदान में उतारा गया है.
रणनीति के पीछे की असली वजह
देवा गुप्ता के खिलाफ कई आपराधिक मामले लंबित हैं. ऐसे में अगर:
यह रणनीति भले ही असामान्य लग रही हो, लेकिन विपरीत परिस्थितियों से निपटने की यह एक सटीक चाल है.
पुलिस की छापेमारी और गिरफ्तारी
यह घटनाक्रम यह दिखाता है कि प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और चुनावी प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखी जा रही है.
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