नए नवेले पीएम बालेन शाह के खिलाफ हुए GEN Z, नेपाल के सड़कों पर भारी विरोध प्रदर्शन; जानें कारण

Nepal Protests: नेपाल की राजनीति में इस समय उथल-पुथल का माहौल बना हुआ है. प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार को बने अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन इसके खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं.

Huge protests on the streets of GEN Z Nepal against newly appointed PM Balen Shah
Image Source: ANI/ File

Nepal Protests: नेपाल की राजनीति में इस समय उथल-पुथल का माहौल बना हुआ है. प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार को बने अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन इसके खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. 

राजधानी काठमांडू सहित कई बड़े शहरों में छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों और आम नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के फैसलों के खिलाफ आवाज उठाई है. तेजी से बढ़ता यह असंतोष अब केवल आम विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक केंद्र सिंह दरबार तक पहुंच चुका है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है.

कस्टम ड्यूटी फैसले ने बढ़ाई नाराजगी

विरोध प्रदर्शनों की सबसे बड़ी वजह सरकार का वह हालिया निर्णय है, जिसमें भारत से 100 रुपये से अधिक कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है. इस फैसले का सबसे ज्यादा असर सीमा से लगे इलाकों में रहने वाले लोगों पर पड़ा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए अक्सर भारत से सामान खरीदते हैं, ऐसे में इस नई

व्यवस्था ने उनकी जेब पर सीधा असर डाला है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार ने यह फैसला लेते समय जमीनी हकीकत और आम लोगों की जरूरतों को नजरअंदाज किया है. यही कारण है कि इस नीति के खिलाफ गुस्सा तेजी से फैलता जा रहा है.

छात्र संगठनों के मुद्दे पर भी विरोध

सरकार के खिलाफ बढ़ते आक्रोश का एक और बड़ा कारण छात्र संगठनों को लेकर उसका रवैया बताया जा रहा है. आरोप है कि सरकार राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संघों को कमजोर करने या खत्म करने की कोशिश कर रही है. छात्र नेताओं ने इसे दमनकारी नीति करार दिया है और कहा है कि सरकार संवाद के बजाय दबाव बनाने का रास्ता अपना रही है.

देशभर में हजारों छात्र इस आंदोलन का हिस्सा बन चुके हैं. कई स्थानों पर छात्र स्कूल यूनिफॉर्म में ही सड़कों पर उतरकर नारेबाजी करते नजर आए, जिससे यह साफ हो गया है कि विरोध अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है.

गृह मंत्री पर लगे आरोपों ने बढ़ाई सियासी गर्मी

प्रदर्शनों के पीछे एक और अहम मुद्दा गृह मंत्री सुदान गुरूंग पर लगे आरोप हैं. उन पर आय से अधिक संपत्ति और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं. विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों का दावा है कि गुरूंग कुछ विवादित कारोबारी समूहों के संपर्क में रहे हैं.

नेपाली मीडिया में भी इस मामले से जुड़े दस्तावेजों का हवाला दिया गया है, जिसके बाद उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई है. राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर लगातार प्रदर्शन जारी रखा है, जिससे सरकार पर दबाव और बढ़ गया है.

सरकार के सामने बढ़ती चुनौती

तेजी से फैलता यह विरोध प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. एक ओर आम जनता आर्थिक फैसलों से नाराज है, तो दूसरी ओर छात्र और राजनीतिक संगठन भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि सरकार इन मुद्दों पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है और क्या संवाद के जरिए हालात को संभालने की कोशिश करती है या फिर टकराव और बढ़ता है.

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