भारतीय क्रिकेट के दो चमकते सितारे, विराट कोहली और रोहित शर्मा, जब घरेलू क्रिकेट में उतरते हैं, तो यह केवल मैच का रोमांच ही नहीं बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए सीखने का भी सुनहरा अवसर बन जाता है. विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में दिल्ली की ओर से विराट और मुंबई की ओर से रोहित की भागीदारी ने इस टूर्नामेंट को नई ऊर्जा दी है. आईपीएल की चमक-दमक और अंतरराष्ट्रीय मैचों से दूर, यह घरेलू एकदिवसीय टूर्नामेंट भारत के क्रिकेट के ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है.
हालांकि दोनों खिलाड़ी बीसीसीआई के केंद्रीय अनुबंध में शामिल हैं, फिर भी घरेलू स्तर पर उनकी भागीदारी खेल के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है.
विजय हजारे ट्रॉफी में मैच फीस कैसे तय होती है
विजय हजारे ट्रॉफी में खिलाड़ियों की मैच फीस उनके अनुभव और लिस्ट ए मैचों की संख्या के आधार पर तय की जाती है. बीसीसीआई ने खिलाड़ियों के लिए तीन श्रेणियां निर्धारित की हैं:
सीनियर कैटेगरी: जिन खिलाड़ियों ने 40 से अधिक लिस्ट ए मैच खेले हैं.
प्लेइंग इलेवन में होने पर प्रति मैच ₹60,000 फीस.
मिड-लेवल कैटेगरी: 21 से 40 लिस्ट ए मैच खेलने वाले खिलाड़ी.
प्रति मैच ₹50,000 फीस.
जूनियर कैटेगरी: 0 से 20 मैच खेलने वाले युवा खिलाड़ी.
प्रति मैच ₹40,000 फीस.
इसके अलावा, रिजर्व खिलाड़ियों को उनकी संबंधित श्रेणी की आधी फीस दी जाती है.
विराट कोहली और रोहित शर्मा की फीस
अनुभवी होने के कारण विराट और रोहित सीनियर कैटेगरी में आते हैं. इसका मतलब है कि उन्हें प्रति मैच ₹60,000 मिलती है.
हालांकि यह राशि बड़ी लग सकती है, लेकिन तुलना की जाए तो यह आईपीएल या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मुकाबले काफी कम है. उदाहरण के लिए, अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय (ODI) मैच के लिए खिलाड़ियों को लगभग 6 लाख रुपये प्रति मैच मिलते हैं, जबकि आईपीएल के अनुबंध करोड़ों में होते हैं.
इससे स्पष्ट होता है कि इन खिलाड़ियों के लिए घरेलू क्रिकेट में उतरना पैसों के लिए नहीं, बल्कि खेल की लय बनाए रखने और युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करने के उद्देश्य से है.
मैन ऑफ द मैच बोनस और अन्य कमाई
मैच फीस के अलावा खिलाड़ियों को अतिरिक्त आय के कई स्रोत भी मिलते हैं:
इस तरह, एक खिलाड़ी की कुल कमाई में मैच फीस के अलावा प्रदर्शन बोनस, दैनिक भत्ता और टीम पुरस्कार की हिस्सेदारी भी शामिल होती है.
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