Hajj Revenue: दुनियाभर के मुसलमानों के लिए हज यात्रा बेहद पवित्र मानी जाती है, लेकिन धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था का भी एक बड़ा आधार बन चुकी है. हर साल लाखों लोग मक्का और मदीना पहुंचते हैं और इसी के साथ सऊदी अरब को अरबों डॉलर की कमाई होती है.
आज से शुरू हो रही हज यात्रा में इस बार भी दुनिया के कई देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है. हालांकि हज की मुख्य धार्मिक रस्में केवल पांच दिनों तक चलती हैं, लेकिन अधिकांश तीर्थ यात्री कई हफ्तों तक सऊदी अरब में रुकते हैं. इसी दौरान होटल, ट्रांसपोर्ट, खाना-पीना, खरीदारी और दूसरी सेवाओं पर भारी खर्च किया जाता है, जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है.
धार्मिक पर्यटन से अरबों डॉलर की कमाई
हज और उमराह यात्रा सऊदी अरब के लिए तेल के अलावा सबसे बड़े राजस्व स्रोतों में शामिल हो चुके हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार केवल धार्मिक पर्यटन से ही सऊदी अरब को हर साल करीब 12 अरब डॉलर की कमाई होती है. भारतीय मुद्रा में यह रकम एक लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा बैठती है.
अगर सालभर जारी रहने वाली उमराह यात्रा को भी इसमें शामिल किया जाए, तो यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ जाता है. यही वजह है कि सऊदी अरब अब धार्मिक पर्यटन को अपनी अर्थव्यवस्था का अहम स्तंभ बना चुका है.
तेल पर निर्भरता कम करने की कोशिश
सऊदी अरब लंबे समय से अपनी अर्थव्यवस्था को केवल तेल पर निर्भर रखने की बजाय दूसरे क्षेत्रों में भी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. इसी रणनीति के तहत धार्मिक पर्यटन को काफी बढ़ावा दिया गया है.
हज और उमराह से जुड़ी गतिविधियां अब देश की गैर-तेल अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देने लगी हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक धार्मिक पर्यटन सऊदी अरब की गैर-तेल जीडीपी में करीब 20 प्रतिशत योगदान देता है, जबकि कुल जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी लगभग 7 प्रतिशत तक मानी जाती है.
पेट्रोलियम निर्यात के बाद हज से जुड़ी गतिविधियां देश की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में गिनी जाती हैं.
एक यात्री हजारों डॉलर तक करता है खर्च
हज यात्रा के दौरान हर तीर्थ यात्री बड़ी रकम खर्च करता है. मक्का चैंबर ऑफ कॉमर्स के अनुसार एक औसत अंतरराष्ट्रीय यात्री अपनी यात्रा पर लगभग 3000 डॉलर से लेकर 10000 डॉलर तक खर्च कर देता है.
यह खर्च यात्री के देश, यात्रा पैकेज और रहने की सुविधा पर निर्भर करता है. इसमें फ्लाइट टिकट, होटल, वीजा फीस, स्थानीय ट्रांसपोर्ट, खाना-पीना और खरीदारी जैसे खर्च शामिल होते हैं.
होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को बड़ा फायदा
हज सीजन के दौरान मक्का और मदीना के होटल पूरी तरह भर जाते हैं. खासतौर पर ग्रैंड मस्जिद के आसपास मौजूद लग्जरी होटलों की मांग सबसे ज्यादा रहती है.
इस दौरान होटल किराए में भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिलती है. महंगे होटलों के साथ-साथ बजट होटल और गेस्ट हाउस भी पूरी तरह बुक हो जाते हैं. इससे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को जबरदस्त फायदा मिलता है.
खाना-पीना और ट्रांसपोर्ट से भी बड़ी कमाई
लाखों यात्रियों की मौजूदगी से रेस्टोरेंट, केटरिंग सर्विस, टैक्सी, बस और ट्रेन सेवाओं की मांग अचानक बढ़ जाती है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक तीर्थ यात्रियों के कुल खर्च का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ खाने-पीने पर खर्च होता है. इसके अलावा लोकल ट्रांसपोर्ट और शॉपिंग से भी अरबों रुपये का कारोबार होता है.
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