क्या भारत को मिल गया अफगानिस्तान का बगराम एयरबेस? तालिबान ने खुद बता दी सच्चाई, जानें क्या कहा

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और कुछ अंतरराष्ट्रीय पोर्टलों पर यह खबर तेजी से फैल रही थी कि अफगानिस्तान का बगराम एयरबेस भारत को सौंप दिया गया है.

Has India got Afghanistans Bagram airbase Taliban
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काबुल/नई दिल्ली: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और कुछ अंतरराष्ट्रीय पोर्टलों पर यह खबर तेजी से फैल रही थी कि अफगानिस्तान का बगराम एयरबेस भारत को सौंप दिया गया है. दावा किया गया कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने भारत को यह रणनीतिक एयरबेस उपयोग के लिए दे दिया है. इस खबर ने दक्षिण एशिया की कूटनीतिक हलचलों को लेकर अटकलें बढ़ा दी थीं.

लेकिन अब अफगान तालिबान प्रशासन ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है. तालिबान ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि भारत को बगराम एयरबेस न तो सौंपा गया है और न ही इस पर किसी तरह की बातचीत हुई है.

भारत से इस विषय पर कोई चर्चा नहीं

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबान सरकार के प्रवक्ताओं ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच किसी भी सैन्य बेस को लेकर कोई समझौता या वार्ता नहीं हुई है. तालिबान के अधिकारियों ने बताया कि भारत ने बगराम एयरबेस पर उपस्थिति दर्ज कराने की न तो कोई मांग की और न ही अफगान सरकार ने ऐसी कोई पेशकश की.

एक वरिष्ठ तालिबान अधिकारी ने संडे गार्जियन लाइव को बताया कि बगराम से जुड़ी खबरें पूरी तरह मनगढ़ंत और अफवाहों पर आधारित हैं. उन्होंने कहा कि कुछ समूह जानबूझकर भारत-अफगानिस्तान के बीच बढ़ते संबंधों को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.

अधिकारी ने कहा, "सोशल मीडिया पर चल रही खबरें गलत सूचना का हिस्सा हैं. बगराम में भारत की किसी भी सैन्य या तकनीकी उपस्थिति पर कभी चर्चा नहीं हुई है."

बगराम एयरबेस का रणनीतिक महत्व

अफगानिस्तान का बगराम एयरबेस देश का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक सैन्य हवाई ठिकाना है. यह राजधानी काबुल से करीब 50 किलोमीटर उत्तर में स्थित है और 1980 के दशक से यह अफगानिस्तान के सैन्य अभियानों का केंद्र रहा है.

पहले इसे सोवियत सेना ने विकसित किया था, बाद में 2001 में अमेरिका ने इसे अपने नियंत्रण में लेकर इसे आधुनिक एयरबेस में बदला.

अमेरिकी सेना ने 20 वर्षों तक बगराम को आतंकवाद-रोधी अभियानों का मुख्य ठिकाना बनाए रखा. यहां से न केवल अफगानिस्तान बल्कि पाकिस्तान की सीमा तक निगरानी की जाती थी.

अमेरिका चाहता है बगराम पर दोबारा नियंत्रण

तालिबान के 2021 में सत्ता संभालने के बाद अमेरिका को यह ठिकाना खाली करना पड़ा. लेकिन रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन के कुछ वर्ग अब भी बगराम एयरबेस को दोबारा हासिल करने की इच्छा रखते हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान इस बेस की रणनीतिक अहमियत को स्वीकार किया था और यह संकेत दिया था कि अगर संभव हुआ तो अमेरिका इसे फिर से उपयोग में लाना चाहेगा.

हालांकि तालिबान ने अमेरिका की किसी भी ऐसी मांग को कड़े शब्दों में अस्वीकार कर दिया था. तालिबान प्रवक्ताओं ने कहा था, "अफगानिस्तान किसी भी विदेशी शक्ति को फिर से अपनी जमीन पर सैन्य ठिकाना बनाने की अनुमति नहीं देगा. हमारे देश की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता."

भारत-अफगान रिश्तों का नया दौर

तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंधों की दिशा पहले अनिश्चित थी, लेकिन पिछले दो वर्षों में स्थिति में सुधार हुआ है. भारत ने मानवीय सहायता, खाद्यान्न, और दवाइयों की आपूर्ति के माध्यम से अफगानिस्तान से संपर्क बनाए रखा है.

हाल ही में भारत के तकनीकी प्रतिनिधियों ने काबुल में भारतीय दूतावास को भी सीमित रूप में फिर से सक्रिय किया है.

तालिबान के अधिकारियों ने कहा है कि वे भारत के साथ व्यापार, विकास और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन किसी भी सैन्य गठजोड़ की संभावना से इनकार किया गया है.

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