हरतालिका तीज पर करें इन 5 चीजों का दान, मां पार्वती की कृपा से घर में आएगी खुशहाली

Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज के दिन कुछ विशेष चीजों का दान करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इन वस्तुओं का दान करने से मां पार्वती की कृपा मिलती है और घर में सुख-समृद्धि के साथ आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं.

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Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का पर्व आज यानी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जा रहा है. यह व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है. इस बार तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह समाप्त हो रही है, इसलिए उदया तिथि के आधार पर 14 सितंबर को हरतालिका तीज का व्रत रखा जा रहा है. विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं, वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर पाने की इच्छा से व्रत और पूजा करती हैं.

हरतालिका तीज पूजा का शुभ मुहूर्त

दिल्ली के पंचांग के अनुसार, हरतालिका तीज पर प्रातःकालीन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा. हालांकि अलग-अलग शहरों और क्षेत्रों में पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है. कई स्थानों पर शाम के प्रदोष काल में भी शिव-पार्वती की पूजा करने की परंपरा है. ऐसे में पूजा के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग का समय देखना उचित रहेगा.

माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है तीज की कथा

हरतालिका तीज की पौराणिक कथा माता पार्वती और भगवान शिव से जुड़ी है. मान्यता के अनुसार माता पार्वती भगवान शिव को पति रूप में पाना चाहती थीं और इसके लिए उन्होंने कठोर तपस्या की थी. उनके पिता हिमालय भगवान विष्णु से उनका विवाह करना चाहते थे, लेकिन पार्वती का मन शिव को ही पति के रूप में स्वीकार कर चुका था.

कहा जाता है कि माता पार्वती की सखी उन्हें वन में ले गईं, जहां उन्होंने भगवान शिव की आराधना करते हुए कठिन व्रत किया. उन्होंने मिट्टी से शिवलिंग बनाकर पूजा की और शिव को पति रूप में पाने का संकल्प लिया. उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया. इसी कथा और माता पार्वती के अटूट संकल्प की स्मृति में हरतालिका तीज का व्रत रखने की मान्यता है.

शिव-पार्वती के साथ गणेश जी की भी करें पूजा

हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा मुख्य मानी जाती है. इसके साथ गणेश जी की आराधना करने की भी परंपरा है. पूजा के लिए मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा अथवा शिवलिंग बनाकर स्थापित किया जा सकता है. इसके बाद जल, पंचामृत, अक्षत, रोली, चंदन, फूल, बेलपत्र, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं.

माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करने के बाद हरतालिका तीज की कथा सुनी जाती है. अंत में शिव-पार्वती की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में खुशहाली की कामना की जाती है.

हरतालिका तीज पर इन चीजों का कर सकते हैं दान

हरतालिका तीज पर दान-पुण्य को भी शुभ माना जाता है. अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को वस्त्र, अन्न, फल, मिठाई और सुहाग सामग्री का दान किया जा सकता है. विवाहित महिलाएं किसी जरूरतमंद महिला को साड़ी, चूड़ी, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी या अन्य श्रृंगार सामग्री भी दे सकती हैं. धार्मिक दृष्टि से दान में दिखावे के बजाय श्रद्धा और अपनी क्षमता को महत्व देना बेहतर माना जाता है.

सुहाग की चीजों का क्या है महत्व?

हरतालिका तीज पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं. सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी, मंगलसूत्र और पायल जैसी चीजों को सुहाग के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. पूजा के दौरान माता पार्वती को भी सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा है. मान्यता है कि इसके जरिए महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं.

निर्जला व्रत रखते समय सेहत का रखें ध्यान

हरतालिका तीज पर कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, यानी पूरे दिन अन्न और जल का सेवन नहीं करतीं. हालांकि यह कठिन व्रत है और हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है. यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है, गर्भावस्था है, दवा चल रही है या चिकित्सक ने लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से मना किया है, तो निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. धार्मिक आस्था के साथ अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.

रात में जागरण और अगले दिन पारण की परंपरा

कई क्षेत्रों में हरतालिका तीज की रात जागरण किया जाता है. इस दौरान महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा, भजन-कीर्तन और व्रत कथा का पाठ करती हैं. इसके बाद अगले दिन स्नान और पूजा करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है. अलग-अलग क्षेत्रों में जागरण, पूजा और पारण की विधि में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है.

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