पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी हिंसा के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब हमास ने पहली बार अमेरिका द्वारा प्रस्तावित शांति योजना पर सकारात्मक संकेत दिए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रविवार शाम तक अंतिम निर्णय लेने की चेतावनी दिए जाने के कुछ ही घंटों बाद, हमास ने संकेत दिया कि वह प्रस्ताव पर आगे की बातचीत के लिए तैयार है.
हमास के नेताओं ने शुक्रवार को कहा कि वे गाज़ा पट्टी में युद्धविराम की अमेरिकी योजना के कुछ हिस्सों को स्वीकार करने को तैयार हैं. जिनमें बंधकों की रिहाई और गाज़ा में सत्ता से हटने की बात शामिल है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि योजना के कुछ अन्य पहलुओं पर फिलिस्तीनी हितधारकों के साथ और विमर्श की आवश्यकता है.
ट्रंप का कड़ा संदेश: समय सीमा तय, परिणाम चेतावनी के साथ
इस घटनाक्रम से पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सख्त अल्टीमेटम जारी करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा था कि यदि हमास रविवार शाम 6 बजे (वॉशिंगटन समयानुसार) तक शांति प्रस्ताव पर सहमत नहीं होता, तो उस पर "ऐसा कहर टूटेगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया." ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हर देश इस समझौते को समर्थन दे चुका है. अब वक्त आ गया है कि हमास भी मानवता और भविष्य के लिए एक निर्णायक कदम उठाए. पश्चिम एशिया में शांति किसी न किसी रूप में कायम की जाएगी.” राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से प्रस्तुत इस योजना को इजराइल पहले ही स्वीकार कर चुका है, जबकि मिस्र, कतर और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों ने भी इसका समर्थन किया है. हालांकि कुछ हिस्सों पर आगे चर्चा की मांग की गई है.
प्रस्ताव के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
युद्धविराम के तुरंत बाद, हमास सभी शेष इजराइली बंधकों को (जिंदा और मृत दोनों) रिहा करेगा, और इजराइल अपनी हिरासत में मौजूद फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ देगा. जो हमास सदस्य हथियार छोड़कर शांतिपूर्ण जीवन अपनाना चाहेंगे, उन्हें माफी दी जाएगी. जिन सदस्यों को गाज़ा से बाहर जाना है, उन्हें सुरक्षित निकासी की सुविधा दी जाएगी. गाज़ा में पूर्ण मानवीय सहायता और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. कोई भी व्यक्ति न तो गाज़ा छोड़ने को मजबूर होगा और न ही वापसी पर कोई रोक होगी.
'बोर्ड ऑफ पीस' की निगरानी में अस्थायी प्रशासन
योजना के तहत, गाज़ा का प्रशासन एक गैर-राजनीतिक, तकनीकी फिलिस्तीनी निकाय को सौंपा जाएगा. इसकी निगरानी 'बोर्ड ऑफ पीस' नामक एक अंतरराष्ट्रीय संस्था करेगी, जिसके अध्यक्ष स्वयं डोनाल्ड ट्रंप होंगे. इसमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर समेत कई वैश्विक नेता शामिल होंगे.
गाज़ा में सुरक्षा की नई रूपरेखा
समझौते के अंतर्गत अमेरिका, अरब देशों और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों की मदद से एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) का गठन किया जाएगा. यह बल न केवल सुरक्षा बनाए रखेगा, बल्कि स्थानीय फिलिस्तीनी पुलिस बलों को प्रशिक्षित करने का भी कार्य करेगा. इसके अलावा, गाज़ा किसी भी देश या समूह के लिए खतरा न बने, यह सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय साझेदार गारंटी देंगे.
इजराइल नहीं करेगा गाज़ा पर कब्जा
इस शांति योजना में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इजराइल गाज़ा पर कब्जा नहीं करेगा, और न ही इसे अपने हिस्से में मिलाएगा. ISF के ज़रिए स्थिरता स्थापित होने के बाद, इजराइली रक्षा बल (IDF) चरणबद्ध तरीके से क्षेत्र से वापस हटेंगे. केवल सीमावर्ती इलाकों में अस्थायी उपस्थिति बनी रहेगी, जब तक कि सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित न हो जाए.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं
इस पहल को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में सतर्क आशावाद देखा जा रहा है. जहां इजराइल और अमेरिका इसे एक "ऐतिहासिक अवसर" मान रहे हैं, वहीं हमास ने कुछ शर्तों के साथ अपने दरवाज़े खुले रखे हैं. मिस्र और कतर जैसे पारंपरिक मध्यस्थों ने भी कहा है कि शांति की दिशा में यह कदम स्वागतयोग्य है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अभी चर्चा शेष है.
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