पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं. जून 2025 के हमले के चार महीने बाद अब अमेरिका और इजराइल एक बार फिर ईरान को निशाना बना सकते हैं. हालिया घटनाओं और कूटनीतिक गतिविधियों से कम से कम पांच ऐसे संकेत मिले हैं, जो इस संभावित हमले की ओर इशारा करते हैं.
1. कूटनीतिक बातचीत के रास्ते बंद, ट्रंप के दूत का इंकार
ईरान के वरिष्ठ राजनयिक अराघाची ने यूरोपीय देशों के साथ बातचीत के जरिए यूरेनियम संवर्धन मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की. उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ से मुलाकात की मांग की, लेकिन विटकॉफ ने स्पष्ट रूप से बातचीत से इनकार कर दिया. उन्होंने शर्त रखी कि जब तक ईरान यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह नहीं रोकता, तब तक कोई वार्ता नहीं होगी. अमेरिका ने अब मिसाइल निर्माण पर भी रोक लगाने की मांग की है, जिसने तेहरान को चौंका दिया है.
2. अमेरिका की सैन्य गतिविधियों में तेजी
अमेरिका ने अपने रणनीतिक KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमानों को फिर से मध्य पूर्व में तैनात किया है. ये वही विमान हैं जिनका इस्तेमाल पिछले हमले से पहले भी किया गया था. इसके साथ ही माना जा रहा है कि अमेरिका के B-2 बॉम्बर्स भी अलर्ट मोड पर हैं. यह तैयारी किसी संभावित सैन्य कार्रवाई की ओर इशारा कर रही है.
3. इजराइल को मिला यूरेनियम के ठिकानों का सुराग
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि उन्हें जानकारी मिल गई है कि ईरान ने संवर्धित यूरेनियम कहां छिपा रखा है. जानकारों का मानना है कि इजराइल इस आधार पर किसी भी वक्त कार्रवाई कर सकता है. ईरान के पास फिलहाल करीब 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम मौजूद है, जिससे 10 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं.
4. तेहरान को राजधानी से हटाने की तैयारी
ईरान के राष्ट्रपति ने हाल ही में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें राजधानी तेहरान को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई है. आधिकारिक तौर पर इसका कारण पानी की कमी बताया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम संभावित हमले की आशंका को देखते हुए उठाया जा रहा है.
5. खामेनेई के खिलाफ फिर सक्रिय हुए विपक्षी नेता
ईरान के पूर्व शासक मोहम्मद रेजा शाह पहेलवी एक बार फिर ईरानी सत्ता परिवर्तन की कोशिशों में जुट गए हैं. वे पश्चिमी देशों और अमेरिका से संपर्क में हैं, ताकि खामेनेई को हटाकर खुद सत्ता में वापसी कर सकें. इजराइल भी इस रणनीति का समर्थन करता दिख रहा है. यह राजनीतिक अस्थिरता ईरान के भीतर कमजोर होती स्थिति का संकेत है.
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