Meta Deepfake Controversy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक वीडियो हटाने के मामले के बाद Meta की मुश्किलें बढ़ गई हैं. सरकार ने कंपनी के अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में साफ कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भ्रामक वीडियो, डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट को रोकने के लिए अपने सिस्टम में बदलाव करना होगा.
सरकार का कहना है कि सिर्फ विवादित पोस्ट को हटाना काफी नहीं है. Meta को अपने पूरे कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को मजबूत करना होगा, ताकि गलत और भ्रामक जानकारी तेजी से पहचानी जा सके और उस पर तुरंत कार्रवाई हो.
तीन दिन तक चली सरकार और Meta की बैठक
सरकार और Meta के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच लगातार तीन दिनों तक बैठक हुई. इस दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन, एल्गोरिदम, डीपफेक और गलत जानकारी से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई.
सरकार ने Meta से कहा कि उसके मौजूदा सिस्टम में जरूरी बदलाव किए जाएं. खास तौर पर ऐसे एल्गोरिदम तैयार करने पर जोर दिया गया, जो डीपफेक, बदली हुई तस्वीरों और फर्जी वीडियो को जल्दी पहचान सकें.
सरकार का फोकस सिर्फ किसी एक पोस्ट को हटाने पर नहीं है. वह चाहती है कि Meta का पूरा सिस्टम इस तरह मजबूत हो, जिससे गैरकानूनी और भ्रामक कंटेंट को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके.
Deepfake पहचानने की तकनीक मजबूत करने के निर्देश
बैठक में सरकार ने Meta को डीपफेक पहचानने वाली तकनीक को और बेहतर बनाने को कहा. सोशल मीडिया पर AI की मदद से तैयार किए गए नकली वीडियो और तस्वीरों की संख्या बढ़ रही है. ऐसे कंटेंट का गलत इस्तेमाल लोगों को गुमराह करने के लिए किया जा सकता है.
सरकार ने कहा कि Meta को ऐसे कंटेंट की पहचान और उसे रोकने की प्रक्रिया को तेज करना होगा. साथ ही गैरकानूनी कंटेंट मिलने पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए बेहतर व्यवस्था बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं. इसके अलावा सरकारी आदेशों पर तेजी से कार्रवाई करने और संबंधित मामलों में बेहतर तालमेल रखने को भी कहा गया है.
डेटा लोकलाइजेशन और भारत के नियमों पर जोर
सरकार ने Meta को डेटा लोकलाइजेशन से जुड़े नियमों का पालन करने के लिए भी कहा है. साथ ही कंपनी और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन रखने पर जोर दिया गया.
सरकार का साफ संदेश है कि भारत में काम करने वाली सोशल मीडिया कंपनियों को देश के कानून और नियमों का पालन करना होगा. सरकार ने Meta से कहा कि भारत में उसकी सेवाएं चल रही हैं, इसलिए यहां लागू नियमों को गंभीरता से मानना जरूरी है.
मार्क जुकरबर्ग ने जताया खेद
बैठक के दौरान Meta के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग की ओर से मामले पर खेद जताया गया. उन्होंने भरोसा दिया कि ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे. सरकार की ओर से भी साफ कर दिया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गलत जानकारी, डीपफेक और गैरकानूनी कंटेंट को लेकर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
अब देखना होगा कि Meta इन निर्देशों को लागू करने के लिए किस तरह के तकनीकी और कंटेंट मॉडरेशन बदलाव करता है और सरकार को इसका रोडमैप कब सौंपता है.
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