Gold-Silver Price: सोने-चांदी की कीमतों में इस हफ्ते की शुरुआत निवेशकों के लिए उतार-चढ़ाव भरी रही. सोमवार की तेज गिरावट के बाद मंगलवार को सोने की कीमत कुछ संभली, लेकिन चांदी पर दबाव बना रहा. अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित किया है. सोमवार को सोने में करीब 3 फीसदी और चांदी में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी.
MCX पर सोने-चांदी का क्या है भाव?
मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,168 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता नजर आया, जबकि चांदी एक फीसदी से ज्यादा गिरकर 61 डॉलर प्रति औंस पर आ गई. भारत के वायदा बाजार MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 1,48,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है. वहीं दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी 0.9 फीसदी की गिरावट के साथ 2,25,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर का दबाव
बाजार में सोने पर दबाव बढ़ने की एक बड़ी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में तेजी को माना जा रहा है. सैक्सो बैंक के कमोडिटी स्ट्रेटजी हेड ओले हैनसेन के मुताबिक, अमेरिका की 10 साल की रियल यील्ड करीब 2.85 फीसदी तक पहुंच गई है. इसके अलावा चीन में गोल्डन वीक की छुट्टियां शुरू होने से पहले वहां निवेशकों की गतिविधियां भी कीमतों को प्रभावित कर रही हैं. इन परिस्थितियों के बीच सोने में बिकवाली का दबाव देखने को मिला है.
ब्याज दरों को लेकर भी बढ़ी चिंता
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर नीति भी कीमती धातुओं के लिए अहम बन गई है. बाजार के जानकारों के अनुसार, अगर अमेरिका में ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी होती है तो बॉन्ड जैसे ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों का आकर्षण बढ़ सकता है, जिसका असर सोने पर पड़ सकता है. वहीं कॉरपोरेट क्रेडिट मार्केट में दबाव बढ़ने पर कंपनियों और निवेशकों की नकदी जरूरतें भी बढ़ सकती हैं, जिससे सोने की बिकवाली में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है.
गिरावट के बीच Gold ETF में आया पैसा
सोने की कीमतों में गिरावट के बावजूद गोल्ड ETF में निवेश की तस्वीर पूरी तरह कमजोर नहीं दिख रही है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले हफ्ते ग्लोबल गोल्ड ETF में 134.2 मिलियन डॉलर का नया निवेश आया. रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय निवेशकों की ओर से खरीदारी देखने को मिली, जबकि नॉर्थ अमेरिका से कुछ निकासी हुई. इससे संकेत मिलता है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद कुछ निवेशक लंबी अवधि में सोने को पोर्टफोलियो में बनाए रखने पर ध्यान दे रहे हैं.
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