Namo Bharat: दिल्ली-NCR में सार्वजनिक परिवहन का नेटवर्क आने वाले वर्षों में और तेजी से बदलने वाला है. गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर तक सीधी कनेक्टिविटी देने वाली प्रस्तावित नमो भारत आरआरटीएस परियोजना इसी बदलाव की बड़ी कड़ी मानी जा रही है. अब इस महत्वाकांक्षी कॉरिडोर को लेकर NCRTC ने एक अहम जानकारी साझा की है. 72.44 किलोमीटर लंबे गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर पर प्रस्तावित नमो भारत और मेट्रो स्टेशनों के नाम सामने आ गए हैं.
इस परियोजना की खास बात यह है कि एक ही कॉरिडोर पर रीजनल रैपिड ट्रांजिट के साथ लोकल मेट्रो सेवा का भी प्रावधान किया गया है. यानी लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों के साथ स्थानीय यात्रियों को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है. हालांकि, परियोजना अभी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी DPR के चरण में है.
गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक बदलेगा सफर
प्रस्तावित कॉरिडोर गाजियाबाद को ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने का काम करेगा. इसके तैयार होने के बाद गाजियाबाद से एयरपोर्ट तक पहुंचना मौजूदा सड़क परिवहन के मुकाबले काफी आसान हो सकता है.
इस पूरे नेटवर्क को इस तरह विकसित करने की योजना है कि यात्रियों को क्षेत्रीय और स्थानीय दोनों तरह की यात्रा के विकल्प मिल सकें. खासतौर पर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने और आसपास के इलाकों में तेजी से हो रहे विकास को देखते हुए इस कॉरिडोर को NCR की परिवहन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
नमो भारत के 11 स्टेशन होंगे
NCRTC के प्रस्ताव के मुताबिक गाजियाबाद-जेवर रूट पर नमो भारत के कुल 11 स्टेशन बनाए जाने हैं. इस नेटवर्क में गाजियाबाद से लेकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक तेजी से विकसित हो रहे कई प्रमुख इलाकों को जोड़ा जाएगा.
नमो भारत के प्रस्तावित स्टेशनों में गाजियाबाद साउथ, ग्रेटर नोएडा सेक्टर-2, ग्रेटर नोएडा सेक्टर-3, ग्रेटर नोएडा सेक्टर-12, सूरजपुर, अल्फा-I, इकोटेक-VI, दनकौर, YEIDA नॉर्थ यानी सेक्टर-18, YEIDA सेंट्रल यानी सेक्टर-21 और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शामिल हैं. इन स्टेशनों के जरिए गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के बीच तेज कनेक्टिविटी विकसित करने की कोशिश की जाएगी.
इसी कॉरिडोर पर 18 मेट्रो स्टेशन भी प्रस्तावित
इस परियोजना की एक खास विशेषता यह है कि नमो भारत के साथ लोकल मेट्रो कनेक्टिविटी भी विकसित करने की योजना है. इसके लिए कॉरिडोर पर 18 मेट्रो स्टेशनों का प्रस्ताव रखा गया है.
इनमें सिद्धार्थ विहार, ग्रेटर नोएडा सेक्टर-16C, इकोटेक-12, ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4, ग्रेटर नोएडा सेक्टर-10, नॉलेज पार्क-V, पुलिस लाइन्स सूरजपुर, इकोटेक-2, नॉलेज पार्क-III, ओमेगा-II, फाई-III, इकोटेक-1E, इकोटेक-VIII, दादूपुर, जुनेदपुर, YEIDA सेक्टर-17, YEIDA सेक्टर-15 और YEIDA सेक्टर-33 प्रस्तावित हैं.
इस व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में रहने और काम करने वाले लोगों को स्थानीय परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है, जबकि नमो भारत सेवा लंबी दूरी की तेज यात्रा को आसान बनाएगी.
180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है ट्रेन
गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर को हाई-स्पीड रीजनल कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है. प्रस्तावित योजना के अनुसार नमो भारत ट्रेनें इस कॉरिडोर पर करीब 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चल सकेंगी.
इतनी तेज गति का सबसे बड़ा फायदा यात्रा के समय में कमी के रूप में सामने आने की उम्मीद है. अनुमान है कि गाजियाबाद और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच यात्रा का समय करीब 40 से 50 मिनट तक रह सकता है. हालांकि अंतिम यात्रा समय ट्रेन संचालन, स्टॉपेज और परियोजना के अंतिम डिजाइन जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा.
करीब 20,640 करोड़ रुपये की परियोजना
गाजियाबाद-जेवर एयरपोर्ट रैपिड मेट्रो परियोजना की लंबाई करीब 72.5 किलोमीटर बताई जा रही है. इसके निर्माण पर लगभग 20,640 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. पूरी लाइन को एलिवेटेड बनाने की योजना है.
परियोजना की सबसे अहम विशेषताओं में से एक यह भी है कि एक ही ट्रैक व्यवस्था पर तेज नमो भारत ट्रेन और लोकल मेट्रो दोनों के संचालन की योजना बनाई गई है. इससे एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए अलग-अलग श्रेणी के यात्रियों को परिवहन सुविधा देने की कोशिश की जाएगी.
दिल्ली-मेरठ RRTS और नोएडा नेटवर्क से भी कनेक्शन
गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर को अलग-थलग परिवहन परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. इसे NCR के मौजूदा और प्रस्तावित परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की योजना है. यह दिल्ली-मेरठ RRTS और नोएडा मेट्रो नेटवर्क के साथ कनेक्टिविटी विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
अगर प्रस्तावित कनेक्शन अपने निर्धारित स्वरूप में तैयार होते हैं, तो यात्रियों को दिल्ली-NCR के अलग-अलग हिस्सों से जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए कई इंटरचेंज विकल्प मिल सकते हैं. इससे एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के साथ-साथ आसपास के औद्योगिक, व्यावसायिक और रिहायशी क्षेत्रों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है.
नोएडा एयरपोर्ट के आसपास बढ़ेगी कनेक्टिविटी
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है. ऐसे में एयरपोर्ट को गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा से जोड़ने वाली तेज सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की जरूरत भी बढ़ेगी.
गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर इसी जरूरत को पूरा करने वाली परियोजनाओं में शामिल है. इसके जरिए एयरपोर्ट तक पहुंच आसान होने के साथ-साथ रास्ते में आने वाले रिहायशी इलाकों, कमर्शियल हब और नए विकसित हो रहे क्षेत्रों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकती है.
अभी DPR चरण में है परियोजना
हालांकि इस पूरी योजना को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह अंतिम नहीं है. परियोजना फिलहाल डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी DPR के चरण में है. निर्माण शुरू होने के बाद इसे करीब पांच साल में पूरा करने का अनुमान लगाया जा रहा है.
इसका मतलब है कि यात्रियों को अभी इस कॉरिडोर पर सफर करने के लिए कुछ समय इंतजार करना होगा. DPR के बाद परियोजना से जुड़े प्रशासनिक और वित्तीय फैसले होंगे और उसके बाद निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा.
NCR के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को मिलेगी नई रफ्तार
गाजियाबाद-जेवर नमो भारत कॉरिडोर सिर्फ दो शहरों या एक एयरपोर्ट को जोड़ने वाली परियोजना नहीं है. इसका व्यापक उद्देश्य NCR के अलग-अलग हिस्सों के बीच तेज, भरोसेमंद और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क तैयार करना है.
अगर यह परियोजना प्रस्तावित योजना के मुताबिक आकार लेती है, तो गाजियाबाद से ग्रेटर नोएडा और जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने का तरीका काफी बदल सकता है. 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक की प्रस्तावित गति, 11 नमो भारत स्टेशन, 18 मेट्रो स्टेशन और दूसरे ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से कनेक्टिविटी इसे NCR की भविष्य की प्रमुख परिवहन परियोजनाओं में शामिल कर सकती है.
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