आज गणेश चतुर्थी पर बप्पा को लगाएं ये खास भोग, घर में बरसेगी सुख-शांति और समृद्धि!

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर बप्पा को मोदक, लड्डू, केले, दूर्वा-गुड़, खीर और पूरन पोली जैसे प्रिय भोग अर्पित करने की परंपरा है. मान्यता है कि श्रद्धा से लगाए गए इन भोगों से गणपति की कृपा मिलती है.

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Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को सबसे पहले मोदक का भोग लगाया जाता है. ज्योतिष एक्सपर्ट और वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, चावल के आटे, ताजे नारियल और गुड़ से बने 21 उकडीचे मोदक बप्पा को अर्पित करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि मोदक भगवान गणेश को बेहद प्रिय है और इसे भोग में शामिल करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है.

लड्डू से लेकर केले तक चढ़ाएं ये चीजें

मोदक के अलावा शुद्ध देसी घी से बने मोतीचूर या बेसन के लड्डू भी गणपति को अर्पित किए जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीला रंग सकारात्मकता और बृहस्पति ग्रह से जुड़ा माना जाता है. ऐसे में लड्डू का भोग लगाने को आर्थिक परेशानियों से राहत से जोड़कर देखा जाता है. वहीं, गणेशजी को केला चढ़ाते समय एक केला नहीं, बल्कि दो पके हुए केले का जोड़ा अर्पित करने की परंपरा बताई गई है.

21 दूर्वा और गुड़-नारियल का भोग

गणेश पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व माना जाता है. बप्पा को भोग की थाली में 21 गांठ दूर्वा के साथ शुद्ध गुड़ और ताजे नारियल की गिरी भी रखी जा सकती है. मान्यता है कि दूर्वा भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय है, इसलिए पूजा में इसे विशेष रूप से अर्पित किया जाता है.

खीर और पंचामृत से करें गणपति का स्वागत

गाय के दूध, मखाने और चावल से तैयार की गई केसरिया खीर का भोग भी गणेशजी को लगाया जाता है. इसके साथ पंचामृत अर्पित करने की परंपरा भी है. धार्मिक मान्यताओं में इसे घर की सुख-शांति और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है.

पूरन पोली और सूजी का शीरा भी है खास

चना दाल, गुड़ और शुद्ध घी से बनी पूरन पोली भी गणपति को प्रिय भोगों में शामिल मानी जाती है. ज्योतिष एक्सपर्ट और वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, इसका भोग लगाने से बुद्धि, करियर और कारोबार में तरक्की की कामना की जाती है. इसके अलावा शुद्ध घी, सूजी, चीनी और ड्राई फ्रूट्स से तैयार सूजी का शीरा भी बप्पा को अर्पित किया जा सकता है. मान्यता है कि इससे परिवार में प्रेम और आपसी शांति बनी रहती है.

भोग लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान

गणेशजी को भोग अर्पित करते समय पूजा करने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है. भोग के लिए चांदी, पीतल, तांबे के बर्तन या केले के पत्ते का इस्तेमाल करने की परंपरा है. वहीं, कांच, प्लास्टिक या लोहे के बर्तन में भोग लगाने से बचने की सलाह दी जाती है.

गणेशजी को न चढ़ाएं तुलसी

गणेश पूजा में तुलसी दल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश की पूजा में तुलसी चढ़ाना वर्जित माना गया है. इसलिए गणेश चतुर्थी पर भोग और नैवेद्य तैयार करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

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