लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में अंदरूनी राजनीति उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है. मायावती और उनके परिवार के बीच बढ़ते मतभेदों के चलते एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटाने के बाद उनके पिता आनंद कुमार को यह जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन आनंद कुमार ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया. इसके बाद मायावती ने यह जिम्मेदारी वापस ले ली है.
मायावती का आधिकारिक बयान
मायावती ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दो पोस्ट किए. उन्होंने लिखा, "आनंद कुमार ने पार्टी के एक अन्य पद पर काम करने की इच्छा जताई है, इसलिए वह पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर बने रहेंगे, लेकिन नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी अब उनसे वापस ली जा रही है."
इसके साथ ही बसपा में बड़े फेरबदल किए गए हैं. सहारनपुर के रणधीर बेनीवाल को नया नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया है. अब राज्यसभा सांसद रामजी गौतम और रणधीर बेनीवाल पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर के रूप में मायावती के निर्देशन में काम करेंगे.
आकाश आनंद को लेकर बड़ा फैसला
बीते दिनों मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया था. उन्होंने कहा, "आकाश को अपनी राजनीतिक परिपक्वता दिखानी थी, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया असंतुलित थी. वह अपने ससुर के प्रभाव में आकर स्वार्थी और अहंकारी हो गए हैं." इससे पहले, 2 मार्च को मायावती ने उन्हें पार्टी के सभी पदों से हटा दिया था और कहा था कि वे उनके उत्तराधिकारी नहीं होंगे.
आकाश आनंद का राजनीतिक सफर
आकाश आनंद ने 2017 में सहारनपुर में एक जनसभा के दौरान पहली बार सार्वजनिक रूप से राजनीति में कदम रखा. 2019 में उन्हें बसपा का नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया था. 2022 के हिमाचल विधानसभा चुनाव में वह बसपा के स्टार प्रचारक के रूप में सामने आए. लंदन से एमबीए करने वाले आकाश की शादी बसपा के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ की बेटी डॉ. प्रज्ञा से हुई है.
अशोक सिद्धार्थ पर भी गिरी गाज
मायावती ने 12 फरवरी को आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ और उनके सहयोगी नितिन सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया था. उन पर संगठन में गुटबाजी और अनुशासनहीनता के आरोप लगाए गए थे. मायावती ने बयान दिया था कि ये दोनों पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे, जिसके कारण यह कार्रवाई की गई.
आनंद कुमार की भूमिका
आनंद कुमार मायावती के छोटे भाई और आकाश आनंद के पिता हैं. वे मायावती के सबसे करीबी विश्वासपात्र माने जाते हैं, लेकिन आमतौर पर पार्टी की गतिविधियों में उनकी भूमिका पर्दे के पीछे रही है. कभी नोएडा प्राधिकरण में क्लर्क रहे आनंद कुमार की संपत्ति मायावती के सत्ता में आने के बाद तेजी से बढ़ी थी.
बसपा में अस्थिरता
बसपा में चल रहे इन आंतरिक बदलावों से पार्टी की स्थिरता पर सवाल उठने लगे हैं. परिवार के अंदर बढ़ते मतभेदों के बीच मायावती का स्पष्ट रुख यही दर्शाता है कि वह अपने नेतृत्व को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता करने को तैयार नहीं हैं.
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