रिटायर्ड IAS का बेटा निकला फर्जी IPS! नकली वर्दी और आईडी से करता था ठगी, देहरादून से गिरफ्तार

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से सामने आया यह मामला सिर्फ ठगी की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स की मानसिकता को भी उजागर करता है जिसने सरकारी वर्दी और अफसरों के रुतबे को अपनी कमाई का जरिया बना लिया.

fake-ips-officer-dehradun-retired-ias-son-arrested-fraud
Image Source: Social Media

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से सामने आया यह मामला सिर्फ ठगी की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स की मानसिकता को भी उजागर करता है जिसने सरकारी वर्दी और अफसरों के रुतबे को अपनी कमाई का जरिया बना लिया. वर्षों तक सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने के बाद जब वह असली अधिकारी नहीं बन सका तो उसने नकली पहचान के सहारे लोगों का भरोसा जीतना शुरू कर दिया. खुद को कभी आईपीएस अधिकारी, कभी सेना का अफसर और कभी खुफिया एजेंसी का अधिकारी बताकर उसने लोगों से लाखों रुपये की ठगी की. आखिरकार कई शिकायतों के बाद देहरादून पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और उसके पास से फर्जी दस्तावेजों का बड़ा जखीरा बरामद किया है.

देहरादून पुलिस ने मसूरी रोड से दबोचा आरोपी

देहरादून पुलिस ने 35 वर्षीय आर. यशोवर्धन को मसूरी रोड स्थित सीएसआई तिराहे से गिरफ्तार किया. शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से खुद को अलग-अलग सरकारी एजेंसियों का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों के बीच प्रभावशाली छवि बनाता था. उसकी पहचान एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी के बेटे के रूप में हुई है, जिससे कई लोग आसानी से उसकी बातों पर भरोसा कर लेते थे. पुलिस का कहना है कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से अपनी पहचान बदलता था और हर बार नए रूप में लोगों को अपने जाल में फंसाता था.

कभी IPS तो कभी RAW एजेंट बनकर जमाता था रौब

जांच में पता चला कि आरोपी जरूरत के हिसाब से अपनी पहचान बदल लेता था. वह कभी खुद को आईपीएस अधिकारी बताता, कभी भारतीय सेना का वरिष्ठ अधिकारी बन जाता, तो कभी रॉ (RAW) या सीआरपीएफ का अधिकारी होने का दावा करता था. लोगों को विश्वास दिलाने के लिए वह फर्जी पहचान पत्र, विजिटिंग कार्ड, सरकारी प्रतीक, वर्दियां और अन्य सामान का इस्तेमाल करता था. सरकारी विभागों में ऊंची पहुंच और प्रभाव का दावा करते हुए वह नौकरी दिलाने, सरकारी काम कराने और विभिन्न सेवाओं का भरोसा देकर लोगों से बड़ी रकम वसूलता था.

UPSC में सफलता नहीं मिली तो चुना अपराध का रास्ता

पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि बचपन से ही वह आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को मिलने वाले सम्मान और अधिकार से प्रभावित था. इसी वजह से उसने कई वर्षों तक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा की तैयारी भी की. हालांकि लगातार प्रयासों के बावजूद उसे सफलता नहीं मिली.

जब उसका सपना पूरा नहीं हो सका तो उसने गलत रास्ता चुन लिया. उसने नकली दस्तावेज तैयार किए और खुद को अलग-अलग सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों का विश्वास जीतना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे यही उसकी ठगी का सबसे बड़ा हथियार बन गया.

दो अलग-अलग शिकायतों से खुली ठगी की परतें

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब 8 जुलाई को डाकरा निवासी अंशुल उपाध्याय ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के मुताबिक आरोपी ने खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए उनकी दिवंगत मां के नाम पर कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराने का झांसा दिया और इस बहाने उनसे 15 लाख रुपये ले लिए.

इसके कुछ दिनों बाद 15 जुलाई को डॉ. अनुषा ने भी पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताते हुए रक्षा मंत्रालय में डेटा साइंस कंसल्टेंट की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और उनसे 4.60 लाख रुपये ऐंठ लिए. दोनों मामलों की जांच के दौरान पुलिस को आरोपी की गतिविधियों पर गंभीर संदेह हुआ और उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई.

छापेमारी में मिला फर्जी सरकारी सामान का जखीरा

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से बड़ी मात्रा में फर्जी सरकारी सामग्री बरामद की. इसमें पांच नकली पहचान पत्र, आठ फर्जी विजिटिंग कार्ड, पुलिस और सेना से जुड़े 25 लोगो, तीन जोड़ी वर्दियां, तीन नकली रिबन, एक वायरलेस सेट और एक लैपटॉप शामिल हैं. इन बरामदगी से साफ संकेत मिलता है कि आरोपी लंबे समय से सुनियोजित तरीके से लोगों को सरकारी अधिकारी होने का भ्रम पैदा कर ठगता आ रहा था.

ये भी पढ़ें: गाजियाबाद को 868 करोड़ के विकास की सौगात, कांवड़ यात्रा पर सीएम योगी का विपक्ष को दोटूक जवाब