New Delhi: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर रविवार से अपने बहु-देशीय विदेश दौरे की शुरुआत कर रहे हैं. इस दौरान वे पश्चिम एशिया के चार देशों के अलावा अमेरिका और बेल्जियम की यात्रा करेंगे. इस दौरे में ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, प्रौद्योगिकी और वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह यात्रा पश्चिम एशिया के प्रमुख साझेदार देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
सबसे पहले चार खाड़ी देशों का दौरा
अपने दौरे के पहले चरण में विदेश मंत्री कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान जाएंगे. यहां वे इन देशों के विदेश मंत्रियों और शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे. इन बैठकों में द्विपक्षीय सहयोग, निवेश, ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषय प्रमुख रहेंगे. खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा स्रोत है और यहां लाखों भारतीय नागरिक भी रहते हैं.
ऊर्जा आपूर्ति पर रहेगा खास फोकस
हाल के समय में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है. ऐसे में भारत पश्चिम एशिया से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है. विदेश मंत्री की यह यात्रा इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, ताकि ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहयोग और समन्वय को और मजबूत किया जा सके.
संयुक्त राष्ट्र में शुरू करेंगे भारत का अभियान
खाड़ी देशों की यात्रा के बाद एस. जयशंकर अमेरिका पहुंचेंगे. न्यूयॉर्क में 13 जुलाई को वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 2028-29 अवधि की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे. इस अभियान के जरिए भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने समर्थन को मजबूत करने और सदस्य देशों के साथ संवाद बढ़ाने का प्रयास करेगा.
बेल्जियम में होगी भारत-EU बैठक
अमेरिका के बाद विदेश मंत्री बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स जाएंगे, जहां 14 और 15 जुलाई को भारत-यूरोपीय संघ ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) की तीसरी मंत्रीस्तरीय बैठक आयोजित होगी. इस दौरान वे यूरोपीय संघ और बेल्जियम के वरिष्ठ नेताओं के साथ व्यापार, तकनीक, निवेश और अन्य रणनीतिक विषयों पर चर्चा करेंगे.
कैरिबियाई दौरे में हुए आठ अहम समझौते
इस बहु-देशीय दौरे से पहले एस. जयशंकर ने त्रिनिदाद और टोबैगो की दो दिवसीय यात्रा पूरी की. इस दौरान भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के बीच पर्यटन, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे, आयुर्वेद और सौर ऊर्जा समेत विभिन्न क्षेत्रों में आठ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. समझौतों में विदेश मंत्रालय की इमारत को सौर ऊर्जा से संचालित करने, वेक्टर कंट्रोल, ऐतिहासिक नेल्सन द्वीप के बुनियादी ढांचे के विकास और यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट इंडीज में आयुर्वेद पर 'इंडियन चेयर' स्थापित करने जैसी परियोजनाएं शामिल हैं.
द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा
त्रिनिदाद और टोबैगो यात्रा के दौरान विदेश मंत्री ने वहां की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की. बैठक में दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचे, सुरक्षा, फोरेंसिक विज्ञान, स्वास्थ्य सेवाओं और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली यात्रा के दौरान घोषित परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई.
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