Delhi Sudarshan Chakra: देश की राजधानी दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है. तेजी से बदलते सुरक्षा खतरों और आधुनिक युद्ध तकनीकों को देखते हुए दिल्ली के अति-संवेदनशील वीआईपी क्षेत्रों की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 5,181 करोड़ रुपये के स्वदेशी ‘इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम’ (IADWS) की खरीद को मंजूरी दे दी गई है. यह प्रणाली ‘सुदर्शन चक्र’ पहल के तहत तैनात की जाएगी, जो राजधानी के चारों ओर एक बहुस्तरीय और अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार करेगी.
सरकारी सूत्रों के अनुसार, ‘सुदर्शन चक्र’ पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है. यह प्रणाली दिल्ली-एनसीआर के VIP-89 जोन, जो पहले से ही एक अत्यंत प्रतिबंधित नो-फ्लाई ज़ोन है, के ऊपर लगभग 30 किलोमीटर के दायरे में हवाई सुरक्षा प्रदान करेगी. यह सिस्टम मल्टी-लेयर डिफेंस के सिद्धांत पर काम करेगा, जिसमें अलग-अलग स्तरों पर हवाई खतरों की पहचान, ट्रैकिंग और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता होगी.
आधुनिक खतरों के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था
वर्तमान समय में युद्ध और आतंकवाद का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. ड्रोन, क्रूज मिसाइल और लोएटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन) जैसे खतरे अब पारंपरिक रक्षा प्रणालियों को चुनौती दे रहे हैं. ‘सुदर्शन चक्र’ सिस्टम को खास तौर पर ऐसे ही कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों को पहचानने और उन्हें तुरंत नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है.
यह एक नेटवर्क-आधारित और रियल-टाइम रिस्पॉन्स सिस्टम है, जो सेंसर, रडार और हथियार प्रणालियों को आपस में जोड़कर किसी भी हवाई खतरे पर तत्काल कार्रवाई करेगा.
हालिया घटनाओं ने बढ़ाई जरूरत
इस अहम फैसले के पीछे हालिया भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा चुनौतियों की बड़ी भूमिका रही है. मई 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत ने देश को झकझोर दिया था. इसके जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में स्थित 9 आतंकी शिविरों को निशाना बनाकर नष्ट किया था.
इसके बाद पाकिस्तान द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई की कोशिशों को भी भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने 7-8 मई की रात हवा में ही नाकाम कर दिया था. इसी अनुभव ने यह स्पष्ट कर दिया कि मजबूत एयर डिफेंस आज की सबसे बड़ी जरूरत है.
दिल्ली के लिए विशेष सुरक्षा घेरा
सरकार का मानना है कि राजधानी होने के नाते दिल्ली न सिर्फ राजनीतिक, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी सबसे संवेदनशील क्षेत्र है. यहां राष्ट्रपति भवन, संसद, प्रधानमंत्री आवास, सेना मुख्यालय और विदेशी दूतावास जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान स्थित हैं. ‘सुदर्शन चक्र’ इन सभी स्थानों को एक संगठित और तकनीकी सुरक्षा छत्र प्रदान करेगा.
पीएम मोदी का दीर्घकालिक विजन
यह मंजूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ का हिस्सा है, जिसकी घोषणा उन्होंने इस वर्ष 15 अगस्त को लाल किले से की थी. इस मिशन का लक्ष्य 2035 तक देश के प्रमुख शहरों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और सैन्य ठिकानों के लिए एक व्यापक और आधुनिक एयर डिफेंस नेटवर्क तैयार करना है.
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में ‘सुदर्शन चक्र’ की तैनाती न सिर्फ राजधानी की सुरक्षा को नई ऊंचाई देगी, बल्कि भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को भी वैश्विक स्तर पर मजबूती से स्थापित करेगी.
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