क्या होती है इच्छामृत्यु, जिसकी अनुमति भारत में पहली बार मिली? जानें दुनियाभर में इसको लेकर क्या है कानून

Euthanasia Law: भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के एक दंपति की याचिका पर फैसला सुनाते हुए उनके बेटे हरीश राणा के लिए पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी है.

euthanasia allowed for the first time in India law regarding Euthanasia around the world
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

Euthanasia Law: भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के एक दंपति की याचिका पर फैसला सुनाते हुए उनके बेटे हरीश राणा के लिए पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी है. हरीश राणा करीब 12 साल से कोमा में हैं और डॉक्टरों के अनुसार उनके ठीक होने की संभावना बेहद कम है.

यह फैसला जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने सुनाया. इस फैसले के बाद देश में एक बार फिर इच्छामृत्यु और उससे जुड़े कानूनों पर चर्चा शुरू हो गई है.

इच्छामृत्यु क्या होती है?

इच्छामृत्यु (Euthanasia) ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी गंभीर और लाइलाज बीमारी से पीड़ित मरीज का जीवन समाप्त करने की अनुमति दी जाती है. आमतौर पर यह तब किया जाता है जब मरीज लंबे समय से असहनीय दर्द में हो और उसके ठीक होने की कोई उम्मीद न हो. कई मामलों में मरीज या परिवार की सहमति से डॉक्टर इलाज बंद कर देते हैं या जीवनरक्षक उपचार हटा दिया जाता है.

इच्छामृत्यु के प्रकार

आमतौर पर इच्छामृत्यु दो तरह की होती है.

1. एक्टिव इच्छामृत्यु

इसमें मरीज को ऐसी दवा या इंजेक्शन दिया जाता है जिससे उसकी तुरंत मृत्यु हो जाए. कई देशों में यह अब भी अवैध है.

2. पैसिव इच्छामृत्यु

इसमें मरीज का इलाज बंद कर दिया जाता है या वेंटिलेटर जैसी लाइफ सपोर्ट मशीनें हटा दी जाती हैं. इसके बाद कुछ समय में मरीज की मौत हो जाती है.

भारत में क्या है कानून

भारत में इच्छामृत्यु पूरी तरह कानूनी नहीं है, लेकिन कुछ शर्तों के साथ पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में एक ऐतिहासिक फैसले में इसे मंजूरी दी थी. इसके तहत मेडिकल बोर्ड की जांच जरूरी होती है. डॉक्टरों की टीम यह तय करती है कि मरीज के ठीक होने की संभावना है या नहीं. साथ ही परिवार की सहमति भी जरूरी होती है.

किन देशों में कानूनी है इच्छामृत्यु

दुनिया के कई देशों में इच्छामृत्यु को लेकर अलग-अलग कानून हैं.

जहां कानूनी है:

नीदरलैंड्स, बेल्जियम, लक्ज़मबर्ग और कोलंबिया जैसे देशों में सख्त नियमों के साथ इच्छामृत्यु की अनुमति दी गई है.

स्विट्ज़रलैंड में अलग व्यवस्था

स्विट्ज़रलैंड में इसे ‘असिस्टेड सुसाइड’ कहा जाता है. यहां किसी व्यक्ति को आत्महत्या में मदद करना कानूनी हो सकता है, लेकिन यह साबित करना होता है कि मदद करने वाले का इसमें कोई निजी लाभ नहीं है.

अमेरिका और कनाडा का नियम

अमेरिका के कुछ राज्यों जैसे कैलिफोर्निया, वॉशिंगटन, ओरेगन और वेरमॉन्ट में सख्त नियमों के साथ इसकी अनुमति है. वहीं कनाडा ने साल 2016 में इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता दे दी थी.

कई देशों में अब भी विवाद

यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, इटली, रूस और चीन जैसे कई देशों में इच्छामृत्यु अभी भी अवैध है या सीमित रूप से ही मान्य है.

इच्छामृत्यु के लिए जरूरी शर्तें

जिन देशों में इच्छामृत्यु की अनुमति है, वहां आमतौर पर कुछ शर्तें लागू होती हैं:

  • मरीज की बीमारी गंभीर और लाइलाज हो
  • डॉक्टर यह प्रमाणित करें कि इलाज से सुधार संभव नहीं
  • मरीज या परिवार की लिखित सहमति हो
  • कई मामलों में दो डॉक्टरों की मंजूरी जरूरी होती है

नाबालिग मरीजों के लिए नियम

अधिकतर देशों में 18 साल से कम उम्र के मरीजों को इच्छामृत्यु की अनुमति नहीं दी जाती. हालांकि नीदरलैंड्स और बेल्जियम में कुछ विशेष परिस्थितियों में नाबालिग भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं.

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