'न कोई पक्ष और न विपक्ष, हमारे लिए सभी राजनीतिक दल बराबर...' प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग का जवाब

देश की चुनावी प्रक्रिया पर उठते सवालों के बीच भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग किसी पार्टी का पक्ष नहीं लेता और सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं के लिए समान रूप से जवाबदेह है.

Election Commission response to the allegation of vote theft
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Sociel Media

नई दिल्ली: देश की चुनावी प्रक्रिया पर उठते सवालों के बीच भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग किसी पार्टी का पक्ष नहीं लेता और सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं के लिए समान रूप से जवाबदेह है. उन्होंने कहा कि ‘हमारे लिए न पक्ष है, न विपक्ष. लोकतंत्र में हर दल हमारे लिए बराबर है.’

यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर बड़े आरोप लगाए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि आयोग ने भाजपा के पक्ष में ‘वोट चोरी’ की है और निर्वाचन प्रक्रिया को प्रभावित किया है.

आरोप लगाना आसान, प्रमाण देना जरूरी- CEC

प्रेस वार्ता में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा 'वोट चोरी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है. उन्होंने कहा, "जब आप बिना साक्ष्य के ऐसे गंभीर आरोप लगाते हैं तो यह लोकतंत्र और संविधान दोनों का अपमान है. जो लोग वोटिंग प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें सबूतों के साथ सामने आना चाहिए. सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी से चुनाव आयोग को डराया नहीं जा सकता."

उन्होंने यह भी बताया कि आयोग ने सभी स्तरों पर पारदर्शिता बनाए रखने की पूरी कोशिश की है, और आज भी हर मतदाता, चाहे वह किसी भी वर्ग, धर्म, या आर्थिक स्थिति से हो उसके साथ आयोग पूरी तरह खड़ा है.

CEC ने कहा- आयोग सबके लिए खुला है

मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग किसी एक दल या व्यक्ति के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए काम करता है.

उन्होंने कहा, "हमारे दरवाजे सभी के लिए खुले हैं. यदि किसी को संदेह है, तो वो आयोग से संपर्क कर सकता है, अपने मुद्दे रख सकता है. हम जांच कराते हैं, फील्ड लेवल पर अधिकारी काम कर रहे हैं, प्रमाण इकट्ठा किए जाते हैं. वीडियो रिकॉर्डिंग होती है, दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होते हैं. हर प्रक्रिया पारदर्शी है."

राहुल गांधी के आरोप क्या हैं?

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 7 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव आयोग पर गम्भीर आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और कर्नाटक चुनावों में बड़े पैमाने पर वोटिंग में गड़बड़ी हुई और भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव आयोग ने निष्पक्षता से समझौता किया.

राहुल ने कहा था कि उन्होंने इस मुद्दे पर एक विस्तृत 22-पेज का विश्लेषण प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट का हवाला देते हुए बताया कि यहां एक लाख से अधिक संदिग्ध वोट दर्ज किए गए थे.

उनका कहना था कि एक ही पते पर सैकड़ों वोटर पंजीकृत पाए गए, डुप्लीकेट वोटर्स मौजूद थे और हजारों वोट गलत पते पर पंजीकृत थे.

चुनाव परिणामों को प्रभावित किया गया- राहुल गांधी 

राहुल गांधी ने दावा किया कि इन संदिग्ध वोटों का सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ा. उन्होंने उदाहरण दिया कि कर्नाटक में कांग्रेस ने 16 में से सिर्फ 9 सीटें जीतीं, जबकि 7 सीटों पर बहुत कम अंतर से हार मिली.

खासतौर पर बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कांग्रेस को वहां 6.26 लाख वोट मिले, जबकि भाजपा को 6.58 लाख वोट प्राप्त हुए, यानी करीब 32,000 वोटों का अंतर.

लेकिन महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में, जो इसी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, वहां दोनों दलों के बीच 1.14 लाख वोटों का अंतर था, जो सामान्य नहीं कहा जा सकता.

राहुल ने कहा कि जिस तरीके से एक ही पते पर बल्क वोटिंग और डुप्लीकेट एंट्रीज़ सामने आई हैं, उससे यह साफ है कि कम से कम एक लाख वोट फर्जी थे, और इसी तरह का मॉडल देशभर में कई सीटों पर इस्तेमाल किया गया.

CEC बोले- लोकतंत्र में हर वोट की कीमत है

चुनाव आयोग के मुखिया ने साफ किया कि आयोग का मुख्य उद्देश्य हर पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार देना है. उन्होंने कहा, "हमारे संविधान के अनुसार, हर भारतीय नागरिक जो 18 वर्ष से ऊपर है, उसका पंजीकरण वोटर के रूप में होना चाहिए. यह नागरिकों का कर्तव्य भी है और अधिकार भी."

विपक्षी दलों के आरोप, राजनीति या सच्चाई?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव आयोग पर हमला करना विपक्ष की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, खासकर तब जब चुनावी हार का सामना करना पड़ा हो. लेकिन जब विपक्ष सीधे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, तो यह एक संवेदनशील लोकतांत्रिक मुद्दा बन जाता है.

CEC ज्ञानेश कुमार ने इन सभी आरोपों के जवाब में कहा, "कोई भी दल हो, कोई भी नेता हो जब वे बिना प्रमाण के आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं, तो वे देश की लोकतांत्रिक नींव को कमजोर करने का प्रयास करते हैं. चुनाव आयोग इन चुनौतियों से डरता नहीं है, बल्कि और अधिक मजबूत होकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़ा रहेगा."

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