Economic Survey 2026: कब फाइनल होगी भारत-अमेरिका ट्रेड डील? निर्मला सीतारमण ने सर्वे में बताया

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2026 पेश किया.

Economic Survey 2026 When will the India-US trade deal be finalized
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Economic Survey 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2026 पेश किया. यह दस्तावेज न सिर्फ देश की आर्थिक सेहत का लेखा-जोखा है, बल्कि इसमें भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर भी अहम संकेत दिए गए हैं. सर्वे में कहा गया है कि भारत को फिलहाल वैश्विक स्तर पर कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन स्थिति इतनी गंभीर नहीं है कि इससे अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगे.

सरकार का मानना है कि बाहरी दबावों के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है और आने वाले समय में अनिश्चितताओं में कमी आ सकती है.

इस साल पूरी हो सकती है भारत-अमेरिका ट्रेड डील

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता के इस साल पूरा होने की उम्मीद है. अगर यह समझौता फाइनल होता है, तो इससे वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता कम होगी और भारत के बाहरी आर्थिक मोर्चे को मजबूती मिलेगी.

भारत और अमेरिका मार्च 2025 से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं. अब तक इस समझौते को लेकर छह दौर की औपचारिक वार्ता हो चुकी है. हालांकि, पिछले साल अगस्त में अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद बातचीत की गति धीमी पड़ गई थी.

बाहरी दुनिया से किन बातों को लेकर सतर्क है सरकार

आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि फिलहाल भारत के सामने कोई बड़ी आर्थिक समस्या नहीं है, लेकिन कुछ बाहरी कारक ऐसे हैं जो समय-समय पर असर डाल सकते हैं. इसमें प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों की धीमी आर्थिक वृद्धि, वैश्विक व्यापार पर बढ़ते टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पूंजी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव शामिल हैं.

सर्वे के अनुसार, इन कारणों से कभी-कभी भारत के निर्यात और निवेशकों के भरोसे पर दबाव पड़ सकता है, लेकिन घरेलू मांग की मजबूती इन प्रभावों को संतुलित करने में मदद कर रही है.

अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ से बढ़ी थी चिंता

आर्थिक सर्वे में अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का भी जिक्र किया गया है. अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ के साथ अतिरिक्त 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया था. अमेरिकी प्रशासन का कहना था कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है, इसलिए यह कदम उठाया गया.

इन टैरिफों के बाद दिसंबर 2025 में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय का एक प्रतिनिधिमंडल भारत आया था. इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डिप्टी यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव एंबेसडर रिक स्विट्जर ने किया था. यह टैरिफ लगाए जाने के बाद अमेरिकी अधिकारियों का दूसरा भारत दौरा था, जिससे संकेत मिला कि दोनों देश बातचीत के रास्ते खुले रखना चाहते हैं.

वैश्विक संस्थाओं का भारत की अर्थव्यवस्था पर नजरिया

वैश्विक संस्थाओं ने भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर अलग-अलग अनुमान पेश किए हैं. गोल्डमैन सैक्स ग्रुप का मानना है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील की उम्मीद के बावजूद अगले वित्तीय वर्ष में भारत की विकास दर घटकर 6.8 प्रतिशत रह सकती है.

वहीं संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यूरोप और पश्चिम एशिया जैसे अन्य बड़े बाजारों से मजबूत मांग, अमेरिकी टैरिफ के असर को कुछ हद तक कम कर देगी. आर्थिक सर्वे में यह भी कहा गया है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को दर्शाता है.

जीडीपी ग्रोथ को लेकर सरकार का अनुमान

आर्थिक सर्वेक्षण 2026 के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 तक भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है. यह अनुमान इस आधार पर लगाया गया है कि घरेलू मांग मजबूत बनी रहेगी और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद अर्थव्यवस्था स्थिर रहेगी.

सर्वे में कहा गया है कि भारत आने वाले वर्षों में मजबूत आर्थिक बुनियाद के साथ आगे बढ़ रहा है और मौजूदा वित्त वर्ष में पूरे साल के लिए 7 प्रतिशत से अधिक की रियल ग्रोथ की उम्मीद की जा रही है. अगले साल भी विकास दर 7 प्रतिशत या उसके आसपास बनी रह सकती है.

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