भारत में तेजी से बढ़ती ईंधन जरूरतों और पर्यावरणीय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए E20 फ्यूल (20% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल) पर सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियों के बीच एक नई दिशा बनती दिख रही है. हालांकि, इससे जुड़े भ्रम और चिंताओं को दूर करना अब कंपनियों की प्राथमिकता बन गया है.
महिंद्रा एंड महिंद्रा के ऑटोमोटिव डिवीजन के प्रमुख नलिनीकांत गोल्लागुंटा ने हाल ही में यह साफ किया है कि E20 फ्यूल से गाड़ियों को कोई तकनीकी नुकसान नहीं होगा, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि इससे माइलेज में कमी आ सकती है.
पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए चेतावनी
E20 फ्यूल को लेकर सबसे बड़ी चिंता उन पुरानी गाड़ियों को लेकर है, जो मौजूदा तकनीक के अनुरूप नहीं हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, इन वाहनों में मौजूद रबर, सील्स और गैस्केट्स जैसे पार्ट्स को E20 के लिए उपयुक्त बनाने के लिए बदलने की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि सरकार का कहना है कि ये बदलाव जटिल नहीं हैं, लेकिन यह काम आम ग्राहकों की जेब पर असर डाल सकता है.
सरकार के तीन बड़े उद्देश्य
E20 फ्यूल को लागू करने के पीछे सरकार के पास तीन मजबूत कारण हैं:
विश्वास की परीक्षा में ग्राहक
E20 को लेकर तकनीकी जगत में उतना विवाद नहीं है, जितना ग्राहकों के बीच भरोसे की कमी है. कई ऑटो कंपनियों के बयानों में आई असंगति ने स्थिति को और उलझा दिया है. हालांकि, महिंद्रा का स्पष्ट रुख और अगले सप्ताह आने वाली ग्राहक एडवाइजरी से उम्मीद है कि लोग इस बदलाव को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे.
भविष्य के लिए तैयार होंगे ये वाहन
महिंद्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2025 के बाद कंपनी द्वारा बनाए जाने वाले सभी नए मॉडल्स को E20 फ्यूल के अनुरूप डिजाइन किया जाएगा. इन गाड़ियों को इस तरह कैलिब्रेट किया जाएगा कि उनकी परफॉर्मेंस या माइलेज पर कोई खास असर न हो. कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि वह अपने ग्राहकों को पहले की तरह वारंटी और सर्विस सपोर्ट देती रहेगी.
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