हर वर्ष की तरह इस बार भी दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व पूरे देश में आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाएगा. साल 2025 में दशहरा 2 अक्टूबर, गुरुवार को पड़ रहा है. यह दिन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहा है. यह पर्व बताता है कि सत्य और धर्म की राह भले कठिन हो, लेकिन अंत में विजय उसी की होती है.
क्या है दशहरे का महत्व?
माता दुर्गा द्वारा महिषासुर का संहार इन दोनों घटनाओं का संदेश एक ही है: “अधर्म और अज्ञानता का अंत तय है, और धर्म व सत्य की सदा जीत होती है.” यह दिन साहस, आत्मबल और नई शुरुआत का प्रतीक बन चुका है.
क्यों की जाती है देवी अपराजिता की पूजा?
दशहरे के दिन देवी अपराजिता की पूजा करने की परंपरा है.भोपाल के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, देवी अपराजिता को अजेय (जिसे कोई हरा न सके) माना जाता है. मान्यता है कि श्रीराम ने भी लंका पर चढ़ाई से पहले देवी अपराजिता की आराधना की थी, जिसके फलस्वरूप उन्हें विजय प्राप्त हुई.
इनके पूजन से लाभ:
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:09 बजे से 2:56 बजे तक
शस्त्र पूजा विधि:
शमी पूजन मंत्र:
“शमी शमी महाशक्ति सर्वदुःख विनाशिनी. अर्जुनस्य प्रियं वृक्षं शमी वृक्षं नमाम्यहम्॥”
पूजा के अन्य मंत्र और स्तोत्र दशहरे पर देवी अपराजिता की उपासना के लिए आप “अपराजिता स्तोत्र” का पाठ भी कर सकते हैं. इससे मन को शांति और शक्ति दोनों मिलती हैं.
दशहरा: आत्मबल और धर्म की विजय का उत्सव
आज के समय में जब हम सभी जीवन की चुनौतियों से जूझ रहे हैं — कभी आर्थिक परेशानियां, तो कभी मानसिक तनाव — ऐसे में दशहरे जैसा पर्व एक नई ऊर्जा लेकर आता है. यह सिखाता है कि कोई भी मुश्किल स्थायी नहीं है. अगर इरादे सच्चे हैं और रास्ता धर्म का है, तो जीत आपकी होगी.
यह भी पढ़ें: Aaj Ka Rashifal 2 October 2025: परेशानियों से मिलेगी राहत, पढ़ें आज का मेष से मीन तक का राशिफल