Duleep Trophy: रजत पाटीदार की अगुवाई में सेंट्रल जोन ने तोड़ा 11 साल का इंतज़ार, ट्रॉफी पर फिर से कब्जा

Duleep Trophy Final: जब एक कप्तान जीत की आदत बना ले, तो फिर वो मैदान में इतिहास रचने से पीछे नहीं हटता. आईपीएल 2025 में आरसीबी को पहली बार चैंपियन बनाने वाले रजत पाटीदार ने अब दलीप ट्रॉफी में भी अपनी कप्तानी का लोहा मनवाया है.

Duleep Trophy Under the leadership of Rajat Patidar Central Zone broke the 11 year wait
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Duleep Trophy Final: जब एक कप्तान जीत की आदत बना ले, तो फिर वो मैदान में इतिहास रचने से पीछे नहीं हटता. आईपीएल 2025 में आरसीबी को पहली बार चैंपियन बनाने वाले रजत पाटीदार ने अब दलीप ट्रॉफी में भी अपनी कप्तानी का लोहा मनवाया है. इस बार उन्होंने सेंट्रल जोन की कमान संभाली और टीम को 11 साल बाद चैंपियन बना दिया.

फाइनल में साउथ जोन को हराकर सेंट्रल जोन ने 2014-15 की यादें ताज़ा कर दी, जब आखिरी बार इस टीम ने दलीप ट्रॉफी पर कब्जा जमाया था, तब भी सामने साउथ जोन ही थी. पाटीदार की सूझबूझ, यश राठौड़ की धुआंधार बैटिंग और कार्तिकेय-सारांश की धारदार गेंदबाजी ने मैच का रुख पलट कर रख दिया.

दमदार प्रदर्शन, दबदबा कायम

फाइनल में साउथ जोन की पहली पारी 149 रन पर सिमट गई. कोई भी बल्लेबाज़ 50 का आंकड़ा पार नहीं कर सका. कुमार कार्तिकेय (4 विकेट) और सारांश जैन (5 विकेट) की जोड़ी ने विरोधी टीम की कमर तोड़ दी.

इसके जवाब में सेंट्रल जोन ने 511 रन ठोक डाले. कप्तान रजत पाटीदार ने शानदार 101 रन बनाए, जबकि यश राठौड़ ने 194 रन की मैराथन पारी खेलकर सबका ध्यान खींचा. सारांश जैन ने बल्ले से भी कमाल दिखाया और 69 रन की पारी खेली. सेंट्रल जोन ने 362 रनों की बड़ी बढ़त ले ली.

दूसरी पारी में भी नहीं पलटा साउथ का खेल

हालांकि साउथ जोन ने दूसरी पारी में बेहतर वापसी की. अंकित शर्मा (99) और आंद्रे सिद्धार्थ (नाबाद 84) के बीच 192 रनों की साझेदारी हुई. स्मरण रविचंद्रन ने 67 रन बनाए. टीम 426 रनों तक पहुंची और 64 रन की बढ़त दी, लेकिन वो नाकाफी रही.

कार्तिकेय ने इस पारी में भी 4 विकेट चटकाए, जबकि सारांश जैन ने 3 विकेट निकाले और पूरे मैच में कुल 8 विकेट और एक अर्धशतक के साथ 'प्लेयर ऑफ द मैच' स्तर का प्रदर्शन किया.

आखिरकार जीत की सील

आखिरी इनिंग में सेंट्रल जोन को जीत के लिए सिर्फ 65 रन चाहिए थे. टीम ने 20.3 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर यह टारगेट हासिल कर लिया. कप्तान पाटीदार ने यहां भी संयम और क्लास का परिचय दिया.

कप्तान तिलक वर्मा की गैरहाज़िरी भारी पड़ी

साउथ जोन को अपने नियमित कप्तान तिलक वर्मा की कमी साफ महसूस हुई, जो टूर्नामेंट शुरू होने से पहले एशिया कप के लिए दुबई रवाना हो गए थे. उनकी जगह कोई भी बल्लेबाज़ लीडरशिप में नहीं झलक पाया.

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