DRDO ने किया 'NAG MK-2' का सफल परीक्षण, ज़ोरावर टैंक से दागी गाइडेड मिसाइल, जानें ताकत और खासियत

भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए अत्याधुनिक NAG MK-2 एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) का सफल परीक्षण किया है.

DRDO successfully test-fires NAG MK-2 from Zorawar tank
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली: भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए अत्याधुनिक NAG MK-2 एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) का सफल परीक्षण किया है. इस मिसाइल को भारत के स्वदेशी रूप से विकसित हल्के टैंक ‘ज़ोरावर’ से लॉन्च किया गया, जो कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की देखरेख में हुआ. यह परीक्षण भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और आधुनिक युद्ध प्रणाली में उसकी तेजी से बढ़ती क्षमता का प्रतीक है.

यह मिसाइल न तो ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है, न ही अग्नि-5 जैसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल, और न ही टॉमहॉक जैसी विदेशी तकनीक पर आधारित है. बल्कि NAG MK-2 पूरी तरह भारतीय इंजीनियरिंग का परिणाम है, जिसे विशेष रूप से आधुनिक बख्तरबंद टैंकों और आर्मर्ड व्हीकल्स को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है.

NAG MK-2: ‘दागो और भूल जाओ’ तकनीक

NAG MK-2 एक तीसरी पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है जो “फायर एंड फॉरगेट” तकनीक पर आधारित है. यानी एक बार निशाना साध कर दाग देने के बाद उसे नियंत्रित करने की आवश्यकता नहीं होती, यह अपने लक्ष्य को खुद पहचानकर उस पर सटीक वार करती है.

मुख्य विशेषताएं:

ऑल-वेदर, ऑल-टेरेन ऑपरेशन: सभी मौसमों और कठिन भौगोलिक स्थितियों में कारगर.

डायरेक्ट और टॉप अटैक मोड: दुश्मन के टैंक पर सामने से या ऊपर से हमला करने की क्षमता.

HEAT वारहेड (High Explosive Anti-Tank): यह वारहेड Explosive Reactive Armour (ERA) को भेदने में सक्षम है, जो कि आधुनिक टैंकों की सुरक्षा को पार करने के लिए जरूरी है.

रेंज:

  • NAG MK-1: अधिकतम 1.4 किलोमीटर
  • NAG MK-2: अब इसकी मारक क्षमता बढ़कर 7 से 10 किलोमीटर तक हो चुकी है.

ज़ोरावर टैंक: स्वदेशी हल्का योद्धा

NAG MK-2 का सफल परीक्षण भारत में विकसित ‘ज़ोरावर’ लाइट टैंक से किया गया. इसका डिज़ाइन DRDO के चेन्नई स्थित कॉम्बैट व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट (CVRDE) द्वारा तैयार किया गया है, और निर्माण में लार्सन एंड टुब्रो (L&T) की प्रमुख भूमिका रही है.

ज़ोरावर टैंक की खासियतें:

  • हल्का वजन: ऊबड़-खाबड़, पहाड़ी और ऊँचाई वाले इलाकों में तेजी से तैनाती संभव.
  • मोबिलिटी: रेगिस्तानी और हिमालयी इलाकों में भी आसानी से चल सकता है.
  • स्वदेशी निर्माण: भारत के सार्वजनिक और निजी रक्षा क्षेत्र के बीच बेहतरीन समन्वय का उदाहरण.
  • मॉड्यूलर डिज़ाइन: भविष्य में अन्य हथियार प्रणालियों को जोड़ने की क्षमता.

परीक्षण में मिली पूरी सफलता

परीक्षण के दौरान ज़ोरावर टैंक से लॉन्च की गई NAG MK-2 मिसाइल ने अपने सभी चरणों में सटीक निशाना लगाया. मिसाइल ने डायरेक्ट और टॉप अटैक मोड में दोनों ही स्थितियों में टारगेट को पूरी तरह तबाह किया.

DRDO अधिकारियों ने बताया कि मिसाइल की गाइडेंस, लक्ष्य पहचान, वारहेड प्रभावशीलता और फायरिंग स्थिरता, सभी मापदंडों पर यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा.

तकनीकी: MK-1 से MK-2 की छलांग

पहले से मौजूद NAG MK-1 मिसाइल की तुलना में MK-2 वर्जन में कई सुधार और अपग्रेड किए गए हैं. इनमें शामिल हैं:

बेहतर इन्फ्रारेड सीकर: जिससे दुश्मन के टैंक को दिन या रात में आसानी से पहचाना जा सके.

उन्नत गाइडेंस सिस्टम: युद्ध के समय चलती हुई वस्तुओं को भी सटीकता से ट्रैक कर पाना.

बढ़ी हुई आर्मर पेनिट्रेशन क्षमता: जिससे अत्यधिक सुरक्षा वाले टैंकों को भी खत्म किया जा सके.

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