TMC Kakoli Ghosh Resignation: पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर लगातार हलचल देखने को मिल रही है. अब पार्टी सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात संसदीय जिले के AITC जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस फैसले ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
हाल ही में केंद्र सरकार ने काकोली घोष को Y कैटेगिरी की सुरक्षा प्रदान की थी. इससे पहले उन्हें लोकसभा में चीफ व्हिप के पद से भी हटाया गया था और यह जिम्मेदारी दोबारा कल्याण बनर्जी को सौंप दी गई थी. माना जा रहा है कि पार्टी के इस फैसले से काकोली नाराज चल रही थीं.
ममता बनर्जी की करीबी मानी जाती थीं काकोली
काकोली घोष दस्तीदार को लंबे समय से ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है. ऐसे में उनका पार्टी के अहम संगठनात्मक पद से इस्तीफा देना टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. राजनीतिक हलकों में इसे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
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— News Algebra (@NewsAlgebraIND) May 24, 2026
TMC MP Kakoli Ghosh Dastidar resigns from the post of president of the TMC Barasat district committee.
Setback for TMC !! pic.twitter.com/0Ee5YTcmvY
इस्तीफे में अपराध और भ्रष्टाचार का जिक्र
काकोली घोष ने अपने इस्तीफे के साथ पार्टी नेतृत्व को एक पत्र भी सौंपा है. इस पत्र में उन्होंने पश्चिम बंगाल में बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर चिंता जताई. उन्होंने लिखा कि हाल के दिनों में राज्य में ऐसी घटनाओं की वजह से लोगों के बीच डर का माहौल बना है.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए राजनीति में जवाबदेही, साफ-सफाई, शालीनता और लोगों के प्रति प्रतिबद्धता बेहद जरूरी है. काकोली ने अपने पत्र में यह भी लिखा कि समाज में भरोसा और स्वस्थ राजनीतिक माहौल केवल आदर्शवादी राजनीति से ही मजबूत किया जा सकता है.
चुनावी नतीजों की ली नैतिक जिम्मेदारी
काकोली घोष ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों को भी अपने इस्तीफे की एक बड़ी वजह बताया. उन्होंने कहा कि पार्टी को उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिले और इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए वह बारासात जिलाध्यक्ष पद छोड़ रही हैं.
अपने पत्र में उन्होंने ममता बनर्जी से अपील करते हुए कहा कि अगर पार्टी पहले की तरह ईमानदार, पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं के साथ काम करेगी, तो उसकी छवि फिर मजबूत हो सकती है.
टीएमसी के लिए बढ़ सकती है परेशानी
काकोली घोष का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब पार्टी पहले से ही चुनावी हार और अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है. ऐसे में उनका यह कदम टीएमसी नेतृत्व के लिए नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर सकता है.
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