हिंदी सिनेमा का चमकता सितारा, दिलों पर राज करने वाला जिंदादिल इंसान धर्मेंद्र अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी गर्मजोशी, उनकी मुस्कान और उनकी सादगी हमेशा महसूस होती रहेगी. 24 नवंबर को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन जाते-जाते भी वे लोगों के चेहरों पर मुस्कान छोड़ गए.
पर्दे पर एक्शन हो या रोमांस, और जिंदगी में दोस्ती हो या अपनापन धर्मेंद्र ने हर भूमिका पूरे दिल से निभाई. फिल्मी दुनिया के बाहर भी उन्होंने अपनी भावनाओं, अपने बचपन और अपनी मिट्टी से जुड़ाव को कविताओं के माध्यम से अमर कर दिया था. इसी काव्यात्मक आत्मा को फिल्म ‘इक्कीस’ के मेकर्स ने बड़े सम्मान के साथ एक खूबसूरत ट्रिब्यूट में पिरोया है.
फिल्म ‘इक्कीस’ में गूंजती धर्मेंद्र की आवाज और एक भावुक कविता
मैडॉक फिल्म्स ने अपने सोशल मीडिया पर एक बेहद खास वीडियो साझा किया है, जिसमें धर्मेंद्र की लिखी और उनकी आवाज में रिकॉर्ड की गई पंजाबी कविता सुनाई देती है. यह कविता सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि उनके दिल की गहराइयों में बसी यादों की एक यात्रा है. कविता में धर्मेंद्र अपने गांव, अपनी मिट्टी, अपने बचपन और अपनी मां के आंचल की उस गर्माहट को याद करते हैं जो उन्हें बार-बार खींचकर अतीत में ले जाती है.
"Aj bhi ji karda hai, pind apne nu jaanwa.”
— Maddockfilms (@MaddockFilms) November 28, 2025
Dharam Ji was a true son of the soil, and his words carry the essence of that soil. ❤️
This poem by him is a yearning; a tribute from one legend to another.
Thank you for gifting us this timeless verse.🙏#Ikkis in cinemas worldwide… pic.twitter.com/3uWtA9C5Bh
कविता की कुछ पंक्तियां
"आज भी मन करता है… अपने गांव जाऊं, तालाब में घुसकर भैंसों को नहलाऊं…हंसिया लेकर खेतों से चारा भी लाऊं…मां की गोद को मन से कैसे भुलाऊं…" ये पंक्तियां सुनकर लगता है जैसे धर्मेंद्र आज भी अपने गांव की गलियों में खिलखिलाते बच्चे की तरह दौड़ रहे हों. उनके शब्दों में मिट्टी की वह सोंधी खुशबू है, जिसे वे जिंदगीभर अपने साथ लेकर चले.
इमोशनल ट्रिब्यूट में आसरानी भी नज़र आए
इस वीडियो में धर्मेंद्र के साथ दिग्गज अभिनेता गोवर्धन आसरानी भी दिखाई देते हैं, जिनका 20 अक्टूबर को निधन हुआ था. दिलचस्प बात यह है कि धर्मेंद्र और आसरानी दोनों ने क्लासिक फिल्म ‘शोले’ में साथ काम किया था. दो महान कलाकारों को इस तरह एक ही फ्रेम में, एक अंतिम बार देखना दर्शकों के लिए बेहद भावुक पल बन गया है. मेकर्स ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा "धरम जी मिट्टी के सच्चे बेटे थे. उनकी यह कविता एक तड़प है. एक लेजेंड से दूसरे लेजेंड के लिए ट्रिब्यूट."
धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म: ‘इक्कीस’ की कहानी क्या है?
‘इक्कीस’ धर्मेंद्र की अंतिम फिल्म है, जो भारत के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की सच्ची कहानी पर आधारित है. फिल्म में धर्मेंद्र, अरुण खेत्रपाल के पिता की भूमिका निभा रहे हैं. यह फिल्म युद्ध, साहस, त्याग और एक पिता–बेटे के गहरे रिश्ते की मार्मिक कहानी बयां करती है. इस फिल्म का निर्देशन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता श्रीराम राघवन ने किया है, जो अपनी गहरी, संजीदा और दमदार कहानी कहने की कला के लिए जाने जाते हैं.
धर्मेंद्र हमेशा याद आएंगे अपने अभिनय से, अपनी इंसानियत से और अपनी कविताओं से
धर्मेंद्र सिर्फ एक स्टार नहीं थे, वे भावनाओं के कलाकार थे. उनकी कविताएं बताती हैं कि वे अंदर से कितने सरल, संवेदनशील और धरती से जुड़े हुए इंसान थे. ‘इक्कीस’ में उनकी लिखी कविता को शामिल करना, उन्हें दिया गया वह सम्मान है जो आने वाली पीढ़ियों को उनकी आत्मा के असली रूप से रूबरू कराएगा.
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