Dev Arastu Panchariya Exclusive Interview: जब कोई शख्स अपनी पहचान सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित न रखे... जब विज्ञान के जटिल सिद्धांतों से लेकर गणित की गहराइयों, अर्थशास्त्र की बारीकियों और दर्शन के गंभीर प्रश्नों तक उसकी सोच का विस्तार हो, तब उसे एक बहुविषयक व्यक्तित्व कहा जाता है. ऐसा ही एक नाम है, देव अरस्तु पंचारिया. बीकानेर के प्रतिभाशाली वैज्ञानिक, PHYSICIST, MATHEMATICIAN और विचारक जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. देव अरस्तु को यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड ने नेक्सस फोरम इवेंट में INVITE किया था, जहां उन्होंने अपनी रिसर्च के बारे में पूरी दुनिया को बताया तो अरस्तु दुनिया के सबसे YOUGEST स्पीकर बने. जिन्होंने ऑक्सफोर्ड में ये कीर्तिमान बनाया है.
इतना ही नहीं उनकी रिसर्च पर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के निदेशक और दुनिया के जाने माने वैज्ञानिक प्रोफेसर जेथ्रो एक्रॉयड ने देव अरस्तु पंचारिया की जमकर सराहना की. इसके साथ ही ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के मैथमेटिकल इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर नाइजेल हिचिन, ऑक्सफोर्ड के एनवायरनमेंटल चेंज इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर प्रोफेसर माइकल ओबरस्टाइनर ने भी उनसे मुलाक़ात की. हमारी संवाददाता पूर्णिमा मिश्रा ने देव अरस्तु पंचारिया से खास बातचीत की है.
सवाल: आप ऑक्सफोर्ड पहुंचे और डायरेक्टर ऑफ कैंब्रिज ने आपके बारे में एक ऐसी बात कही, "वि वाज आई थिंक इंस्पिरेशनल फॉर मेनी यूथ्स. सो फर्स्ट ऑफ़ ऑल लेट्स डिकोड व्हाट ही सेड एंड व्हाई ही सेड."
जवाब: मैंने हाल ही में ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में भाषण दिया. एक नेक्सस फोरम जो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ऑर्गेनाइज करता है उसमें मुझको आमंत्रित किया कि मैं वहां अपने किसी रिसर्च को लेकर के भाषण दूं तो मेरा लेक्चर था और इट वाज़ आल्सो अ ड्रीम ड्रीम कमिंग ट्रू और जहां तक यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैमब्रिज के डायरेक्टर की बात है तो डॉक्टर ज़थ रॉयड आई मीन मैं खुद उनके बारे में बहुत पढ़ा है. सिंस माय चाइल्डहुड डेज बहुत पढ़ा है. और एक रिसर्च को लेकर उन्होंने बात की और मेरे टॉक को लेकर. वैसे हमारी ऑफ मेरे लेक्चर के बाद में हमारी काफी गुफ्तगू रही और ये बड़प्पन है उनका महानता है उनकी कि उन्होंने मेरे लिए कुछ शब्द कहे मेरे काम को लेकर कहे तो यकीन करना मेरे लिए उस वक्त मुश्किल था हम मगर अफसोस की बात है कि मेरे सेंस इतने काम करते ही मुझे यकीन करना पड़ा.
सवाल: साइंस और टेक्नोलॉजी ये दो ऐसी चीज हैं जो इस बदलते जमाने में साथ-साथ चल रही हैं और बहुत बेहतरी के साथ चल रही हैं. आपका रिसर्च वर्क इस पर बेस्ड है. कैसे आपने साइंस और टेक्नोलॉजी का एक सामंजस्य एक तालमेल बैठाया है. भारत में रिसर्च पर और ज्यादा क्या फोकस पॉइंट रहने चाहिए कि हम टेक्नोलॉजी और इसके साथ साइंस को और बेहतर कर सकें.
जवाब: इसके दो उत्तर हैं मेरे पास. एक उत्तर है कि हम रिसर्च में क्या कर सकते हैं? तो बहुत से इंस्टिटशंस हैं हिंदुस्तान में जो बेहतर काम कर रहे हैं. ये एक जग जाहिर बात है कि क्या नए काम होने चाहिए. हम क्वांटम टेक्नोलॉजीस को एक्सप्लोर कर सकते हैं. हम थ्योरेटिकल साइंस में देखें तो हम क्वांटम ग्रेविटी जैसी चीजों को कर सकते हैं. एक मुल्क के तौर पर जो हम कर सकते हैं वह है अह पब्लिक में अवेयरनेस जो है जितने भी बौद्धिक क्षेत्र हैं उनको लेकर के वो ज्यादा मायने रखती है क्योंकि वो आपके कंट्री को अपलिफ्ट करती है. विश्व गुरु बनना है तो देखिए हिंदुस्तान या कोई भी मुल्क वो लोग मिलके बनाते हैं. बाकी तो इमारतें और मिट्टी है. इसके अलावा और कुछ भी नहीं. तो उसके लिए जरूरी यह है कि वह लोग समझ में बेहद काबिल हो. हम काबिल होना सिर्फ एक बड़ी इमारत में बसना नहीं है. अपने विचारों की वो इमारत बनाना है जो आपके मुल्क को और इस जिस सदी में आप पैदा हुए हैं उस सदी में कुछ कर पाए. वह काबिलियत एक आम नागरिक में पैदा होनी बड़ी जरूरी है.
सवाल: आपने बहुत पहले सोचा कि मुझे बहुत सारी चीजें बदलनी है या मुझे कुछ अलग करना है. मुझे आउट ऑफ द बॉक्स करना है. आपकी थिंकिंग हमेशा से बहुत अलग रही है. इससे भी ज़रूरी बात यह है कि मैंने आपके बारे में बीकानेर से ऑक्सफ़ोर्ड तक के सफ़र के बारे में सुना है. यह सब कैसे हुआ?
जवाब: तर्क इस बात की संगति नहीं देगा कि एक तकरीबन 3000 की आबादी में एक गांव में पैदा हुआ एक इंसान ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में लेक्चर देगा. तर्क इस बात को नहीं मानता. मगर चमत्कार इस बात को मानता है. अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा था कि जिंदगी जीने के सिर्फ दो ही तरीके हैं. या तो आप यह मान लें कि चमत्कार कुछ नहीं होता. और या आप यह मान लें कि चमत्कार के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है. मैं दूसरी बात मानने वाला इंसान हूं. अपने केस में पर्टिकुलरली हम तो मेरे पास वो कोई रोड मैप नहीं है यह बताने का कि ऐसा कैसे हो गया. बस यह हो गया.
चमत्कार की परिभाषा ये है वो किया नहीं जाता. वो हो जाता है. जादू और चमत्कार मैजिक और मिरेकल में इतना ही फर्क है कि मैजिक किया जाता है और मिरेकल हो जाता है. बेटर एक कॉमन एडवाइस है कि आप अपना काम पूरी ईमानदारी और लगन से करते हैं. बाद में जो होगा एक्सीलेंस को जो परफेक्शन में तब्दील कर देता है वो चमत्कार होता है. तो वह जो कन्वर्जन है वो फिर शायद अपने आप हो जाएगा. लेकिन एक्सीलेंस को चस करना पहले जरूरी है. अगर एक्सीलेंस को चस करने के प्रोसेस में अगर चमत्कार है, मिरेकल है तो वो परफेक्शन में तब्दील हो जाएगा.
सवाल: अभी आप बहुत सारी चीजों पर काम कर रहे हैं. समझने की कोशिश कर रहे हैं. बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जिन्हें आप तलाशने की कोशिश कर रहे हैं. अगले पांच सालों के लिए आपका क्या प्लान है?
जवाब: आमतौर पर इस प्रश्न का बेहद पारंपरिक कन्वेंशनल आंसर बनता है. मगर मेरे पास इसका एक दूसरा उत्तर है. और वो उत्तर निकल के आता है लगभग सवा सौ साल पहले एक कही गई बात से. मैं फिर से अल्बर्ट आइंस्टीन की बात दोहराऊंगा. उन्होंने कहा था कि अगर आप भगवान को हंसाना चाहते हैं, तो उन्हें अपने भविष्य की योजनाएं बताएं. अगर आप ईश्वर को हंसाना चाहते हैं, तो अपने भविष्य की जितनी भी विचारधारा है वो सोच लीजिए और यकीन मानिए मेरा ऐसा कोई इंटरेस्ट नहीं है. तो, मेरा उसे हंसाने का कोई इरादा नहीं है. मैं आपको एक बात बता सकता हूं और यह बात न सिर्फ़ अगले पांच सालों के लिए, बल्कि मेरी पूरी ज़िंदगी के लिए लागू होती है और वह है सच का पता लगाना और उस चीज़ को जानना जिसे जाना नहीं जा सकता. बस यही.
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