Dev Anand का पहला इश्क कैसे रह गया अधूरा, काला कोट पहनने पर क्यों लगी थी रोक? जानिये एक्टर के बारे में 10 रोचक बातें

Dev Anand 100 Birth Anniversary: लाखों-करोड़ों लड़कियों के दिलों पर राज करने वाले सदाबहार एक्टर देव आनंद के बारे में कहा जाता है  कि उनकी फिल्म ‘काला पानी’ रिलीज होने के बाद कोर्ट ने आदेश जारी कर दिया था कि अब से देव आनंद काला कोट नहीं पहेंनेगे

Dev Anand का पहला इश्क कैसे रह गया अधूरा, काला कोट पहनने पर क्यों लगी थी रोक? जानिये एक्टर के बारे में 10 रोचक बातें

सदाबहार अभिनेता देव आनंद का आज जन्मदिन/जयंती है. अगर वह आज जिंदा होते तो 100वां जन्मदिन मना रहे होते. यह भी कम अहम बात नहीं कि लोगों के लिए दिलों में आज भी वह जिंदा हैं. उनके जन्मदिन पर हम यहां पर बता रहे हैं कि उनके बारे में 10 रोचक बातें:-

काला कोट पहनने पर थी रोक

लाखों-करोड़ों लड़कियों के दिलों पर राज करने वाले सदाबहार एक्टर देव आनंद के बारे में कहा जाता है  कि उनकी फिल्म ‘काला पानी’ रिलीज होने के बाद कोर्ट ने आदेश जारी कर दिया था कि अब से देव आनंद काला कोट नहीं पहेंनेगे. तर्क दिया था कि काले कोट में उन्हें देखकर युवतियां अपना आपा खो बैठती हैं और छत से छलांग लगाने लगती हैं, हालांकि इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है.

गरीबी से सदाबहार हीरो तक का सफर

बेहद साधारण परिवार से संबंध रखने वाले देव आनंद का जीवन संघर्षों से भरा रहा. ऐसा कहा जाता है कि माता-पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वे अपने बेटे देव आनंद को उच्च शिक्षा दिलवा पाते. यही वजह थी कि देव साहब को नौकरी ढूंढ़ने के लिए पंजाब से मुंबई आना पड़ा. इसके बाद उन्होंने अपने हुनर से इतिहास रच दिया.

सुरैया से किया इश्क, शादी तक न पहुंची बात

कहा जाता है कि फिल्म ‘विद्या’ की शूटिंग के दौरान एक्टर देव आनंद को को एक्ट्रेस सुरैया से प्यार हो गया. देव आनंद ने खुद माना है कि वह एक्ट्रेस सुरैया से बहुत प्यार करते थे, लेकिन धर्म अलग होने की वजह शादी मुमकिन नहीं हो सकी. यह भी माना जाता है कि प्यार अधूरा रह जाने के कारण ही सुरैया भी आजीवन कुवांरी ही रहीं. यह सारी जानकारी देव आनंद ने ऑटोबायोग्राफी रोमांसिंग विद लाइफ में लिखा है.

 30 रुपये लेकर आए थे मुंबई

बचपन से ही हैंडसम दिखने वाले देव आनंद एक्टर बनने का कोई इरादा लेकर मुंबई नहीं आए थे, यह अलग बात है उनके भाई चेतन आनंद पहले से मुंबई इंडस्ट्री में स्थापित थे, इसलिए थोड़ी मदद मिली. यह अलग बात है कि  देव आनंद को अभिनय करने का शौक तो बचपन से ही था. इस बीच अभाव के चलते पढ़ाई छूट गई तो नौकरी के सिलसिले में मुंबई आ गए. यह अलग बात है कि मुंबई आने के लिए उनकी जेब में महज 30 रुपये ही थे। 

 शुरुआती दौर में किया काफी स्ट्रगल

 पंजाब के गुरदासपुर में जन्में देव आनंद ने मुंबई आने के बाद शुरुआत में काफी स्ट्रगल किया. रहा और उनकी जेब में भी बहुत बड़ी रकम नहीं थी. देवा आनंद की आज 11वीं पुण्यतिथि (Death Anniversary)  के मौके पर आइए उनके संघर्ष के दिनों के बारे में जानते हैं.

 तंगी की वजह से छोड़नी पड़ी पढ़ाई

काफी पढ़े लिखे घराने से ताल्लुख रखने वाले देव आनंद के पिता एक वकील हुआ करते थे और जब वो लाहौर के एक गर्वमेंट स्कूल से अपनी एजुकेशन हासिल कर रहे थे तो वो अपने घर की माली हालत के चलते जितना पढ़ना चाहते थे उतनी पढ़ाई नहीं कर पाए थे और इसी वजह से उन्हें अपनी पढ़ाई को बीच में ही छोड़ना पड़ा.

 भूखे पेट गुजारीं कई रातें

कहा जाता है कि वह मुंबई आए थे कोई ठिकाना नहीं था,  इस दौरान कई रातें उन्हें फुटपाथ पर बितानी पड़ी और कई बार तो भूखे पेट ही सोना पड़ा. लेकिन यह संघर्ष काम आया और वह हर दौर के सदाबहार हीरो बनकर उभरे.

 
 मिलिट्री सेंसर ऑफिस में की नौकरी

संघर्ष के दिनों में देव आनंद को मिलिट्री सेंसर ऑफिस में नौकरी करनी पड़ी, यह दौर आगे भी जारी रही, जब तक कि वह फिल्मों में स्थापित नहीं हो गए. 

 फिल्म के सेट पर की शादी

देव आनंद के बारे में कहा जाता है कि  वर्ष 1954 में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान लंच ब्रेक में ही अपनी को-स्टार कल्पना कार्तिक से शादी कर ली थी, यह अलग बात है कि यह रिश्ता अधिक दिनों तक नहीं चला और दोनों अलग-अलग हो गए.

 बनाई राजनीतिक पार्टी

देव आनंद विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखने के लिए चर्चित थे. यही वजह है कि उन्होंने वर्ष  1977 में अपनी ही एक राजनीतिक पार्टी बना ली थी, इसमें रामानंद सागर के अलावा धर्मेंद, हेमामालिनी, संजीव कुमार, शत्रुघ्न सिन्हा समेत कई एक्टर भी शामिल हुए, लेकिन यह राजनीतिक दल अधिक दिनों तक नहीं चला. 

चार्जशीट थी आखिरी फिल्म

बतौर अभिनेता देव आनंद की अंतिम  फिल्म ‘चार्जशीट’ थी. उस समय वह 88 वर्ष के थे. यह कम हैरत की बात नहीं कि जीवन के आखिरी दिनों में भी वह सक्रिय रहे और लगातार कम करते रहे.

यहां पर बता दें कि 4 दिसंबर, 2011 को लंदन में दुनिया को अलविंद कह दिया.