राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है. दिवाली के एक सप्ताह बाद भी हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं दिख रहा है. मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 219 दर्ज किया गया, जो कि ‘खराब से बहुत खराब’ श्रेणी में आता है. इस स्तर की हवा में लंबे समय तक रहना फेफड़ों, हृदय और आंखों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है.
दिवाली के बाद भी हवा नहीं हुई साफ
दिवाली के बाद राजधानी में पटाखों, पराली जलने और कम हवा की गति ने मिलकर प्रदूषण को और बढ़ा दिया है. आमतौर पर त्योहार के कुछ दिनों बाद हवा साफ़ हो जाती है, लेकिन इस बार मौसम का रुख प्रदूषण के अनुकूल नहीं है.
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक मंगलवार को सुबह और शाम हल्की ठंड महसूस होगी, जबकि दिन में आसमान में आंशिक बादल छाए रहेंगे. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि हल्की बूंदाबांदी की संभावना है, लेकिन इतनी नहीं कि हवा को साफ कर सके.
कम हवा का दबाव और तापमान में गिरावट के कारण प्रदूषक कण (PM2.5 और PM10) जमीन के नज़दीक जमा हो रहे हैं, जिससे दिल्ली की हवा दमघोंटू बन गई है.
दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI)
विशेषज्ञों के अनुसार, PM 2.5 और PM 10 ही प्रदूषण के सबसे बड़े जिम्मेदार तत्व हैं. ये सूक्ष्म कण इतने छोटे होते हैं कि सीधे फेफड़ों और रक्त प्रवाह तक पहुंच जाते हैं. यही कारण है कि अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और दिल से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की तकलीफ इन दिनों बढ़ रही है.
तापमान और मौसम का हाल
मौसम विभाग ने बताया कि मंगलवार को दिल्ली में न्यूनतम तापमान 19°C और अधिकतम तापमान 28°C रहने की संभावना है. सुबह का तापमान करीब 23°C दर्ज किया गया, जबकि नमी का स्तर 78% तक पहुंच गया.
हवा की गति 6 से 7 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी, जो प्रदूषकों को फैलाने के लिए पर्याप्त नहीं है. इसी कारण शहर में घनी धुंध और धुआं (स्मॉग) छाया रहेगा, जिससे दृश्यता पर भी असर पड़ेगा.
IMD का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है, लेकिन इससे प्रदूषण के स्तर में ज्यादा बदलाव नहीं आएगा.
स्वास्थ्य पर खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि राजधानी की मौजूदा हवा संवेदनशील समूहों जैसे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के रोगियों के लिए अत्यधिक खतरनाक है. इस स्तर की हवा में लम्बे समय तक रहने से सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन, गले में खराश और सीने में जकड़न जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
AIIMS और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में सांस और फेफड़ों से जुड़ी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या में 20% तक वृद्धि दर्ज की गई है.
दिल्ली सरकार की तैयारी और कदम
साथ ही, सरकार ने 28 से 30 अक्टूबर के बीच कृत्रिम बारिश (Artificial Rain) कराने की योजना बनाई है, जिससे हवा में मौजूद कण नीचे बैठ सकें.
हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि कृत्रिम बारिश तभी असरदार होगी जब वायुमंडल में पर्याप्त नमी मौजूद हो, जो फिलहाल नहीं है.
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