Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में रविवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे ने राजधानी को झकझोर कर रख दिया. संकरी गली में बनी करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला जर्जर इमारत अचानक भरभराकर ढह गई. इमारत में लड़कों का पेइंग गेस्ट (PG) चल रहा था, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से आए छात्र रह रहे थे. हादसे के बाद मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई. अब तक 6 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 8 लोग घायल बताए जा रहे हैं. बचाव और राहत अभियान लगातार जारी है.
दिल्ली में सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने का CCTV सामने आया। इस हादसे में अब तक 6 छात्रों की मौत हो चुकी है, करीब 5 घायल हैं।
— Sachin Gupta (@Sachingupta) September 7, 2026
> बिल्डिंग मालिक आदित्य बंसल है। उस पर गैर इरादतन हत्या और लापरवाही की FIR हुई है।
> 2022 से 25 तक दिल्ली में बिल्डिंग गिरने की 1133 घटनाएं, इसमें 98 मौतें… pic.twitter.com/u8Epvylu9A
चंद सेकेंड में मलबे में तब्दील हुई पूरी इमारत
सत्य निकेतन की जिस इमारत में छात्र रह रहे थे, वह अचानक तेज आवाज के साथ ढह गई. देखते ही देखते पांच मंजिला इमारत मलबे के ढेर में बदल गई. हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास रहने वाले लोगों ने तुरंत बचाव अभियान में मदद शुरू कर दी. घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें इमारत के गिरने की भयावह तस्वीर कैद हुई है.
PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा पर उठे सवाल
सत्य निकेतन और इसके आसपास की संकरी गलियों में बड़ी संख्या में छात्र PG में रहते हैं. देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों के लिए यह इलाका रहने का प्रमुख केंद्र है. हादसे ने ऐसे PG और बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि इलाके में कई ऐसी इमारतें और PG संचालित हो रहे हैं, जिनके निर्माण या संचालन को लेकर नियमों की अनदेखी की जाती है.
छात्रों के परिवार हादसे के बाद से बेहद चिंतित हैं. कई परिजन अपने बच्चों से संपर्क करने की कोशिश करते रहे, लेकिन संपर्क नहीं हो पाने से उनकी चिंता और बढ़ गई. हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि छात्रों से किराया और PG शुल्क लेने वाली व्यवस्थाओं में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन सुनिश्चित करेगा.
इमारत मालिक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का केस
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में साउथ कैंपस थाने में इमारत के मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. पुलिस के मुताबिक आरोपियों पर गैर-इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने समेत अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है. पुलिस ने बताया कि इमारत का इस्तेमाल पेइंग गेस्ट के तौर पर किया जा रहा था. शुरुआती जांच में सामने आया है कि भूतल पर मरम्मत का काम चल रहा था और इसी दौरान इमारत ढह गई. आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं.
NDRF समेत कई एजेंसियां रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटीं
हादसे के बाद NDRF की दो टीमें मौके पर पहुंचीं. करीब 70 कर्मियों के साथ डॉग स्क्वॉड की मदद से मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है. दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, दिल्ली नगर निगम, कैट और नागरिक सुरक्षा की टीमें भी राहत और बचाव अभियान में लगी हुई हैं. स्थानीय लोगों ने भी रेस्क्यू टीमों के साथ मिलकर मलबा हटाने और दबे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की. हादसे के तुरंत बाद कई स्थानीय लोग अपने स्तर पर उपलब्ध औजारों और हाथों की मदद से मलबे में फंसे लोगों की तलाश करते दिखाई दिए.
मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचाई गई ऑक्सीजन
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे के नीचे किसी के जिंदा होने की संभावना को देखते हुए हर संभव कोशिश की जा रही है. NDRF के एक अधिकारी के मुताबिक, मलबे में फंसे लोगों को सांस लेने में मदद देने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर नीचे पहुंचाए गए हैं. मौके पर दमकल की गाड़ियां भी तैनात हैं. रेस्क्यू टीम बेहद सावधानी के साथ मलबे को हटाकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, क्योंकि किसी भी स्तर पर जल्दबाजी से बचाव अभियान में खतरा बढ़ सकता है.
मलबे के नीचे से फोन कर मदद मांग रहे थे छात्र
हादसे के बाद सामने आए वीडियो और तस्वीरों ने इसकी भयावहता को उजागर कर दिया है. बताया जा रहा है कि मलबे में फंसे कुछ छात्रों ने मोबाइल फोन के जरिए बाहर मौजूद लोगों से संपर्क कर मदद मांगी. ऐसे में रेस्क्यू टीमों के लिए हर गुजरता मिनट बेहद अहम है.
मुख्यमंत्री ने दिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
सत्य निकेतन हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं. अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि इमारत की हालत कैसी थी, उसमें मरम्मत का काम क्यों कराया जा रहा था और क्या निर्माण या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया गया था.
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