Malviya Nagar Fire: दिल्ली में हाल ही में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद प्रशासन अब पूरी तरह सख्त रुख में दिखाई दे रहा है. राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन को मजबूत करने के लिए बृहस्पतिवार से एक महीने का व्यापक प्रवर्तन एवं रोकथाम अभियान शुरू किया जा रहा है. इस अभियान का उद्देश्य उन सभी संस्थानों और भवनों पर शिकंजा कसना है जो नियमों की अनदेखी कर रहे हैं और आम जनता की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं.
एक महीने का सघन अभियान
दिल्ली सरकार के गृह विभाग को इस पूरे अभियान का नोडल विभाग बनाया गया है. यह विभाग सभी संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करेगा और अभियान की निगरानी करेगा. प्रशासनिक स्तर पर इसे बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है, यही कारण है कि मुख्य सचिव और पुलिस आयुक्त स्वयं इस पूरे एक महीने तक इसकी निगरानी करेंगे. सरकार का स्पष्ट संदेश है कि नियमों से समझौता करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा और जरूरत पड़ने पर सीलिंग की कार्रवाई भी तुरंत की जाएगी.
मालवीय नगर हादसे के बाद सख्ती
मालवीय नगर में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने दिल्ली प्रशासन को झकझोर दिया है. इसी घटना के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल और गृह मंत्री ने उच्च स्तरीय आपातकालीन समीक्षा बैठक कर हालात की विस्तृत समीक्षा की. इस बैठक में न सिर्फ हादसे की जांच के आदेश दिए गए बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मजबूत और सख्त एक्शन प्लान तैयार करने पर भी जोर दिया गया. प्रशासन ने इस मामले की मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया है, जो संबंधित जिला मजिस्ट्रेट की देखरेख में होगी.
शहरभर में फायर सेफ्टी पर सघन जांच अभियान
आगामी दिनों में दिल्ली के सभी होटलों, लॉज, गेस्ट हाउस, नर्सिंग होम, कोचिंग संस्थानों, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी नियमों की गहन जांच की जाएगी. इस प्रक्रिया में दिल्ली पुलिस, एमसीडी और पर्यटन विभाग मिलकर काम करेंगे. सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर भवन और संस्थान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करे और किसी भी तरह की लापरवाही को तुरंत रोका जाए.
अवैध निर्माण और नियम उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
बैठक में यह भी तय किया गया कि जिन होटलों या लॉज में तय क्षमता से अधिक कमरे पाए जाएंगे, उन्हें तुरंत बंद कराया जाएगा. नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी संस्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी और कानूनी प्रक्रिया भी तेज की जाएगी. इसके लिए डीएम, डीसीपी, एमसीडी और फायर विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाई गई है, जो जमीनी स्तर पर जांच कर सीधे कार्रवाई करेगी.
15 दिन का अल्टीमेटम और ऑडिट की प्रक्रिया
सरकार ने सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को 15 दिनों का समय दिया है ताकि वे अपने फायर सेफ्टी सिस्टम, पानी के टैंक और अन्य सुरक्षा उपकरणों को पूरी तरह दुरुस्त कर सकें. इसी के साथ बृहस्पतिवार से ही सभी भवनों का फायर ऑडिट शुरू कर दिया जाएगा. जो संस्थान इस अवधि में सुधार नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है.
जनता की भागीदारी और डिजिटल निगरानी पर जोर
फायर विभाग जल्द ही एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर और ईमेल सेवा शुरू करेगा, जहां नागरिक नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों की शिकायत दर्ज करा सकेंगे. इसके अलावा डिजिटल माध्यम से फायर सेफ्टी नियमों की जानकारी सभी आरडब्ल्यूए और व्यावसायिक भवनों तक पहुंचाई जाएगी.
राहत और पुनर्वास पर भी प्रशासन का फोकस
अग्निकांड से प्रभावित लोगों के लिए तत्काल राहत और सहायता के निर्देश भी जारी किए गए हैं. घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि मृतकों की पहचान के लिए डीएनए सैंपलिंग की प्रक्रिया अपनाई जा रही है. इसके साथ ही प्रशासन पीड़ित परिवारों और यदि विदेशी नागरिक शामिल हैं तो संबंधित दूतावासों से भी समन्वय कर रहा है. अंतिम संस्कार और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में भी सरकार सहायता प्रदान कर रही है.
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