Kanwar Yatra 2026: दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, कांवड़ समितियों को अब ₹15 लाख तक मिलेगा अनुदान

Kanwar Yatra 2026: श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और महंगाई को देखते हुए दिल्ली सरकार ने कांवड़ शिविरों के लिए अनुदान बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा.

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Kanwar Yatra 2026: सावन माह और कांवड़ यात्रा को लेकर दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है. हर साल बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या और शिविरों के संचालन पर बढ़ते खर्च को देखते हुए सरकार कांवड़ समितियों को मिलने वाली आर्थिक सहायता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करने जा रही है. सरकार का मानना है कि अतिरिक्त अनुदान मिलने से समितियां शिवभक्तों के लिए बेहतर भोजन, चिकित्सा, पेयजल, स्वच्छता और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा सकेंगी. इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए दिल्ली कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा.

बड़े कांवड़ शिविरों को मिलेगा पहले से ज्यादा अनुदान

सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, 20 हजार वर्गफुट से अधिक क्षेत्र में 6 से 12 दिनों तक संचालित होने वाले कांवड़ शिविरों को अब 11 लाख रुपये के बजाय 15 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी. वहीं, इसी श्रेणी के 3 से 5 दिन तक चलने वाले शिविरों के लिए अनुदान 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 9 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है. सरकार का कहना है कि बढ़ती महंगाई और सुविधाओं पर बढ़ रहे खर्च को देखते हुए यह संशोधन जरूरी हो गया था, ताकि बड़े शिविरों के संचालन में आर्थिक कठिनाइयों को कम किया जा सके.

हर श्रेणी के शिविरों के लिए बढ़ेगी सहायता राशि

अनुदान बढ़ोतरी केवल बड़े शिविरों तक सीमित नहीं रहेगी. 15,001 से 20,000 वर्गफुट क्षेत्र वाले शिविरों को भी पहले की तुलना में अधिक सहायता मिलेगी. इसी तरह 10,001 से 15,000 वर्गफुट और 5,001 से 10,000 वर्गफुट तक के शिविरों के लिए भी अलग-अलग अवधि के अनुसार अनुदान राशि बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. 5,000 वर्गफुट तक के छोटे कांवड़ शिविरों को भी पहले से अधिक आर्थिक सहायता देने की तैयारी है, जिससे छोटी समितियां भी श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं कर सकें.

लगातार बढ़ रही है कांवड़ शिविरों की संख्या

दिल्ली में कांवड़ यात्रा का दायरा हर साल तेजी से बढ़ रहा है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार वर्ष 2024 में राजधानी में 170 कांवड़ शिविर लगाए गए थे, जबकि 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 308 तक पहुंच गई. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ भोजन, चिकित्सा, बिजली, पानी और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च भी बढ़ा है. इसी कारण सरकार ने अनुदान राशि में संशोधन करने का फैसला लिया है.

मुफ्त बिजली की सुविधा रहेगी जारी

दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि पात्र कांवड़ समितियों को पहले की तरह 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी. बिजली वितरण कंपनियां यात्रा शुरू होने से पहले सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर समय पर कनेक्शन उपलब्ध कराएंगी. हालांकि यदि किसी शिविर की बिजली खपत निर्धारित सीमा से अधिक होती है, तो अतिरिक्त बिल संबंधित समिति को स्वयं वहन करना होगा.

अनुदान जारी करने की प्रक्रिया होगी आसान

इस बार सरकार भुगतान व्यवस्था को भी पहले से अधिक सरल बनाने जा रही है. अब अग्रिम और अंतिम दोनों किस्तें सीधे संबंधित जिलाधिकारी (DM) कार्यालय के माध्यम से जारी की जाएंगी. पहले हर भुगतान के लिए राजस्व मुख्यालय और वित्त विभाग से अलग-अलग मंजूरी लेनी पड़ती थी, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद समितियों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी और प्रक्रिया अधिक तेज होगी.

DBT के जरिए दो चरणों में पहुंचेगी राशि

सरकार पहले की तरह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था को जारी रखेगी. स्वीकृत अनुदान की पहली 50 प्रतिशत राशि अग्रिम दी जाएगी, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि यात्रा समाप्त होने के बाद सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने पर जारी की जाएगी. अंतिम भुगतान से पहले समितियों के दस्तावेजों, बैंक खातों, पंजीकरण और शिविरों का निरीक्षण किया जाएगा. एसडीएम और तहसीलदार जियो-टैग फोटो तथा सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर अंतिम मंजूरी देंगे.

सभी विभाग मिलकर संभालेंगे व्यवस्थाएं

दिल्ली सरकार ने इस बार भी सिंगल विंडो सिस्टम लागू रखने का फैसला किया है. नगर निगम सफाई, कूड़ा उठाने और फॉगिंग की जिम्मेदारी संभालेगा, जबकि स्वास्थ्य विभाग और सीएटीएस चौबीसों घंटे डॉक्टर, एम्बुलेंस और प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराएंगे. दिल्ली जल बोर्ड स्वच्छ पेयजल और जरूरत पड़ने पर पानी के टैंकर उपलब्ध कराएगा. डूसिब मोबाइल शौचालय और उनकी सफाई की व्यवस्था करेगा. वहीं बिजली वितरण कंपनियां निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी.

सुरक्षा और ट्रैफिक पर रहेगा विशेष फोकस

कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली पुलिस और ट्रैफिक पुलिस सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालेंगी. संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी और आवश्यकता के अनुसार ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े.

नई समितियों को नहीं मिलेगी मंजूरी

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2025 में जिन कांवड़ समितियों और शिविर स्थलों को अनुमति दी गई थी, उन्हीं को वर्ष 2026 में भी स्वीकृति देने की सिफारिश की गई है. इस बार किसी नई समिति या नए शिविर स्थल को मंजूरी देने का प्रस्ताव नहीं है. सरकार का कहना है कि बढ़ी हुई आर्थिक सहायता और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के माध्यम से कांवड़ यात्रा-2026 को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जाएगा. 

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