Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम एक बार फिर तेजी से बढ़े हैं. 11 सितंबर को ब्रेंट क्रूड की कीमत 108.07 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई. 25 मई के बाद यह पहली बार है, जब ब्रेंट इस स्तर पर पहुंचा है. वहीं WTI क्रूड भी बढ़कर 102.97 डॉलर प्रति बैरल हो गया. कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के पीछे कई वजहें हैं, जिनका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी मुश्किल
क्रूड की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है. हाल में ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइलें दागीं. इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष नवंबर में होने वाले मिड टर्म चुनावों के बाद ही खत्म होगा. दूसरी ओर, ईरान ने भी साफ कहा है कि अगर अमेरिका ने हमले जारी रखे तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा.
सऊदी अरब में तेल उत्पादन घटा
कच्चे तेल के दाम बढ़ने की एक वजह सऊदी अरब में उत्पादन में आई कमी भी है. हूती विद्रोहियों की धमकियों के कारण वहां क्रूड ऑयल का उत्पादन इस साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है. हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के पश्चिमी बंदरगाहों से गुजरने वाले तेल टैंकरों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है.
इसके अलावा दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातक चीन ने भी तेल की खरीद बढ़ा दी है. चीन की बढ़ी हुई मांग का असर भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों पर दिखाई दे रहा है.
भारत के लिए बढ़ सकती है परेशानी
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारत के लिए चिंता बढ़ा सकती है. भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है. ऐसे में क्रूड महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ जाएगा.
अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा सकती हैं. इसके साथ ही CNG और PNG की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है. इससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ने की संभावना है.