एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं. ताइवान को लेकर जापान की नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची का हालिया बयान चीन के लिए गहरी चुभन बन गया है. ताकाइची ने सार्वजनिक मंच पर कहा कि “ताइवान में संकट का मतलब जापान में संकट है,” और जरूरत पड़ने पर जापान सामूहिक आत्मरक्षा के नाम पर सैन्य कदम भी उठा सकता है.
इस बयान ने बीजिंग को बेहद नाराज कर दिया है और चीन की ओर से जवाबी चेतावनियों का सिलसिला शुरू हो गया है. PLA से लेकर सरकारी मीडिया तक, हर तरफ से जापान को “भयानक अंजाम” की चेतावनी दी जा रही है.
चीन की तीखी प्रतिक्रिया और लगातार जारी धमकियाँ
चीन की सेना PLA ने साफ कहा है कि अगर जापान ताइवान के मुद्दे पर गलत कदम उठाता है, तो उसे “असहनीय कीमत” चुकानी पड़ेगी. चीन के सरकारी अखबारों और टीवी चैनलों में भी जापान के खिलाफ लगातार बयानबाज़ी हो रही है. ग्लोबल टाइम्स ने रविवार को तीन अलग-अलग लेखों में दावा किया कि चीन जापान के खिलाफ “ठोस जवाबी कार्रवाई” की पूरी तैयारी कर चुका है. CCTV से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट ने भी यह चेतावनी दी कि ताकाइची की “भड़काऊ टिप्पणी” के बाद चीन का धैर्य अब खत्म होता दिख रहा है.
बयान के बाद चीन की कूटनीतिक और सैन्य हलचल
जापान की प्रधानमंत्री के ताइवान पर दिए गए बयान के बाद बीजिंग में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए गए. चीन ने अपने उप विदेश मंत्री सुन वेइदोंग के जरिए जापान के राजदूत को तत्काल तलब किया और कड़ा विरोध दर्ज कराया. विदेश मंत्रालय ने जापान की हालिया सैन्य गतिविधियों पर कई तीखे सवाल उठाए. राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने भी यह चेतावनी दोहराई कि यदि जापान ताइवान में सैन्य हस्तक्षेप करता है तो PLA उसकी “कड़ी हार सुनिश्चित करेगी.” इसके साथ ही, चीन के दूतावास ने जापानी अधिकारियों के साथ विशेष बैठकें कर अपना गुस्सा सीधे तौर पर दर्ज कराया. PLA डेली ने भी अपने मुखपृष्ठ पर जापान को युद्ध जैसी चेतावनी देते हुए लिखा कि जलडमरूमध्य में किसी भी हस्तक्षेप की कीमत बहुत भारी होगी.
चीन के सरकारी मीडिया की भाषा और बढ़ती आक्रामकता
चीन के मीडिया ने अपने लेखों और संपादकीय में जापान को कठोर शब्दों में चेताया है. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि चीनी लोगों के साथ “खिलवाड़” नहीं किया जा सकता. लेख में यह भी कहा गया कि जिस चीन ने दूसरे विश्वयुद्ध में कम संसाधनों के बावजूद जापानी आक्रमण को झेला और मुकाबला किया था, आज वह पहले से कहीं अधिक सक्षम है. मीडिया में यह संदेश लगातार दोहराया जा रहा है कि ताइवान किसी भी बाहरी सैन्य हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा और जापान को अपनी सीमा समझनी चाहिए. चीन का कहना है कि गलत कदम उठाकर जापान पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है.
ताइवान संकट पर एशिया का बदलता समीकरण
साने ताकाइची का यह बयान एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों में एक बड़ा बदलाव संकेत करता है. जापान पहले ही अपनी सैन्य क्षमताओं में भारी निवेश कर रहा है और अब ताइवान का खुलकर समर्थन करना चीन को असहज कर रहा है. ताइवान जलडमरूमध्य पहले ही दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है. ऐसे में जापान के इस नए रुख से चीन की चिंताएँ और गहरी हो गई हैं. बीजिंग इसे अपनी संप्रभुता के लिए सीधी चुनौती मान रहा है.
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