चीन ने अपने HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर बड़ा दावा किया है. चीन के मुताबिक, उसके इस सिस्टम ने एक अभ्यास के दौरान दो बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक हवा में ही रोक दिया. खास बात यह है कि इनमें से एक मिसाइल उड़ान के बीच अचानक अपना रास्ता बदल रही थी. चीन का यह दावा ऐसे समय में आया है, जब भारत ने पिछले दो दिनों में दो बार अपनी प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है.
भारत की प्रलय मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत भी यही है कि यह उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है. इस तकनीक की वजह से दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना मुश्किल हो सकता है. इसकी तुलना ईरान की सेजिल-2 जैसी डांसिंग मिसाइल से भी की जाती है. ऐसे में चीन के HQ-9B सिस्टम का यह दावा भारत के लिए भी अहम माना जा रहा है.
चीन ने डांसिंग मिसाइल को रोकने का किया दावा
चीन के सरकारी चैनल चाइना सेंट्रल टेलीविजन (CCTV) की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल थिएटर कमांड एयरफोर्स की एयर डिफेंस यूनिट ने एक सैन्य अभ्यास किया था. इस दौरान HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का दावा किया गया.
अभ्यास के जारी वीडियो में दिखाया गया कि अलग-अलग दिशाओं से मिसाइलों के आने की चेतावनी मिलने के बाद एयर डिफेंस यूनिट ने कार्रवाई की. इनमें एक सामान्य बैलिस्टिक मिसाइल थी, जबकि दूसरी उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल रही थी. चीन का दावा है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने दोनों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया.
हालांकि, CCTV की शुरुआती रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए एयर डिफेंस सिस्टम का नाम नहीं बताया गया था. बाद में चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया कि इस अभ्यास में HQ-9B सिस्टम का इस्तेमाल हुआ था. रिपोर्ट में यह जानकारी भी नहीं दी गई कि यह अभ्यास कब और कहां किया गया.
कितना ताकतवर है चीन का HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम?
HQ-9B चीन का लंबी दूरी का जमीन से हवा में मार करने वाला एयर डिफेंस सिस्टम है. यह चीन के पुराने HQ-9 सिस्टम का आधुनिक रूप है. इसे रूसी S-300 एयर डिफेंस सिस्टम की तकनीक के आधार पर विकसित किया गया है.
इस सिस्टम की रेंज करीब 250 से 260 किलोमीटर बताई जाती है. यह लगभग 50 किलोमीटर की ऊंचाई तक हवाई लक्ष्यों को निशाना बना सकता है.
HQ-9B में एक्टिव रडार होमिंग के साथ पैसिव इंफ्रारेड सीकर भी लगाया गया है. इसकी मदद से यह कम दिखाई देने वाले हवाई लक्ष्यों को पहचानने और दुश्मन की रडार जैमिंग का सामना करने में सक्षम माना जाता है.
चीन ने इस एयर डिफेंस सिस्टम और इसके अलग-अलग वेरिएंट का निर्यात भी किया है. पाकिस्तान और अजरबैजान को भी चीन ने यह सिस्टम दिया है. भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए HQ-9B सिस्टम को नष्ट करने का दावा किया था.
कई देशों में तैनात है चीन का एयर डिफेंस सिस्टम
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, HQ-9B चीन की हवाई सुरक्षा का अहम हिस्सा है और यह पूरी तरह ऑपरेशनल है. इसके अलग-अलग वेरिएंट दूसरे देशों को भी बेचे गए हैं.
चीन का दावा है कि यह सिस्टम अलग-अलग तरह के हवाई खतरों से निपट सकता है. इसमें बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की क्षमता भी शामिल है. हालांकि, उड़ान के दौरान रास्ता बदलने वाली मिसाइल को रोकने के चीन के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
भारत की प्रलय मिसाइल में क्या है खास?
भारत की प्रलय मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित सतह से सतह पर मार करने वाली क्वासी बैलिस्टिक मिसाइल है. इसकी मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर तक है. यह अलग-अलग वजन के पेलोड के साथ हमला करने में सक्षम है.
प्रलय मिसाइल करीब 1000 किलोग्राम का पेलोड 350 किलोमीटर तक और 500 किलोग्राम का पेलोड 500 किलोमीटर तक ले जा सकती है.
इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसका उड़ान का तरीका है. सामान्य बैलिस्टिक मिसाइलों की तरह यह केवल एक तय रास्ते पर नहीं चलती, बल्कि कम ऊंचाई पर उड़ान भर सकती है. इसके साथ ही उड़ान के बीच में अपना रास्ता बदलने की क्षमता भी रखती है.
इस वजह से दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसकी दिशा और संभावित निशाने का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है. यही कारण है कि प्रलय को भारत की अहम सामरिक मिसाइलों में गिना जाता है.
क्या HQ-9B रोक पाएगा भारत की प्रलय मिसाइल?
चीन के HQ-9B सिस्टम ने रास्ता बदलने वाली मिसाइल को रोकने का दावा जरूर किया है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि वह हर तरह की क्वासी बैलिस्टिक मिसाइल को भी रोक सकता है. प्रलय जैसी मिसाइलों की गति, उड़ान की ऊंचाई और बीच रास्ते में दिशा बदलने की क्षमता उन्हें रोकना चुनौतीपूर्ण बना सकती है.
ऐसे में चीन के इस दावे को भारत की प्रलय मिसाइल के खिलाफ उसकी क्षमता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता. असल चुनौती किसी वास्तविक सैन्य स्थिति में सामने आएगी, जहां मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमताओं का आमना-सामना होगा.