Chamoli Tunnel Accident: उत्तराखंड के पहाड़ी जिले चमोली में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने राहत और बचाव एजेंसियों की चुनौती बढ़ा दी. पीपलकोटी में निर्माणाधीन विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग के भीतर अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी घुस गया. हादसे के वक्त सुरंग में काम कर रहे करीब 22 मजदूर इसकी चपेट में आ गए. घटना के बाद पूरी रात राहत और बचाव अभियान चलाया गया. अब तक कई मजदूरों को बाहर निकाला जा चुका है, लेकिन हादसे में मौतों और घायलों की संख्या ने चिंता बढ़ा दी है. सुरंग में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए NDRF, SDRF और अन्य बचाव दल लगातार प्रयास कर रहे हैं.
पीपलकोटी स्थित THDC टनल के भीतर मलबा एवं पानी आने की सूचना प्राप्त हुई है।
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 13, 2026
घटना की गंभीरता को देखते हुए @NDRFHQ और @uksdrf की टीमों को तत्काल मौके पर भेजा गया है। जिला प्रशासन सहित सभी संबंधित एजेंसियों को युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
स्वयं भी…
करीब 22 मजदूर सुरंग के अंदर थे मौजूद
जानकारी के मुताबिक, घटना के समय विष्णुगाड़-पीपलकोटी हाइड्रो प्रोजेक्ट की टनल में करीब 22 मजदूर काम कर रहे थे. अचानक सुरंग के भीतर एक कैविटी से तेज बहाव के साथ पानी और मलबा आने लगा. देखते ही देखते रास्ता बाधित हो गया और मजदूर अंदर फंस गए.
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों को सक्रिय किया गया. शुरुआती रेस्क्यू के दौरान कई मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. हालांकि, इस हादसे में अब तक 7 मजदूरों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 14 लोग घायल बताए जा रहे हैं. घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है.
टनल के भीतर 1.8 किलोमीटर अंदर हुआ हादसा
चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पवार के अनुसार, यह घटना शाम करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच हुई. जिस स्थान पर पानी और मलबा आया, वह टनल के प्रवेश द्वार से लगभग 1.5 किलोमीटर अंदर बताया जा रहा है. वहीं, सुरंग के भीतर करीब 1.8 किलोमीटर अंदर मौजूद एक कैविटी से अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी बाहर आने की बात सामने आई है.
पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण के दौरान जमीन के भीतर मौजूद प्राकृतिक जलस्रोत और कमजोर चट्टानी हिस्से कई बार चुनौती पैदा करते हैं. इस घटना में भी अचानक पानी और मलबे के तेज बहाव ने बचाव कार्य को मुश्किल बना दिया.
पानी और कीचड़ बढ़ने से रेस्क्यू में आई मुश्किल
हादसे के बाद बचाव दलों ने सुरंग के अंदर पहुंचकर मजदूरों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया. मलबे को हटाने के लिए भारी मशीनरी मौके पर लगाई गई है. साथ ही सुरंग के भीतर जमा पानी को बाहर निकालने के लिए तीन बड़े पंप लगाए गए हैं.
हालांकि, सुरंग के अंदर पानी और कीचड़ बढ़ने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में लगातार मुश्किलें आ रही हैं. बचावकर्मी बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ रहे हैं, क्योंकि सुरंग के भीतर परिस्थितियां पूरी तरह सामान्य नहीं हैं. ताजा जानकारी के अनुसार, टीम ने दो लोगों को ट्रेस किया है और उन्हें बाहर निकालने के प्रयास जारी हैं.
कई घायल मजदूरों की हालत गंभीर
रेस्क्यू कर बाहर निकाले गए मजदूरों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है. जानकारी के अनुसार, करीब 3 से 4 घायल मजदूरों की स्थिति चिंताजनक है. सभी घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचाया गया है.
प्रशासन की ओर से गंभीर रूप से घायल लोगों को जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा केंद्र भेजने की व्यवस्था भी की गई है. हादसे में घायल मजदूरों को तत्काल मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी अलर्ट रखा गया है.
बिहार, झारखंड और अन्य राज्यों के मजदूर भी शामिल
इस हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों में उत्तराखंड के टिहरी और चमोली जिले के निवासी भी शामिल बताए जा रहे हैं. वहीं, अन्य मृतकों के बिहार और झारखंड से होने की जानकारी सामने आई है.
घायलों में भी बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के मजदूरों की संख्या अधिक बताई गई है. इसके अलावा पंजाब और हिमाचल प्रदेश के रहने वाले मजदूर भी प्रभावित हुए हैं. अलग-अलग राज्यों से रोजी-रोटी के लिए उत्तराखंड पहुंचे मजदूर इस हादसे की चपेट में आ गए.
SDRF और NDRF की टीमें मौके पर जुटीं
घटना की गंभीरता को देखते हुए SDRF और NDRF की टीमों को तत्काल मौके पर भेजा गया. बचाव दलों के साथ परियोजना से जुड़ी टीमें और प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.
मलबे को हटाने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. टनल से पानी निकालने के लिए पंप लगातार चलाए जा रहे हैं. बचावकर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के भीतर सुरक्षित रास्ता बनाना और फंसे मजदूरों तक जल्द से जल्द पहुंचना है.
मुख्यमंत्री धामी ने लिया रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा
हादसे की जानकारी मिलते ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर में उच्चस्तरीय बैठक की. उन्होंने अधिकारियों से राहत और बचाव अभियान की पूरी जानकारी ली और निर्देश दिया कि रेस्क्यू में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता सुरंग के भीतर फंसे हर व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है. उन्होंने प्रशासन, NDRF, SDRF और अन्य राहत एजेंसियों को पूरी क्षमता के साथ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं.
बारिश के बीच चमोली में पहले भी बिगड़े हालात
चमोली में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुककर बारिश हो रही है. पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण नदियों और बरसाती नालों में अचानक पानी बढ़ने का खतरा बना रहता है. इससे पहले सोमवार को भारी बारिश के बाद तमक नाला भी उफान पर आ गया था.
तेज बहाव के कारण सीमा सड़क संगठन की ओर से हाल ही में बनाया गया लोहे का पुल बह गया था. इस घटना से इलाके में आवागमन प्रभावित हुआ और स्थानीय लोगों के सामने भी मुश्किलें खड़ी हो गई थीं. बाढ़ के पानी ने किसानों की सेब की फसल को भी नुकसान पहुंचाया था.
पहाड़ों में बारिश ने बढ़ाई चुनौती
चमोली जैसे पहाड़ी जिलों में मौसम का अचानक बदलना राहत और बचाव अभियानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. तेज बारिश के दौरान पहाड़ों से मलबा आने, नदियों और नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने तथा सुरंगों के भीतर पानी के रिसाव का खतरा बढ़ जाता है.
पीपलकोटी टनल हादसे में भी पानी और मलबे का अचानक आना बचाव अभियान के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता सुरंग में फंसे मजदूरों तक सुरक्षित पहुंच बनाना और उन्हें जल्द से जल्द बाहर निकालना है. रेस्क्यू अभियान के आगे बढ़ने के साथ ही हादसे से जुड़ी तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है.
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