Ram Temple Flag: अयोध्या में श्रीराम मंदिर का शिखर अब एक और ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने जा रहा है. मंदिर के शीर्ष पर जल्द ही एक विशाल ध्वज लहराने वाला है, जो न सिर्फ श्रद्धा का प्रतीक होगा, बल्कि तकनीक और परंपरा के अद्भुत संगम को भी दिखाएगा. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इस समय ध्वजारोहण की तैयारियों के अंतिम चरण में है. बताया जा रहा है कि यह ध्वज पैराशूट फैब्रिक से बनाया जाएगा, ताकि मौसम और हवा की किसी भी चुनौती को सह सके.
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ इस पूरे प्रोजेक्ट में शामिल हैं. सेना की ओर से ध्वज की मजबूती, उसकी मूवमेंट और रस्सी के मैकेनिज्म पर तकनीकी सुझाव दिए जा रहे हैं. खास बात यह है कि यह ध्वज 360 डिग्री तक घूम सकेगा, जिसके लिए खास ‘चक्र-मैकेनिज्म’ लगाया जा रहा है.
205 फीट ऊंचा और 11 किलो वजनी ध्वज
राम मंदिर के शिखर की कुल ऊंचाई 161 फीट है, जिस पर 44 फीट लंबा ध्वज दंड (ध्वज स्तंभ) लगाया गया है. इस प्रकार कुल ऊंचाई 205 फीट हो जाएगी. ध्वज की लंबाई 22 फीट और चौड़ाई 11 फीट रखी गई है, जबकि इसका वजन लगभग 11 किलो होगा. इसे फहराने के लिए बेहद मजबूत नायलॉन रस्सी का प्रयोग किया जाएगा.
भगवा रंग में झलकेगा रामराज्य का भाव
यह ध्वज सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक होगा. इसमें कोविदार वृक्ष, भगवान सूर्य और ॐ चिह्न जैसे प्रतीक अंकित होंगे, जो रामराज्य के समन्वय, ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसका रंग केसरिया होगा, जो साहस, त्याग और धर्म का प्रतीक माना जाता है.
25 नवंबर को पीएम मोदी करेंगे ध्वजारोहण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर को स्वयं राम मंदिर के शिखर पर यह ध्वज फहराएंगे. उस दिन मंदिर परिसर में केवल आमंत्रित श्रद्धालुओं को ही प्रवेश मिलेगा. करीब 5,000 लोगों को इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए आमंत्रित किया गया है.
तकनीक और श्रद्धा का संगम
ध्वज के निर्माण के लिए जिस पैराशूट फैब्रिक का चयन किया गया है, वह हवा के भारी दबाव और मौसम की मार को झेलने में सक्षम है. यही कारण है कि सेना की सलाह पर इस विशेष कपड़े का उपयोग किया जा रहा है. इस पूरे आयोजन को एक प्रतीकात्मक ‘रामराज्य’ के रूप में देखा जा रहा है, जहां आस्था और विज्ञान दोनों मिलकर भारत की नई पहचान गढ़ रहे हैं.
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