आपसे बिना पूछे कंपनी ने खाते से काट लिए पैसे? अब नहीं चलेगी ये मनमानी

क्या आपने कभी महसूस किया है कि किसी ऐप का सब्सक्रिप्शन खत्म होने के बाद भी आपके खाते से पैसे कट गए हों? आप जानते भी नहीं और आपके कार्ड से फिर से वही सब्सक्रिप्शन खरीद लिया जाता है.

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क्या आपने कभी महसूस किया है कि किसी ऐप का सब्सक्रिप्शन खत्म होने के बाद भी आपके खाते से पैसे कट गए हों? आप जानते भी नहीं और आपके कार्ड से फिर से वही सब्सक्रिप्शन खरीद लिया जाता है. यह डिजिटल दुनिया की एक चालाकी है, लेकिन अब इस धोखाधड़ी पर बड़ा ब्रेक लग गया है. कंज्यूमर कोर्ट ने कंपनियों की मनमर्जी पर सीधी रोक लगाते हुए कड़ा संदेश भेज दिया है.


सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने ऑनलाइन फार्मेसी ऐप PharmEasy पर गंभीर कार्रवाई करते हुए 2 लाख रुपये का जुर्माना ठोका है. वजह साफ है—कंपनी ग्राहकों की अनुमति लिए बिना 99 रुपये वाली तीन महीने की मेंबरशिप को ऑटो-रिन्यू कर रही थी और बिना पूछे पैसे काट रही थी. सीसीपीए ने आदेश दिया है कि जिन सभी ग्राहकों से जबरन रकम काटी गई है, उन्हें पूरा रिफंड दिया जाए.

‘बास्केट स्नीकिंग’: वह धोखा जो आपको पता भी नहीं चलता

सीसीपीए ने रिपोर्ट में बताया कि फार्मईजी जिस तकनीक का इस्तेमाल कर रहा था, उसे “बास्केट स्नीकिंग” कहा जाता है. यह एक ऐसा डार्क पैटर्न है जिसमें किसी ऐप या वेबसाइट पर चेकआउट के दौरान बिना बताए किसी पैसे वाली सर्विस को कार्ट में जोड़ दिया जाता है. ग्राहक को पता ही नहीं चलता और बिल में अचानक रुपये बढ़ जाते हैं. यह सिस्टम ऐसा जाल बुनता है कि यूज़र अनजाने में सब्सक्रिप्शन खरीद लेता है.

कंपनी ने बाद में बंद किया फीचर, लेकिन नुकसान हो चुका था

PharmEasy ने दावा किया कि उसने यह ऑटो-रिन्यू फीचर बंद कर दिया है, लेकिन CCPA ने कहा कि सुधार तब किया गया जब मामला पकड़ लिया गया. जांच में पता चला कि करीब 24,000 ग्राहकों से बिना अनुमति के सब्सक्रिप्शन के पैसे काटे गए थे. कंपनी का कहना था कि कुछ पुराने यूज़र्स के लिए यह फीचर ऑन था और सिस्टम अपडेट में समय लग रहा था, लेकिन सीसीपीए ने इसे बहाना बताया.

ग्राहक की सहमति छीनी नहीं जा सकती: CCPA का सख्त रुख

सीसीपीए ने अपने आदेश में साफ कहा कि इस तरह के डार्क पैटर्न ग्राहक की आजादी और अधिकार दोनों छीनते हैं. कोई भी कंपनी ऐसी सर्विस थोप नहीं सकती जिसके लिए ग्राहक ने कभी ‘हाँ’ न कही हो. इसलिए अब आदेश दिया गया है कि यह फीचर स्थायी तौर पर बंद किया जाए और सभी प्रभावित यूज़र्स को तुरंत रिफंड दिया जाए.

अब ऑनलाइन कंपनियों पर होगी सख्त निगरानी

डिजिटल मार्केट में इस तरह की चालाकियों का चलन बढ़ रहा था. लेकिन फार्मईजी पर कार्रवाई के बाद यह साफ है कि अब किसी भी ऐप या वेबसाइट को ग्राहक की जेब पर हमला करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. इस फैसले ने लाखों यूज़र्स को राहत दी है और कंपनियों को भी चेतावनी दे दी है कि छिपे हुए ट्रिक्स का दौर अब खत्म होना चाहिए.

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