BSNL Satellite Phone: देश में संचार सेवाओं को नई दिशा देने की कोशिश के तहत भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने एक नया सैटेलाइट फोन पेश किया है. यह डिवाइस खास तौर पर उन इलाकों के लिए तैयार किया गया है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता. हालांकि, इस फोन को खरीदना किसी आम स्मार्टफोन की तरह आसान नहीं होगा. भारत में सैटेलाइट फोन रखने और इस्तेमाल करने के लिए सरकारी अनुमति जरूरी है. ऐसे में अगर आप इसे खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो पहले नियमों को समझना बेहद जरूरी है.
Inmarsat के साथ मिलकर तैयार किया गया सैटेलाइट फोन
BSNL ने इस हैंडसेट को ग्लोबल सैटेलाइट नेटवर्क प्रोवाइडर Inmarsat के साथ साझेदारी में विकसित किया है. यह फोन सीधे सैटेलाइट नेटवर्क से जुड़कर काम करता है, इसलिए उन क्षेत्रों में भी संचार संभव बनाता है जहां मोबाइल टावरों का कोई कवरेज नहीं होता. कंपनी का कहना है कि इसे खास परिस्थितियों और प्रोफेशनल उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है.
किन लोगों के लिए है यह डिवाइस?
यह सैटेलाइट फोन आम उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है. BSNL के अनुसार यह डिफेंस, समुद्री सेवाओं, आपदा प्रबंधन, माइनिंग, रिमोट ऑपरेशन और एडवेंचर ट्रैवल जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए अधिक उपयोगी है. ऐसे स्थानों पर जहां सामान्य नेटवर्क पूरी तरह फेल हो जाता है, वहां यह फोन संचार का भरोसेमंद माध्यम बन सकता है.
फोन के फीचर्स और कीमत
कंपनी के मुताबिक, सैटेलाइट कनेक्टिविटी होने के बावजूद इस फोन से स्पष्ट वॉइस कॉल की जा सकती है. इसमें इमरजेंसी कम्युनिकेशन सपोर्ट दिया गया है. फोन को मजबूत और टिकाऊ (रग्ड) डिजाइन के साथ तैयार किया गया है ताकि कठिन परिस्थितियों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सके. इसके अलावा इसमें लंबी बैटरी लाइफ भी दी गई है.
इस सैटेलाइट फोन की कीमत 1,34,166 रुपये रखी गई है. इच्छुक खरीदार इसे BSNL के अधिकृत कार्यालयों से खरीद सकते हैं, लेकिन खरीदारी से पहले दूरसंचार विभाग (DoT) से आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य होगा.
बिना अनुमति खरीदना या रखना पड़ सकता है भारी
भारत में सैटेलाइट फोन के उपयोग पर कड़े नियम लागू हैं. बिना वैध सरकारी अनुमति के इस तरह का फोन खरीदना, रखना या इस्तेमाल करना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है. इसलिए किसी भी तरह की खरीदारी से पहले संबंधित सरकारी मंजूरी लेना जरूरी है.
कैसे काम करता है सैटेलाइट फोन?
सामान्य मोबाइल फोन जहां मोबाइल टावरों के जरिए नेटवर्क प्राप्त करते हैं, वहीं सैटेलाइट फोन सीधे पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे सैटेलाइट से जुड़ते हैं. यही वजह है कि इनका इस्तेमाल समुद्र, पहाड़, जंगल और अन्य दूरदराज के इलाकों में भी किया जा सकता है, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता.
लोकप्रिय क्यों नहीं हैं सैटेलाइट फोन?
सैटेलाइट फोन की उपयोगिता काफी ज्यादा है, लेकिन इसके बावजूद यह आम लोगों के बीच लोकप्रिय नहीं हो पाए हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह इनकी ऊंची कीमत और कॉलिंग खर्च है. कई मामलों में एक मिनट की कॉल की लागत 100 रुपये से भी अधिक हो सकती है. इसके अलावा कॉल के दौरान आवाज पहुंचने में थोड़ा विलंब (कॉल लेग) होता है. इन डिवाइसों का आकार भी सामान्य स्मार्टफोन की तुलना में बड़ा और भारी होता है, जिससे इन्हें रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए कम सुविधाजनक माना जाता है.
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