Crude Oil: 56 डॉलर तक टूटा कच्चा तेल, दो महीने में 45% हुआ सस्ता, कब घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में पिछले दो महीनों के दौरान बड़ी गिरावट देखने को मिली है. कुछ समय पहले तक जिस कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, अब वही तेल काफी सस्ता हो चुका है.

Crude oil price drops to becoming cheaper in two months petrol and diesel prices
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में पिछले दो महीनों के दौरान बड़ी गिरावट देखने को मिली है. कुछ समय पहले तक जिस कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, अब वही तेल काफी सस्ता हो चुका है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इसका फायदा भारत के लोगों को भी मिलेगा? क्या पेट्रोल और डीजल के दाम कम होंगे या लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा?

फिलहाल देश में सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. हालांकि, बाजार में उम्मीद जरूर बढ़ गई है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक सस्ता बना रहता है, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है.

दो महीने पहले क्यों महंगा हुआ था कच्चा तेल?

करीब दो महीने पहले मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में हालात काफी तनावपूर्ण थे. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच लगातार सैन्य तनाव बढ़ रहा था. मिसाइल और ड्रोन हमलों की वजह से पूरी दुनिया की नजर इस क्षेत्र पर थी.

इसी दौरान होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में तेल के जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है.

सप्लाई रुकने की आशंका बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से चढ़ गईं. उस समय ब्रेंट क्रूड करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी लगभग 117 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था.

अब हालात बदल चुके हैं

अब स्थिति पहले जैसी नहीं है. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू हो चुकी है और दोनों देशों के बीच तनाव पहले की तुलना में कम हुआ है.

इसके साथ ही होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई भी सामान्य होने लगी है. इससे बाजार में यह भरोसा बढ़ा है कि आने वाले समय में तेल की कमी नहीं होगी.

इसी सकारात्मक माहौल का असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है. पिछले दो महीनों में तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.

ब्रेंट क्रूड में आई 45 फीसदी तक गिरावट

अगर ब्रेंट क्रूड की बात करें तो यह अप्रैल के आखिर में करीब 126.41 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर पहुंच गया था.

अब इसकी कीमत घटकर करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई है.

यानी दो महीने के भीतर ब्रेंट क्रूड करीब 56 डॉलर प्रति बैरल सस्ता हो चुका है. प्रतिशत के हिसाब से देखें तो इसमें लगभग 45 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

यह गिरावट पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है.

अमेरिकी कच्चा तेल भी हुआ काफी सस्ता

अमेरिकी WTI क्रूड की कीमतों में भी अच्छी-खासी कमी देखने को मिली है.

कुछ समय पहले इसकी कीमत करीब 117.63 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. अब यह घटकर लगभग 68 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है.

इस तरह अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत करीब 50 डॉलर प्रति बैरल तक कम हो चुकी है. यानी इसमें भी 40 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई है.

आखिर तेल इतना सस्ता क्यों हुआ?

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के पीछे कई बड़ी वजहें हैं.

सबसे पहली वजह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत है. दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ने से बाजार में तनाव कम हुआ है और तेल सप्लाई रुकने का खतरा भी घटा है.

दूसरी बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट से फिर से सामान्य तरीके से तेल की आवाजाही शुरू होना है. अब बड़ी संख्या में तेल के जहाज इस रास्ते से गुजर रहे हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई मजबूत हुई है.

इसके अलावा अमेरिका में भी रिकॉर्ड स्तर पर कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है. अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार, देश में तेल उत्पादन करीब 13.93 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है. इससे दुनिया में तेल की उपलब्धता बढ़ी है और कीमतों पर दबाव बना हुआ है.

अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ खतरा

हालांकि हालात पहले से बेहतर हुए हैं, लेकिन बाजार अभी भी पूरी तरह निश्चिंत नहीं है.

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अभी शुरुआती दौर में है. अगर भविष्य में फिर कोई तनाव पैदा होता है या होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें दोबारा बढ़ सकती हैं.

इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार फिलहाल हर नए घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है.

क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल?

यही वह सवाल है जिसका जवाब हर आम आदमी जानना चाहता है.

कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है.

पिछले 38 दिनों से सरकारी तेल कंपनियों ने कीमतों में कोई संशोधन नहीं किया है. आखिरी बार मई के अंत में ईंधन की कीमतों में बदलाव देखने को मिला था.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल लंबे समय तक इसी स्तर पर बना रहता है, तो सरकार और तेल कंपनियां आगे चलकर कीमतों पर फैसला ले सकती हैं.

लेकिन फिलहाल तुरंत राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है.

चार बड़े शहरों में क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

देश के प्रमुख शहरों में फिलहाल ईंधन की कीमतें इस प्रकार हैं—

  • दिल्ली : पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर.
  • मुंबई : पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर.
  • कोलकाता : पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर.
  • चेन्नई : पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर.

इन कीमतों में पिछले कई दिनों से कोई बदलाव नहीं हुआ है.

नायरा ने जरूर दी राहत

जहां सरकारी कंपनियों ने कीमतें नहीं बदली हैं, वहीं निजी क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी फ्यूल रिटेल कंपनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने ग्राहकों को राहत दी है.

कंपनी ने पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है.

करीब दो साल बाद किसी बड़ी पेट्रोलियम कंपनी ने इस तरह ईंधन के दाम घटाए हैं. इसके बाद लोगों की उम्मीद बढ़ गई है कि सरकारी तेल कंपनियां भी आने वाले समय में ऐसा कदम उठा सकती हैं.

सरकारी कंपनियां अभी क्यों नहीं घटा रहीं कीमतें?

विशेषज्ञों का कहना है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, तब सरकारी तेल कंपनियों ने उसी अनुपात में पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए थे.

इस वजह से कंपनियों को काफी वित्तीय दबाव झेलना पड़ा.

अब जब कच्चा तेल सस्ता हुआ है, तो कंपनियां पहले अपने पुराने नुकसान की भरपाई करना चाहती हैं. इसलिए फिलहाल कीमतों में कटौती की संभावना कम मानी जा रही है.

आगे क्या हो सकता है?

अगर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास या इससे नीचे बनी रहती हैं और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव नहीं बढ़ता है, तो भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है.

हालांकि अंतिम फैसला सरकारी तेल कंपनियों और सरकार की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा.

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