"बॉलीवुड हर तीन साल में बदल जाता है", युवा सितारों से प्रतिस्पर्धा और नंबर 1 जैसे मिथक पर बोले अक्षय कुमार

Akshay Kumar News: अपने स्टारडम को हमेशा सहजता से निभाने वाले अक्षय कुमार ने एक बार फिर यही साबित किया, जब उन्होंने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में पत्रकार राजदीप सरदेसाई के साथ बातचीत के दौरान बॉलीवुड के बदलते दौर और दर्शकों की पसंद पर दार्शनिक अंदाज़ में अपनी बात रखी.

Bollywood changes every three years Akshay Kumar on competition from young stars and the myth
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Akshay Kumar News: अपने स्टारडम को हमेशा सहजता से निभाने वाले अक्षय कुमार ने एक बार फिर यही साबित किया, जब उन्होंने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में पत्रकार राजदीप सरदेसाई के साथ बातचीत के दौरान बॉलीवुड के बदलते दौर और दर्शकों की पसंद पर दार्शनिक अंदाज़ में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री लगातार खुद को बदलती रहती है और सितारों को भी उसी के साथ बदलना पड़ता है.

अक्षय कुमार ने कहा, “फिल्म इंडस्ट्री एक सर्कल की तरह है. यह लगातार बदलती रहती है. हर दो-तीन साल में सब कुछ बदल जाता है, कॉन्सेप्ट, ऑडियंस और उनकी पसंद.” उन्होंने इसे आसान शब्दों में समझाते हुए कहा, “दर्शकों का टेस्ट भी बदलता रहता है.”

हाल के एक्शन सिनेमा की बात करते हुए अक्षय ने युवा सितारों की भी तारीफ की. रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, “पूरी एक्शन फिल्म है, पूरी फिल्म खून-खराबे से भरी हुई है. लोगों ने इसे खूब पसंद किया. उसमें वह एक बहुत गुस्सैल यंग मैन का किरदार निभा रहे हैं.”

साथ ही अक्षय ने यह भी कहा कि फिल्मों के ट्रेंड हमेशा घूमकर वापस आते हैं. “पांच-छह साल पहले सोशल मैसेज वाली फिल्में चल रही थीं. टॉयलेट और पैडमैन जैसी फिल्मों ने बहुत अच्छा काम किया. अब हॉरर-कॉमेडी का दौर चल रहा है. आगे दर्शकों को क्या पसंद आएगा, यह कोई नहीं जानता.”

जब उनसे पूछा गया कि क्या कभी उन्हें अफसोस होता है कि कोई अच्छी फिल्म किसी दूसरे अभिनेता को मिल गई, तो अक्षय ने ईमानदारी से जवाब दिया कि ऐसा महसूस होना स्वाभाविक है, लेकिन यह स्थायी नहीं होता. “कई बार मैं रणवीर से मिलता हूं और वह कहते हैं, ‘काश मैं वो फिल्म करता जो आपने की.’ ऐसा होता रहता है. कोई किसी फिल्म को करना चाहता है, कोई दूसरी फिल्म. लगभग 15-20 अभिनेता हैं और करीब 180 हिंदी फिल्में बनती हैं, तो सबको काम मिल ही जाता है.”

हालांकि, नंबर 1 बनने की दौड़ पर उन्होंने साफ तौर पर अपनी असहमति जताई. “नंबर वन, नंबर टू, नंबर थ्री, यह सब महालक्ष्मी के रेसकोर्स के लिए है, जहां घोड़े दौड़ते हैं. हम घोड़े नहीं हैं, हम अभिनेता हैं,” अक्षय ने कहा, जिस पर दर्शकों ने जोरदार तालियां बजाईं.

अक्षय के मुताबिक, इस तरह की रैंकिंग के पीछे भागना इंसान की खुशी छीन सकता है. “इस सोच के साथ आप खुशी खो देते हैं. आप बस ऊपर जाने की कोशिश करते रहते हैं और कई बार अपना संतुलन खो देते हैं. जैसे मैंने कहा, पानी की तरह जियो. अच्छी बातें करो, अच्छा खाना खाओ, अच्छा व्यवहार करो जिंदगी बहुत खूबसूरत हो जाती है.”

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